एमपी सरकार की बड़ी जीत: बांग्लादेशी तस्कर तालुकदार के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस, 195 देशों में होगी अब तलाश
मध्यप्रदेश में अब वन्यजीवों की तस्करी करने वाले सुरक्षित नहीं बच पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश की पुलिस और वन विभाग अलर्ट है। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का खुलासा किया है। यह खुलासा जलीय वन्यजीवों की तस्करी करने वाले एक विदेशी नेटवर्क का है। सरकार ने ठान लिया है कि अपराधियों को पाताल से भी खोज लाएंगे। इस कार्रवाई में अब केंद्रीय वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और इंटरपोल भी एमपी सरकार की मदद कर रही है।
मुरैना से उजागर हुआ था अंतरराष्ट्रीय गिरोह
जुलाई 2025 में मुरैना जिले से एसटीएफ ने तीन लोगों को पकड़ा था। उनके पास से 30 घड़ियाल के बच्चे और दुर्लभ कछुए बरामद किए गए। इसमें 17 रेड-क्राउंड रूफ्ड टर्टल और 19 थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल शामिल थे। जांच में पता चला कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं बल्कि बड़ा सिंडिकेट है। यह गिरोह इन मासूम जीवों को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजता था। वहां से इन्हें म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में बेचा जाता था।
STSF ने बिछाया जाल: कानपुर से गिरफ्तार हुआ बड़ा प्यादा
एसटीएसएफ की टीम ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को दबोचा है। मार्च 2026 में टीम को एक और बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई थी। देश के सबसे बड़े जलीय जीव तस्कर तारकनाथ घोष को गिरफ्तार किया गया। तारकनाथ को उत्तर प्रदेश के कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से धर दबोचा गया। उस पर पहले से ही वन्यजीवों की तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।
बांग्लादेशी आका तालुकदार की तलाश
पूछताछ में पता चला कि इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड बांग्लादेशी है। अल हज शफीकुल इस्लाम रहमान तालुकदार उर्फ रेमंड ही मुख्य सरगना है। वह बांग्लादेश में बैठकर पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में तस्करी का जाल चलाता है। STSF ने ठोस सबूत जुटाकर शिवपुरी कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट हासिल किया। केंद्र सरकार की मदद से इंटरपोल से संपर्क कर उसकी जानकारी साझा की गई।
इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस: अब दुनियाभर में होगी तलाश
एमपी वन विभाग की अथक कोशिशों के बाद बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। 29 अप्रैल 2026 को इंटरपोल ने तालुकदार के खिलाफ रेड नोटिस जारी किया। इंटरपोल 195 देशों का संगठन है जो अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को पकड़ता है। इस पूरी कार्रवाई में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने पूरा सहयोग दिया। इंटरपोल पहले भी 4 बार हमारी STSF की तारीफ कर चुका है।
इंटरपोल और WCCB की मदद
इस अभियान में केंद्रीय वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और इंटरपोल ने अहम भूमिका निभाई। दोनों ने मिलकर तस्करों के नेटवर्क को उजागर किया और तस्करी के रैकेट को तोड़ने में मदद की। मध्यप्रदेश के वन विभाग और एसटीएसएफ के समन्वय से यह कार्रवाई प्रभावी बनी।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की सराहना
एसटीएसएफ द्वारा किए गए अभियानों की इंटरपोल और अन्य देशों की पुलिस ने सराहना की है। मध्यप्रदेश के वन विभाग ने भी इस कार्य के लिए एसटीएसएफ की कार्यकुशलता को सराहा है और उन्हें सम्मानित किया है।
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FAQ
- इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का क्या मतलब होता है?
जब इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करता है, तो दुनिया के 195 सदस्य देशों की पुलिस को उस अपराधी को ढूंढने और गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। - मध्य प्रदेश STSF ने इस मामले में अब तक कुल कितनी गिरफ्तारियां की हैं?
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी मामले में अब तक कुल 06 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें भारत का बड़ा तस्कर तारकनाथ घोष भी शामिल है, जिसे कानपुर से पकड़ा गया। - तस्करी किए जा रहे घड़ियाल और कछुओं को कहां भेजा जा रहा था?
जांच में यह पाया गया कि इन दुर्लभ जीवों को पहले पश्चिम बंगाल ले जाया जाता था। वहां से इन्हें अवैध रूप से बांग्लादेश भेजा जाता था, और फिर म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के बाजारों में तस्करी की जाती थी।