MPPSC को हाई कोर्ट ने दिखाया आईना, नौकरी देने वाली सरकार है, आयोग नहीं, फिर कैसे दायर की अपील?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि MPPSC केवल भर्ती एजेंसी है, जबकि पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार करती है। ऐसे में नियुक्ति से जुड़े आदेश को चुनौती देने का अधिकार आयोग के पास नहीं है। कोर्ट ने अपील को समय-सीमा के भीतर दायर नहीं किए जाने का आधार भी माना।
संध्या साहू ने LD की जगह MD श्रेणी चुन ली थी
पूरा मामला राज्य सेवा परीक्षा-2019 से जुड़ा है। संध्या साहू ने इस परीक्षा के लिए दिव्यांग श्रेणी के तहत आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने लोकोमोटर डिसेबिलिटी (LD) की जगह मल्टीपल डिसेबिलिटी (MD) श्रेणी चुन ली थी। जबकि उनके दिव्यांगता प्रमाण पत्र में 45 प्रतिशत अस्थि संबंधी दिव्यांगता दर्ज थी। प्रमाण पत्र के अनुसार, उनके दोनों हाथ प्रभावित थे। यह लोकोमोटर डिसेबिलिटी की श्रेणी में आती है, न कि मल्टीपल डिसेबिलिटी में।
आयोग ने प्रमाण पत्र मांगा, फिर उम्मीदवारी रद्द कर दी
दस्तावेजों की जांच के दौरान MPPSC ने इस विसंगति को पकड़ा। आयोग ने 9 नवंबर 2023 को संध्या साहू को पांच दिनों के भीतर MD श्रेणी का प्रमाण पत्र जमा करने के लिए कहा। साथ ही चेतावनी दी कि प्रमाण पत्र जमा नहीं करने पर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। इस पर संध्या साहू ने जवाब दिया कि वे MD श्रेणी की दिव्यांग नहीं हैं। ऑनलाइन कियोस्क संचालक से फॉर्म भरवाते समय गलती से LD की जगह MD विकल्प चुन लिया गया था। उन्होंने अपनी उम्मीदवारी LD श्रेणी में स्वीकार करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद आयोग ने 4 दिसंबर 2023 को उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी।
2024 में हाई कोर्ट ने गलती को मामूली माना
संध्या साहू ने आयोग के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। 24 सितंबर 2024 को जस्टिस विवेक जैन ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने माना कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें किसी उम्मीदवार ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर गलत श्रेणी का लाभ लेने की कोशिश की हो। संध्या साहू ने आयोग की आपत्ति सामने आते ही अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी उम्मीदवारी पर केवल LD श्रेणी में ही विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि उनके अंक LD श्रेणी की कटऑफ से अधिक हैं, तो आवेदन में हुई इस गलती से उनकी पात्रता पर कोई वास्तविक असर नहीं पड़ता।
नियुक्तियां हो चुकी थीं, तो संध्या को नौकरी का अधिकार नहीं
हाई कोर्ट ने उम्मीदवारी रद्द करने का आदेश निरस्त कर दिया था, लेकिन नियुक्ति को लेकर राहत सीमित रखी थी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सेवा परीक्षा-2019 का परिणाम घोषित हो चुका था। MPPSC ने चयन सूची जारी कर अपनी भूमिका पूरी कर दी थी। पदों पर नियुक्ति देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। शुरुआत में राज्य सरकार याचिका में पक्षकार नहीं थी। बाद में 6 अप्रैल 2024 को उसे पक्षकार बनाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि LD श्रेणी में नियुक्ति पत्र पहले ही जारी हो चुके हैं, तो संध्या साहू उन नियुक्तियों को चुनौती देकर नौकरी का अधिकार नहीं मांग सकतीं। लेकिन यदि नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए हैं, तो उस समय उपलब्ध खाली पदों पर उनकी उम्मीदवारी पर विचार किया जाना चाहिए।
अवमानना मामले में आयोग ने रखा पक्ष
हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर संध्या साहू ने अवमानना याचिका दायर की। इस मामले में MPPSC ने अनुपालन रिपोर्ट पेश की। आयोग ने 5 मई 2026 को संध्या साहू का अभ्यावेदन खारिज कर दिया। इसके बाद 13 मई 2026 को हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया। हालांकि, संध्या साहू को आयोग के इस नए आदेश को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी गई थी। बाद में 5 नवंबर 2026 की सुनवाई के दौरान संध्या साहू के वकील ने बताया कि उन्हें दूसरे विभाग में नियुक्ति मिल चुकी है। इसलिए अब वे आयोग के अस्वीकृति आदेश को चुनौती नहीं देना चाहतीं।
जब याचिकाकर्ता को शिकायत नहीं, तो अपील का आधार क्या?
सुनवाई के दौरान MPPSC के वकील ने तर्क दिया कि पुराने आदेश में दर्ज निष्कर्षों को गुण-दोष के आधार पर चुनौती दी जानी चाहिए। लेकिन संध्या साहू की ओर से बताया गया कि उन्हें दूसरे विभाग में नियुक्ति मिल चुकी है और अब इस मामले में आगे राहत की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि अब इस अपील को जारी रखने का कोई कारण नहीं बचा है। इसके अलावा आयोग के पास पुराने आदेश को चुनौती देने का अधिकार भी नहीं है, क्योंकि नियुक्तियां राज्य सरकार करती है और MPPSC केवल भर्ती एजेंसी है।
देरी से अपील करने पर भी आयोग को राहत नहीं
हाई कोर्ट ने एमपीपीएसी की अपील खारिज करने के पीछे एक और महत्वपूर्ण आधार बताया। कोर्ट ने कहा कि अपील निर्धारित समय-सीमा के भीतर दायर नहीं की गई थी। आयोग ने अवमानना याचिका का निराकरण होने के बाद अपील दाखिल की थी। देरी माफ करने के लिए जो कारण बताए गए, उनसे कोर्ट सहमत नहीं हुआ। डिवीजन बेंच ने कहा कि अपील पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही कानूनी मुद्दों के गुण-दोष पर विचार किए बिना रिट अपील क्रमांक 1534/2026 खारिज कर दी गई।
भर्ती आयोग और नियुक्तिकर्ता की भूमिकाएं अलग-अलग
इस मामले में हाई कोर्ट की टिप्पणी महत्वपूर्ण है। आयोग भर्ती प्रक्रिया आयोजित करता है और चयन सूची तैयार करता है, लेकिन चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। ऐसे में नियुक्ति से जुड़े विवाद में आयोग की भूमिका और उसके कानूनी अधिकारों को अलग-अलग देखा जाएगा। संध्या साहू के मामले में हाई कोर्ट ने इसी अंतर को स्पष्ट करते हुए MPPSC की अपील दायर करने के अधिकार पर सवाल उठाया।