ओबीसी आरक्षण केस में 87-13 पर रोक के बाद भी क्यों आया असिस्टेंट टाउन प्लानर भर्ती का रिजल्ट, ये है वजह...
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (Madhya Pradesh Public Service Commission) ने मंगलवार, 27 अक्टूबर की रात को सहायक नगर नियोजक परीक्षा (असिस्टेंट टाउन प्लानर) 2026 की भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है। ओबीसी आरक्षण केस में फैसले के बाद किसी चयन एजेंसी का यह पहला रिजल्ट है। इसमें 40 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए पात्र घोषित किया गया है। इसमें कुल 39 पद निकले थे। अब सवाल उठ रहा है कि यह रिजल्ट कैसे जारी हुआ। क्या बाकी रिजल्ट भी जारी होंगे। क्योंकि रिजल्ट 87-13 फीसदी कैटेगरी के तहत ही जारी हुआ है।
पहले बताते हैं हाईकोर्ट का आदेश क्या है
द सूत्र ने 10 अक्टूबर को ही खुलासा किया था कि हाईकोर्ट के फैसले के बिंदु 221 के चलते रिजल्ट पर रोक लग गई है। हाईकोर्ट ने PSC, ESB और प्रदेश की सभी चयन एजेंसियों को साफ निर्देश दिए थे। अब सभी रिजल्ट इसी आदेश के तहत जारी होंगे। इसका मतलब है कि 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण के आधार पर 100 फीसदी पदों का रिजल्ट जारी किया जाएगा। अब 87-13 फीसदी फॉर्मूला नहीं रहा। इसके बाद सभी रिजल्ट होल्ड हो गए।
अब यह रिजल्ट फिर क्यों जारी हुआ
अब इस रिजल्ट के तथ्य बताते हैं। इस भर्ती परीक्षा में कुल पद 39 हैं। इन्हें 87-13 फीसदी कैटेगरी में बांटा गया है। इसमें 87 फीसदी मूल क्राइटेरिया में 34 पद रखे गए और 13 फीसदी प्रोविजनल क्राइटेरिया में 5 पद रखे गए। आयोग ने 87 फीसदी क्राइटेरिया में रखे गए 34 पदों के लिए 40 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया है।
अब रिजल्ट जारी करने की मुख्य वजह 13 फीसदी वाले क्राइटेरिया के 5 पद हैं। आयोग ने इन पदों पर OBC और अनारक्षित, दोनों कैटेगरी के उम्मीदवारों को मौका दिया था। लेकिन इंटरव्यू में कोई भी उम्मीदवार जरूरी कटऑफ हासिल नहीं कर सका। ऐसे में ये 5 पद खाली ही रहेंगे। प्रोविजनल लिस्ट में भी इन पदों के लिए कोई उम्मीदवार नहीं है। इसलिए आयोग इसे एक तरह से 100 फीसदी पर रिजल्ट जारी करने की स्थिति मान रहा है।
आयोग ने रिजल्ट में यह लिखा है...
आयोग के पहले जो रिजल्ट जारी होते थे उनमें लिखा होता था कि हाईकोर्ट में चल रहे ओबीसी आरक्षण केस याचिका 5901/2019 के अधीन यह रिजल्ट है। वहीं इस बार यह लाइन नहीं लिखी है। आयोग ने लिखा है कि प्रोविजनल भाग के लिए विज्ञापित पदों के विरुद्ध कोई भी अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं हुआ है।
आयोग ने यहां कर दी चूक
आयोग ने इसके बाद भी इसमें तकनीकी चूक कर दी है। कारण है कि हाईकोर्ट के फैसले के तहत अब प्रोविजनल पद जैसी कोई बात ही नहीं रही है। यानी यह पांच पद भी मूल रिजल्ट कैटेगरी में आने थे। साथ ही रिजल्ट 34 नहीं बल्कि 39 पदों के लिए आना था। वहीं जो शॉर्टलिस्ट 40 उम्मीदवार मेरिट से चुने गए हैं, उनके लिए 34 नहीं बल्कि कायदे से पूरे 39 पदों पर चुने जाने का विकल्प होना चाहिए था।
इस रिजल्ट से यह साफ है कि आयोग फाइनल रिजल्ट भी फिर केवल 34 पदों का ही निकालेगा। जबकि आयोग को हाईकोर्ट के फैसले के तहत पूरे 100 फीसदी पदों पर 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण देते हुए रिजल्ट जारी करना है।
यानी आयोग ने अभी अनारक्षित कैटेगरी में केवल 27 फीसदी पद ही रखे हैं, जो सभी आरक्षण कैटेगरी को हटाने के बाद 40 फीसदी होने चाहिए थे। इस रिजल्ट से अंतिम चयन सूची में अनारक्षित कैटेगरी को झटका लगेगा। वहीं चयन के लिए पद भी कम हो गए हैं। जो हाईकोर्ट के आदेश की एक तरह से अवमानना है।
मध्य प्रदेश में इस तरह से है आरक्षण
एमपी में एसटी को 20 फीसदी, एससी को 16 फीसदी, ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी और यदि ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण गिना जाए तो कुल आरक्षण 60 फीसदी होता है। यानी अनारक्षित कैटेगरी में 40 फीसदी पद आते हैं। वहीं यदि आयोग प्रोविजनल के आधार पर रिजल्ट जारी कर रहा है तो फिर इसमें ओबीसी आरक्षण को अभी भी 27 फीसदी माना जा रहा है। फिर कुल आरक्षण 73 फीसदी होता है और अनारक्षित के लिए 27 फीसदी पद बच रहे हैं, जो हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन होता है।
आयोग का क्या कहना है
वहीं आयोग के ओएसडी डॉ. रविंद्र पंचभाई ने कहा कि, क्योंकि प्रोविजनल में कोई उम्मीदवार ही नहीं था इसलिए रिजल्ट जारी किया है। बाकी जिसमें भी प्रोविजनल पद या उम्मीदवार नहीं हैं, उनके रिजल्ट जारी करने पर भी विचार चल रहा है।