MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सभी फाइनल रिजल्ट तलब

Neel Tiwari | Jul 29, 2026, 19:04 IST
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं की सुनवाई को व्यवस्थित करने के लिए बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने आयोग को सभी अंतिम परिणाम रजिस्ट्रार (IL) के सामने पेश करने के निर्देश दिए हैं।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला

  • MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर कई याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं।
  • अलग-अलग सालों की भर्ती में कई तरह के विवाद उठाए गए हैं।
  • जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को मिलने वाले लाभ भी विवाद का हिस्सा हैं।
  • हाईकोर्ट अब सभी मामलों की एक साथ सुनवाई करना चाहता है।
  • कोर्ट ने सभी अंतिम परिणाम मंगाकर मामलों का वर्गीकरण करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती विवाद में अहम कदम उठाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि अलग-अलग वर्षों की भर्ती के सभी अंतिम परिणाम पहले रजिस्ट्रार (IL) के सामने पेश किए जाएं। इसके बाद सभी मामलों को तय श्रेणियों में बांटकर एक साथ सुनवाई के लिए रखा जाएगा। इससे लंबे समय से चल रहे भर्ती विवादों की सुनवाई तेज होने की उम्मीद है।



कोर्ट ने MPPSC को क्या निर्देश दिए

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि MPPSC सभी चयन प्रक्रियाओं के अंतिम परिणाम रजिस्ट्रार (IL) विकास शर्मा के सामने पेश करेगा। जिन याचिकाकर्ताओं का चयन नहीं हुआ है, उनके मामलों को अलग श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों की सुनवाई अंतिम निस्तारण के लिए अलग से की जाएगी। कोर्ट का उद्देश्य समान मुद्दों वाले मामलों को एक साथ सुनना है ताकि फैसले में एकरूपता बनी रहे।



पांच श्रेणियों में बांटे जाएंगे सभी मामले

हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2026 के पहले के आदेश का पालन करने को भी कहा। इसके अनुसार सभी लंबित याचिकाओं को पांच हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें जनभागीदारी, एलाइड सब्जेक्ट, योग्यता, अर्हकारी परीक्षा में शामिल होना और आयु सीमा में छूट शामिल हैं। इन सभी श्रेणियों के आधार पर आगे सुनवाई होगी। इससे हर विवाद पर अलग-अलग लेकिन व्यवस्थित तरीके से विचार किया जा सकेगा।



जनभागीदारी अतिथि विद्वानों का विवाद क्यों अहम है

इस भर्ती विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा जनभागीदारी अतिथि विद्वानों से जुड़ा है। मौजूदा नियमों के अनुसार 25 प्रतिशत आरक्षण और 10 साल की आयु छूट केवल उन्हीं अतिथि विद्वानों को मिलती है जो स्वीकृत पदों के विरुद्ध काम कर रहे हैं। जनभागीदारी अतिथि विद्वानों का कहना है कि उनका काम, योग्यता और जिम्मेदारियां दूसरे अतिथि विद्वानों जैसी ही हैं। फिर भी उन्हें यह लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसी मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।



याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केवल नियुक्ति की तकनीकी स्थिति के आधार पर लाभ देना उचित नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मनीष गुप्ता मामले और राज्य की नीतियों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि सभी अतिथि विद्वानों के लिए एक जैसी व्यवस्था और समान मानदेय होना चाहिए। इसी मुद्दे पर एक्टिंग चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच सुनवाई कर रही है।



लंबित याचिकाओं की प्लीडिंग भी होगी पूरी

हाईकोर्ट ने MPPSC के वकीलों को रजिस्ट्रार (IL) की पूरी मदद करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी पक्षों से कहा गया है कि वे अपनी लंबित प्लीडिंग पूरी करें। इसके बाद सभी मामलों को श्रेणीवार बंच बनाकर डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा जाएगा। इससे एक जैसे मुद्दों पर अलग-अलग आदेश आने की संभावना भी कम होगी।



दो याचिकाओं को लिया गया वापस

सुनवाई के दौरान WP-5489/2025 में याचिकाकर्ता निशा मालवीय को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई। वहीं WP-21262/2025 में याचिकाकर्ता सारंग भिमटे के संबंध में भी याचिका वापस लेने का आवेदन स्वीकार कर लिया गया। दोनों मामलों में केवल संबंधित याचिकाकर्ताओं के हिस्से की याचिका वापस मानी गई। बाकी याचिकाएं पहले की तरह सुनवाई में शामिल रहेंगी।



अब आगे क्या होगा

अब सबसे पहले MPPSC सभी अंतिम परिणाम रजिस्ट्रार (IL) के सामने पेश करेगा। इसके बाद सभी मामलों का वर्गीकरण पूरा होगा। फिर एक जैसे विवादों को एक साथ सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से लंबे समय से अटकी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़े मामलों के निपटारे की दिशा साफ होगी।



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