बधाई हो! किसान बने गेमर्स, मोबाइल पर अंगूठा घिस रहे, पर स्लॉट बना मिस्टर इंडिया

Sanjay Sharma | Apr 28, 2026, 18:02 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. एमपी में गेहूं खरीदी (Wheat Procurement) अधूरी तैयारी से जंजाल बनी है। सैटलाइट इमेजरी, स्लॉट बुकिंग, तोल में दिक्कत। होशंगाबाद, विदिशा, सागर के किसान परेशान हैं। समर्थन नहीं मिल रहा।

पांच पाइंट में समझें पूरी अव्यवस्था...

  • एडवांस प्लानिंग के बावजूद गेहूं खरीदी केंद्रों पर भारी अव्यवस्था है।
  • सैटलाइट इमेजरी में रकबा गलत दर्ज होने से अटक रही स्लॉट बुकिंग।
  • स्लॉट बुकिंग नहीं होने से किसान नहीं करा पा रहे गेहूं की तुलाई।
  • पहले बारदाना, फिर स्लॉट बुकिंग और अब सेटेलाइट सर्वे बना मुसीबत।
  • खरीद केंद्रों पर नमी और क्वालिटी के नाम पर हो रही है वसूली।

बधाई हो! हमारे किसान अब खेती छोड़कर 'गेमर्स' बन गए हैं। पिछले 48 घंटों से कंप्यूटर और मोबाइल पर अंगूठा घिस रहे हैं, पर स्लॉट है कि 'मिस्टर इंडिया' बना हुआ है। सुना था कि डिजिटल होने से काम आसान होगा, यहां तो फसल बेचने के लिए 'फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट' खेलना पड़ रहा है। फसल मंडी ले जानी है या चांद पर? कम से कम ये तो बता दो। ये पीड़ा और तंज है किसान कमल सिंह तंवर का।



न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए वे स्लॉट बुक करने के लिए परेशान हो रहे हैं, लेकिन स्लॉट बुक नहीं हो रहा है। ऐसी ही कहानी राहुल सूर्यवंशी की है। उनका कहना है कि साइट चल नहीं रही। तारीख 9 क्या 20 भी कर दो, तो क्या फायदा? सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हो कभी कमेंट भी पढ़ लिया करो महाराज। हवा हवाई सर्वे और हवा हवाई बातें।



अर्जुन चौधरी ने कहा कि ई उपार्जन वाली साइट वाले अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दो, जिनकी वजह से सरकार की रोज किरकिरी हो रही है। सोशल मीडिया इन दिनों मध्यप्रदेश के किसानों के ऐसे ही तल्ख कमेंट्स से भरा पड़ा है।



मध्यप्रदेश में एडवांस प्लान से गेहूं खरीदी में किसान बेहाल हैं। स्लॉट बुकिंग फेल हो रही है। वहीं, जिनके स्लॉट बुक हुए हैं, उन्हें भी तौल में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रों पर किसानों की मेहनत सिसक रही है। नर्मदापुरम, उज्जैन, खंडवा, सागर, विदिशा, सीहोर और रायसेन जिलों में भारी अव्यवस्था है। सरकार के भरोसे के बावजूद केंद्रों पर किसानों को सुविधा नहीं मिल रही है।



सरकार का दावा है कि प्रदेश में अब मध्यम और बड़े वर्ग के 1.36 लाख किसानों ने स्लॉट कराए हैं। 4 लाख 20 हजार किसानों से 17 लाख 82 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। मध्यम और बड़े तो छोड़िए छोटे किसानों के ही स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी का एडवांस प्लान फिर फेल साबित हुआ है।



समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी में सरकार ने पिछले सालों की परेशानियों से कोई सबक नहीं लिया है नतीजा किसानों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। फर्जीवाड़े पर कसावट के लिए सैटेलाइट इमेजरी सर्वे ने भी किसानों की उलझन बढ़ा दी है। फसल कटाई के बाद खेतों के सर्वे में सैटेलाइट इमेजरी की चूक स्लॉट बुकिंग अटका रही है।



वहीं, छोटे रकबेदार किसानों के लिए पहले खरीद की व्यवस्था भी नाराजगी का कारण बन गई है। समर्थन मूल्य पर बार-बार टलने के बाद शुरू हुई गेहूं की तुलाई अब भी पटरी पर नहीं लौटी है। इस वजह से पूरे प्रदेश में किसान विरोध करते नजर आ रहे हैं।



स्लॉट बुकिंग से पिछड़ी गेहूं खरीदी

मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए सरकार ने 9 अप्रैल से खरीदी केंद्र खोले हैं। तैयारी अधूरी रहने से पहले दिन आधे से ज्यादा केंद्रों पर खरीदी नहीं हुई। वहीं ज्यादातर केंद्रों पर स्लॉट बुकिंग ने भी खरीदी की रफ्तार रोक दी थी।



अब खरीदी करने वाले केंद्रों की संख्या बढ़ गई है और तुलाई की रफ्तार भी तेज हुई है, लेकिन मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। किसानों को अब भी स्लॉट बुकिंग की ऑनलाइन व्यवस्था का झंझट परेशान कर रहा है।



पारिवारिक खर्च में तंगहाल किसान

इस साल समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए सैटेलाइट इमेजरी से स्लॉट बुकिंग की पात्रता तय की गई थी। खरीदी केंद्रों पर भीड़ की स्थिति को नियंत्रित करने पहले छोटे रकबे वाले किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग खोली गई।



इन नई व्यवस्थाओं के बीच खरीद केंद्रों पर गेहूं की तुलाई दस दिन से एक पखवाड़े तक पिछड़ गई है। वहीं परिवार में वैवाहिक आयोजन और दूसरे खर्चों को लेकर किसान तंगहाल स्थिति में है। नर्मदापुरम, विदिशा, सागर, उज्जैन, सीहोर, खंडवा, रायसेन जिलों से आए दिन शिकायतें सामने आ रही हैं।



बिना तैयारी व्यवस्था बदलना पड़ा भारी

प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए 3171 खरीद केंद्रों बनाए गए हैं। बीते सालों में हुए फर्जीवाड़े, केंद्रों पर लंबी कतारें और कई दिनों तक तुलाई न होने की शिकायतों के चलते कई बदलाव किए गए हैं। इस साल सेटेलाइट इमेजरी के जरिए गेहूं के रकबे के सर्वे के आधार पर स्लॉट बुकिंग की जा रही है।



सर्वे की रिपोर्ट में कई बार रकबा गलत आने से स्लॉट बुक नहीं हो रहा। वहीं स्लॉट बुकिंग में भी कई बार तकनीकी अवरोध आ रहा है। अधूरी व्यवस्थाओं के बीच किए गए ये बदलाव अब जी का जंजाल बन गए हैं।



इंतजार से तंग किसान मंडी में बेच रहे गेहूं

मध्य प्रदेश में इस वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था। जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया है। वहीं किसानों को प्रति क्विटल समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपए के बोनस के साथ 2625 रुपए का भुगतान किया जा रहा है।



केंद्रों पर स्लॉट बुकिंग में लग रहे समय से परेशान किसान 500 से 600 रुपए का घाटा सहकर अपनी उपज मंडी में बेंच रहे हैं। किसानों का कहना है परिवार में बेटा- बेटियों के विवाह हैं। व्यापारियों का कर्ज चुकाना है। केंद्रों पर बुकिंग का समय तय नहीं है इसलिए वे मजबूर हैं।



खरीद केंद्रों की दूरी ने बढ़ाई मुश्किल

इस बार गेहूं खरीद के लिए निर्धारित किए गए केंद्रों ने भी किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पहले गांवों के आसपास की सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर तुलाई होती रही है।



इस बार केंद्रों को बदलकर कई किलोमीटर दूर रखा गया है। विदिशा जिले में खरपरी सहकारी समिति के आसपास के किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं तुलाई कराने 25 किलोमीटर दूर दिघोनी केंद्र तक जाना पड़ रहा है। ऐसे ही हालात प्रदेश के अन्य अंचलों में नजर आ रहे हैं।



अव्यवस्थाओं में घिरे प्रदेश के किसान...

  1. सागर के जैसीनगर में किसान रामदयाल का गेहूं भीग गया क्योंकि स्लॉट नहीं मिला। स्लॉट नहीं मिला तो तुलाई नहीं हुई और मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ा है।
  2. होशंगाबाद के इटारसी केंद्र पर बारदाना खत्म होने से पांच दिन से तौल रुकी है। इस वजह से स्लॉट बुक कराने के बाद केंद्र पर पहुंचे किसान वहीं रात गुजार रहे हैं।
  3. विदिशा के गंजबासौदा में नमी जांच के नाम पर कई किसानों की तुलाई रोकी गई थी। विरोध के बाद जांच में केंद्र पर उपयोग की जा रही मशीन में ही गड़बड़ी मिली है।
  4. रायसेन के बरेली में तुलाई के बाद भी भुगतान अटकने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। जबकि केंद्रों पर तुलाई के 72 घंटे में भुगतान का भरोसा दिलाया गया है।
  5. उज्जैन के तराना में 200 किसान चार दिन से गेहूं की तुलाई के लिए परेशान हैं। वे केंद्र के संचालक के साथ ही जिले के अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचा चुके हैं।
  6. सीहोर के आष्टा में किसान दिनेश मेवाड़ा द्वारा बुक किया स्लॉट बाद में निरस्त हो गया। गिरदावरी में फसल दर्ज होने के बावजूद सैटेलाइट सर्वे में यह खाली दिखाया गया है।
  7. दमोह के हटा में 50 से ज्यादा किसानों का गेहूं नमी ज्यादा बताकर रिजेक्ट कर दिया गया। इन किसानों ने केंद्रों पर तुलाई के लिए कमीशन वसूली की शिकायत की है।
  8. खंडवा के पंधाना में तीन दिन से सर्वर ठप पड़ा होने से सैकड़ों किसानों के स्लॉट ही बुक नहीं हो पाए हैं। मजबूरी में कई किसानों ने मंडी में कम दाम पर गेहूं बेंचना पड़ा है।

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