स्लॉट सिस्टम से लाखों किसान परेशान! भाजपा के पूर्व मंत्री के भाई तक उतरे विरोध में
समझें पूरा मामला...
- स्लॉट बुकिंग नहीं होने से किसान गेहूं बेच नहीं पा रहे।
- कई जिलों में सर्वर और पोर्टल लगातार डाउन रहे।
- कमल पटेल के भाई ने हरदा में धरना दिया।
- कांग्रेस ने खरीदी व्यवस्था पर सरकार को घेरा।
- 28 मई तक खरीदी पूरी करने पर सवाल उठ रहे।
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। प्रदेश के कई जिलों में किसान स्लॉट बुकिंग नहीं होने से अपना गेहूं बेचने से वंचित हो रहे हैं। कहीं सर्वर डाउन है, तो कहीं पोर्टल जवाब दे रहा है।
हालत यह है कि भाजपा के पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल के भाई तक धरने पर बैठ गए। कांग्रेस भी सरकार को घेर रही है और किसान संगठन लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। सवाल अब सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि लाखों किसानों की फसल और भुगतान का बनता जा रहा है।
स्लॉट सिस्टम में फंसी गेहूं खरीदी
मध्यप्रदेश सरकार 28 मई तक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हालात सरकारी दावों से अलग नजर आ रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में किसान स्लॉट बुक नहीं होने से खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे।
किसानों का कहना है कि पंजीयन होने के बावजूद पोर्टल पर स्लॉट नहीं मिल रहे। कई जगह सर्वर डाउन की समस्या लगातार बनी हुई है। इस वजह से हजारों नहीं, बल्कि लाखों किसानों के सामने फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है।
पूरे प्रदेश में बढ़ रही परेशानी
हरदा, पन्ना, दमोह समेत कई जिलों से किसान लगातार शिकायतें कर रहे हैं। कहीं किसान पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे हैं तो कहीं स्लॉट खत्म होने की बात सामने आ रही है।
प्रदेशभर में किसानों की प्रमुख समस्याएं...
- स्लॉट बुकिंग नहीं हो रही।
- बार-बार सर्वर डाउन।
- खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था।
- पंजीयन के बाद भी गेहूं नहीं बिक पा रहा।
- किसान कई दिनों से चक्कर काटने को मजबूर।
- भुगतान और खरीदी तिथि को लेकर असमंजस।
- राजनीतिक गलियारों में अब यह मुद्दा तेजी से गर्म होने लगा है।
भाजपा के पूर्व मंत्री के भाई भी मैदान में
हरदा में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल के भाई रामशंकर पटेल ने किसानों की समस्या को लेकर धरना दिया। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों के लिए नीति बनाती है, लेकिन जमीनी अमला उसे सही तरीके से लागू नहीं कर पा रहा।
पटेल का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो प्रदेश के लाखों किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित रह सकते हैं। भाजपा से जुड़े चेहरे के विरोध में उतरने के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया है।
कांग्रेस भी हमलावर, दी चेतावनी
छिंदवाड़ा में कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अचानक स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया धीमी कर दी, जिससे हजारों किसान फंस गए।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों के स्लॉट दोबारा शुरू नहीं हुए, तो पार्टी प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। आंकड़े बता रहे संकट कितना बड़ा है छिंदवाड़ा जिले में करीब 29 हजार से ज्यादा किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था, लेकिन जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में किसान स्लॉट बुक नहीं कर पाए।
कई किसानों का आरोप है कि लगातार कोशिश के बाद भी पोर्टल पर स्लॉट उपलब्ध नहीं हुए। जिले में 84 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर क्या है स्लॉट बुकिंग सिस्टम?
सरकार ने गेहूं खरीदी केंद्रों में भीड़ और अव्यवस्था रोकने के लिए स्लॉट बुकिंग सिस्टम लागू किया था।
यह सिस्टम कैसे काम करता है?...
- किसान पहले समर्थन मूल्य पर पंजीयन कराता है।
- फिर ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक करता है।
- तारीख और खरीदी केंद्र तय होता है।
- पावती डाउनलोड कर किसान निर्धारित दिन गेहूं बेचता है।
सरकार का दावा था कि इससे किसानों को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, लेकिन अब यही व्यवस्था किसानों के लिए नई परेशानी बनती दिखाई दे रही है।
किसान संगठनों ने भी उठाए सवाल...
प्रदेश में किसान संगठन लंबे समय से खरीदी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। संगठनों का कहना है कि तकनीकी सिस्टम बनाने से पहले गांवों और किसानों की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी था। कई किसान ऐसे हैं जिन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है। ऊपर से सर्वर की दिक्कतों ने हालात और खराब कर दिए हैं।
चिंता बढ़ाने वाली दूसरी घटनाएं भी सामने
प्रदेश के कई जिलों से खरीदी संकट से जुड़ी गंभीर घटनाएं भी सामने आ रही हैं। पन्ना में हजारों किसान स्लॉट के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। दमोह में गेहूं बचाने की कोशिश के दौरान बड़ा हादसा हो चुका है। कई जगह खरीदी केंद्रों के बाहर गेहूं की बोरियां पड़ी हैं। इन घटनाओं ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
सरकार के सामने बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार 28 मई से पहले लाखों किसानों की समस्या का समाधान निकाल पाएगी? क्योंकि यदि स्लॉट बुकिंग की समस्या दूर नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य का लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं।
साथ ही यह मुद्दा चुनावी और राजनीतिक रूप से भी सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी का मुद्दा अब केवल तकनीकी गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा।
यह किसानों की आय, सरकारी व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। प्रदेशभर में बढ़ते विरोध, धरना-प्रदर्शन और किसानों की नाराजगी ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
अब निगाह इस बात पर है कि सरकार सिस्टम सुधारती है या फिर लाखों किसानों की मेहनत मंडियों और खरीदी केंद्रों के बाहर ही अटककर रह जाएगी।
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