MPPSC की परीक्षाओं में लगातार घट रहे पद, युवाओं के सामने चुनौती भरमार
समझें क्या है पूरा मामला..
- एमपीपीएससी की प्रमुख भर्तियों में पदों की संख्या लगातार घट रही है।
- एडीपीओ भर्ती में सिर्फ 17 पदों के लिए 20 हजार आवेदन पहुंचे।
- राज्य सेवा परीक्षा में भी पद 229 से घटकर 156 तक पहुंच गए हैं।
- ओबीसी आरक्षण विवाद और 13 फीसदी पद होल्ड होने से स्थिति और जटिल हुई है।
- पदोन्नति पर रोक और नए पद सृजित नहीं होने से भर्ती प्रभावित हो रही है।
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी है, लेकिन आयोग द्वारा जारी विज्ञापनों में पदों की संख्या में खासी कमी आई है। इसके चलते युवाओं में निराशा है। हाल ही में एडीपीओ की भर्ती में केवल 17 पद आए और इसके लिए आवेदन 20 हजार पहुंचे।
वहीं पीएससी ऑफिस के बाहर दिसंबर 2024 में चार दिन-रात का लंबा आंदोलन हुआ था। मुख्य वजह कम पदों की आ रही भर्ती थी। सारे दावों-वादों के बाद भी हालत खराब ही है।
पीएससी की सभी बड़ी परीक्षाओं में पदों की किल्लत है। हालत यह हो गई है कि जिस राज्य सेवा परीक्षा के लिए तीन लाख से अधिक युवा आवेदन करते थे। वह अब घटकर सवा लाख के करीब रह गई है।
कम पदों के साथ ही एमपी में साल 2019 से चल रहा 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण विवाद से निराशा बढ़ गई है। साथ ही होल्ड हो रहे 13 फीसदी पद ने भी निराशा को और बढ़ा दिया है।
राज्य सेवा परीक्षा के हाल
मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे पदों के लिए राज्य सेवा परीक्षा है। इसमें साल 2024 में 110 पद 2025 में 158 पद और साल 2026 में 156 पद ही हैं। इसके पहले 2023 में 229 पद थे।
राज्य वन सेवा
राज्य सेवा के बाद यह दूसरी अहम परीक्षा मानी जाती है। इसमें भी हाल देखिए। केवल 30 पदों के लिए राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 प्री हुई है। इसमें भी अनारक्षित का पद नहीं है। इसके पहले तो एक साल परीक्षा ही नहीं हुई क्योंकि पद नहीं थे।
स्टेट इंजीनियरिंग परीक्षा
यह भी आयोग की अहम परीक्षा है। इसमें इस साल सिर्फ 32 पद दिए गए हैं। इसके पहले स्टेट इंजीनियरिंग में केवल 23 पद आए थे। वहीं उम्मीदवार इसमें औसतन 300 पदों की उम्मीद रखते हैं।
एडीपीओ के हाल और भी बुरे
वहीं एडीपीओ के हाल तो और भी बुरे हैं। केवल 17 पद ही इस बार विज्ञापित हुए। इसके लिए 20 हजार आवेदन आए। इसके पहले 92 पद आए थे। उसके पूर्व जरूर ढाई सौ के करीब पद थे।
यह परीक्षा 12 साल में तीसरी बार हो रही है। जबकि मोहन सरकार एक साल पहले ही सौ से ज्यादा पद मंजूर कर चुकी है। ऐसे में सवाल यही है कि वे विज्ञापित क्यों नहीं हुए।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार में भी निराशा
वहीं यूनिवर्सिटी के लिए असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद का भी उम्मीदवार इंतजार करते हैं। इसके लिए केवल 12 पद ही जारी हुए हैं। इसके पहले 29 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। जबकि अभी कई नई यूनिवर्सिटी खुली हैं।
फूड सेफ्टी ऑफिसर
फूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर तो भर्ती 17 साल बाद आई थी। इसमें करीब सवा सौ पदों के लिए भर्ती हो रही है, लेकिन जानकारों के अनुसार यह भी वन टाइम ही है।
यह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण हो रही है। इस बार भर्ती होने के बाद यह कब आएगी, किसी को नहीं पता। आगे कुछ सालों तक तो बिल्कुल उम्मीद नहीं है।
केवल असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिकल ऑफिसर में अधिक पद
हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर में ही लगातार भर्ती हो रही है और अधिक पद आ रहे हैं। वे अधिक पद भी इसलिए दिखते हैं क्योंकि इसमें विषय अधिक होते हैं।
कई विषयों में तो पद कम होते हैं। साल 2024 में 1918 पद, साल 2025 में 1239 पद आए हैं। इसके पहले 2022 की भर्ती में अच्छे पद थे।
हाल ही में आयोग ने सबसे बड़ी भर्ती मेडिकल ऑफिसर पद पर की है। इसमें 1800 से ज्यादा पदों पर भर्ती हुई।
पदोन्नति नहीं होना एक बड़ी वजह
जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी वजह पदोन्नति पर रोक है। इसका समाधान तो आज तक मध्यप्रदेश शासन नहीं निकाल सका है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में केस हैं, लेकिन निराकरण अभी तक नहीं आया है।
इसके चलते उच्च स्तर पर पदोन्नति नहीं हो रही है। शासन ने कार्यवाहक उच्च पद दिया है, लेकिन इसका भी लंबा समय हो गया है। एक बार कार्यवाहक उच्च प्रभार देने के बाद दूसरा उच्च कार्यवाहक प्रभार नहीं दिया जा सकता है।
ऐसे में कार्यवाहक पदोन्नति लेने के बाद भी वे आगे रुक गए हैं। पदोन्नति विवाद के चलते हजारों शासकीय कर्मचारी इसके इंतजार में ही रिटायर हो गए हैं।
वहीं नीचे से भर्ती इसी के चलते बंद होती जा रही है। कई पद अब वित्त विभाग से मंजूरी नहीं मिलने के कारण शासन स्तर पर लैप्स हो रहे हैं। ऐसे करीब एक लाख पदों पर सरकार भर्ती बंद कर रही है। ऐसे में नए पद सृजित नहीं हो रहे हैं।
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