MPPSC Prelims 2026: आज 1.35 लाख छात्र देंगे परीक्षा, पहली बार नेगेटिव मार्किंग का डर

Sanjay Dhiman | Apr 24, 2026, 23:07 IST
MPPSC Prelims 2026
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने इंदौर में एमपीपीएससी कमांड कंट्रोल रूम का शुभारंभ किया। इससे राज्य सेवा परीक्षा की निगरानी को सुदृढ़ किया जाएगा और कदाचरण की समस्याओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा।

MPPSC Prelims 2026: मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा और वन सेवा परीक्षा आज हो रही है। मध्य प्रदेश के सभी केंद्रों पर परीक्षा शुरू हो गई है। यह परीक्षा आज दो अलग-अलग पालियों में आयोजित होगी। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी।



सुबह के समय छात्र सामान्य अध्ययन का पेपर देंगे। दूसरी पाली दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक होगी। इस समय छात्र सामान्य अभिरुचि का पेपर हल करेंगे। पारदर्शिता के लिए आयोग ने बड़ा तकनीकी कदम उठाया है।



इंदौर में एक अत्याधुनिक कमांड कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहाँ से प्रदेश के 54 जिलों पर नजर रखी जाएगी। कुल 365 केंद्रों की लाइव निगरानी यहाँ से होगी। सीसीटीवी कैमरों का सीधा फीड कंट्रोल रूम तक पहुंचेगा। नकल रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए हैं।



नकल माफियाओं की खैर नहीं: थ्री लेयर सुरक्षा घेरा

अध्यक्ष राजेश लाल मेहरा ने इस कंट्रोल रूम का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने बताया कि आगामी राज्य सेवा परीक्षा 2026 से तकनीक का इस्तेमाल होने वाला है। इस बार आयोग ने त्रि-स्तरीय (Three-tier) सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई है। इसका मतलब है कि अब सुरक्षा के तीन बड़े लेयर होंगे जिन्हें पार करना किसी भी गड़बड़ी करने वाले के लिए नामुमकिन होगा।



इसमें सबसे पहले बॉयोमेट्रिक प्रमाणीकरण होगा, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति किसी और की जगह परीक्षा नहीं दे पाएगा। इसके बाद CCTV वेबकास्टिंग के जरिए हर क्लासरूम की लाइव फीड सीधे इंदौर मुख्यालय पहुंचेगी।



54 जिलों के केंद्रों पर होगी सीधी निगरानी

इस कंट्रोल रूम की सबसे बड़ी ताकत इसकी पहुंच है। प्रदेश के 54 जिला मुख्यालयों पर जितने भी परीक्षा केंद्र बनेंगे, वे सब इस नेटवर्क से जुड़े होंगे। अगर किसी भी सेंटर पर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है या कोई इमरजेंसी आती है, तो इंदौर से ही सीधे केंद्राध्यक्ष से बात की जा सकेगी।



इतना ही नहीं, महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की तलाशी के लिए अत्याधुनिक मेटल डिटेक्टर (HHMD) का इस्तेमाल होगा। आयोग का मकसद साफ है- मेहनती छात्र को उसका हक मिले और धांधली करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।



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