MPPSC की डेंटल सर्जन परीक्षा में आरक्षण का पेंच, हाईकोर्ट ने ओबीसी की दो पोस्ट की होल्ड

Sanjay Gupta | Feb 25, 2026, 21:30 IST
Photograph: (the sootr)
MPPSC डेंटल सर्जन परीक्षा में आरक्षण संबंधी विवाद पर हाईकोर्ट ने दो OBC सीटों को होल्ड कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने गलत आरक्षण की बात कही थी।

News in Short

  • MPPSC भर्ती में विवाद: डेंटल सर्जन के 385 पदों पर आरक्षण का पेंच फंस गया है।
  • हाईकोर्ट का सख्त आदेश: अदालत ने फिलहाल ओबीसी वर्ग की दो सीटें होल्ड कर दी हैं।
  • आरक्षण का गलत गणित: याचिका के अनुसार, EWS को गलत तरीके से 10% कोटा दिया गया।
  • सरकार से मांगा जवाब: हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन और आयोग को नोटिस जारी किया है।
  • अगली सुनवाई 15 अप्रैल: अब अदालत इस पूरे मामले पर 15 अप्रैल को फैसला लेगी।

News in Detail

INDORE. मप्र लोक सेवा आयोग की डेंटल सर्जन भर्ती परीक्षा में आरक्षण का पेंच फंस गया है। दो याचिकाकर्ताओं ने इसमें गलत आरक्षण होने की बात कहते हुए याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने मप्र शासन और आयोग से जवाब मांगा है।



मप्र लोक सेवा आयोग ने दिसंबर 2024 में 385 पदों पर डेंटल सर्जन के पदों का विज्ञापन जारी किया था। इसे लेकर याचिकाकर्ता डॉ. शिवानी सोनी और डॉ. राम पटेल ने अधिवक्ता जयेश गुरनानी के जरिए याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि आयोग द्वारा जो आरक्षण किया गया वह गलत है।



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याचिका में यह आधार लिया गया

अधिवक्ता गुरनानी ने तर्क रखे कि EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण कुल विज्ञापित पदों में से नहीं दे सकते हैं। यह अनारक्षित वर्ग के लिए रखे गए पदों में से दिया जाना चाहिए था। इसके चलते अन्य वर्ग में भी सीट गलत आरक्षित की गई। इन तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आयोग व शासन से जवाब मांगा है। साथ ही अंतरिम आदेश देते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं के लिए ओबीसी कैटेगरी की दो सीट होल्ड करते हुए इन्हें रिक्त रखने के आदेश दिए हैं।



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यह पद थे आरक्षित, इस तरह बताया था गलत

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि आयोग द्वारा 385 पदों का विज्ञापन था। इसमें अनारक्षित के लिए 99, एससी के लिए 58, एसटी के लिए 98, ओबीसी के लिए 92 और ईडब्ल्यूएस के लिए 38 पद रखे गए थे। लेकिन आरक्षण का गणित गलत था, क्योंकि कुल ईडब्ल्यूएस के लिए दस फीसदी पद अनारक्षित से रखे जाने थे ना कि कुल पदों में से।



आरक्षण के हिसाब से अनारक्षित कैटेगरी में 128 पद, एससी में 62, एसटी में 77, ओबीसी में 104 और ईडब्ल्यूएस में केवल 14 पद ही होने थे। इन सभी तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिए। अब अगली 15 अप्रैल को रखी गई है।



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