FCI के मानकों में फेल हुआ 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं, MP के किसानों का फंसा पैसा
News in short
- 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट होने से प्रदेश के हजारों किसानों का पैसा अटक गया है।
- सबसे अधिक 3500 मीट्रिक टन गेहूं नर्मदापुरम जिले में रिजेक्ट किया गया।
- रिकॉर्ड 4.79 लाख मीट्रिक टन खरीदी के साथ उज्जैन प्रदेश में सबसे आगे है।
- रीवा संभाग में परिवहन की गति सबसे कम है, मऊगंज में मात्र 31 प्रतिशत ही उठाव हुआ है।
- अगले 15 दिनों में प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य पूरा करना है।
News in detail
भोपाल: मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का काम अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इसी बीच एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। प्रदेश के कई केंद्रों से खरीदा गया करीब 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने रिजेक्ट कर दिया है।
तकनीकी मानकों पर खरा न उतरने के कारण इस गेहूं की स्वीकार्यता (Acceptability) रुक गई है, जिसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ा है। जब तक यह गेहूं स्वीकार नहीं होता, तब तक किसानों के बैंक खातों में पैसा नहीं पहुंचेगा।
मानकों की कसौटी पर नर्मदापुरम फेल
हैरानी की बात यह है कि गेहूं उत्पादन में कई बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना चुका नर्मदापुरम जिला इस बार रिजेक्शन के मामले में भी टॉप पर है। यहां कुल 2.58 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हुई, जिसमें से 3500 मीट्रिक टन गेहूं को FCI ने लेने से मना कर दिया।
इस पर अधिकारियों का कहना है कि यह गेहूं खराब नहीं है, लेकिन सरकारी मानकों को पूरा नहीं करता। अब इस रिजेक्टेड स्टॉक की दोबारा ग्रेडिंग कराई जा रही है ताकि इसे फिर से भेजा जा सके।
खरीदी के मामले में उज्जैन नंबर-1 पर
खरीदी के मामले में मुख्यमंत्री का गृह जिला उज्जैन सबसे तेज दौड़ रहा है। शनिवार (9 मई 2026) शाम तक यहां 4.79 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड तोड़ उपार्जन हो चुका है।
वहीं, राजधानी भोपाल ने खरीदे गए माल को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने में बाजी मारी है। भोपाल में 92% गेहूं का परिवहन हो चुका है और यहां के 90% स्टॉक को एफसीआई ने हरी झंडी दे दी है।
सर्वर और मैपिंग की दूर हुई बाधा
इस बार खरीदी सीजन में कई चुनौतियां आईं। शुरुआत में सैटेलाइट मैपिंग में खेत खाली दिखने के कारण स्लॉट बुकिंग में समस्या आई। इसके बाद जब सर्वर ठप हुआ, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद मोर्चा संभाला। उनके कड़े निर्देशों के बाद नियमों में ढील दी गई और खरीदी के दिन 5 से बढ़ाकर 6 कर दिए गए।
इसके साथ ही तौलकांटों की संख्या बढ़ाने और देर रात तक तुलाई होने से व्यवस्था में सुधार दिखा। इससे अब तक 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीदी (गेहूं का समर्थन मूल्य) संभव हो पाई है।
परिवहन के मामले में रीवा संभाग पीछे
परिवहन के मामले में रीवा संभाग की स्थिति चिंताजनक है। सिंगरौली, मऊगंज और सीधी जैसे जिलों में अभी भी आधा गेहूं केंद्रों (गेहूं खरीदी केंद्र) पर ही पड़ा है, जिससे मौसम बिगड़ने पर नुकसान का डर है।
दूसरी ओर, राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर और हरदा जैसे जिले मिसाल बनकर उभरे हैं, जहां का एक दाना भी रिजेक्ट नहीं हुआ। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 100 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को अगले 15 दिनों में पूरा करने की है।
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