MPPSC में NEYU आंदोलन पर हाईकोर्ट का आदेश, 60 दिन में पद बढ़ाने पर विचार करे सरकार

Sanjay Gupta | Apr 03, 2026, 11:43 IST
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने MPPSC 2026 भर्ती में पद बढ़ाने की मांग पर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार को 60 दिनों के भीतर पदों की संख्या में वृद्धि पर निर्णय लेने और स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने का निर्देश दिया है।

News In Short

  • MPPSC भर्ती में कम पदों को लेकर विवाद हुआ।
  • छात्रों ने NEYU के साथ आंदोलन किया था।
  • मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था।
  • कोर्ट ने सरकार को 60 दिन का समय दिया है।
  • सरकार को अब पद बढ़ाने पर फैसला लेना होगा।

News In Detail

इंदौर से उठा मामला अब पूरे प्रदेश में गूंज रहा है। MPPSC भर्ती को लेकर छात्र काफी समय से नाराज थे। उनकी मांग थी कि पद बढ़ाए जाएं।



MPPSC भर्ती में छात्रों का गुस्सा क्यों बढ़ा?

छात्रों का कहना है कि पद बहुत कम निकले हैं। राज्य सेवा परीक्षा 2026 में सिर्फ 155 पद हैं। इतने कम पदों से कई उम्मीदवार निराश हैं। इसी वजह से आंदोलन शुरू हुआ था।



हाईकोर्ट ने क्या बड़ा आदेश दिया?

हाईकोर्ट ने सरकार को साफ निर्देश दिया है कि वह मांगों पर 60 दिन में फैसला करे। साथ ही, स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर याचिकाकर्ता को बताए।



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आंदोलन कैसे शुरू हुआ था?

दिसंबर 2024 में भी आंदोलन हुआ था। चार दिन तक छात्र धरने पर बैठे थे। तब कुछ मांगें मानी गई थीं, लेकिन बाद में कोई काम नहीं हुआ। जनवरी 2026 में फिर आंदोलन की तैयारी हुई, लेकिन पुलिस ने मंजूरी देने से मना कर दिया था।



फिर कोर्ट से मिली आंदोलन की इजाजत

छात्रों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने आंदोलन की इजाजत दी थी। आंदोलन खत्म हुआ तो अधिकारी सामने नहीं आए। छात्रों ने ज्ञापन बाहर ही चिपका दिया थे।



अब याचिका में क्या हुआ?

एनईवाईयू (NEYU) द्वारा पीएससी से मांग की गई है कि राज्य सेवा परीक्षा 2026 व राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम पद हैं, इनमें बढ़ोतरी की जाए। साथ ही अन्य मांगें भी हैं। इन मांगों को लेकर हाईकोर्ट जस्टिस जय कुमार पिल्लाई ने एमपी सरकार को आदेश दिए हैं कि वह 60 दिन के भीतर इन मांगों पर विचार करे। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को एक स्पष्ट और स्पीकिंग ऑर्डर जारी करते हुए मांगों पर लिए गए फैसलों की जानकारी दे। एनईवाईयू की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने पक्ष रखा था।



इन्होंने लगाई थी याचिका

नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (एनईवाईयू) की राष्ट्रीय मुख्य समिति के सदस्य राधे जाट, रंजीत किसानवंशी, हेमराज गुर्जर, सचिन यादव, मोहित खेरा व धर्मवीर विश्नोई द्वारा यह याचिका दायर की गई थी।



पद कम आ रहे हैं, यह भी द सूत्र ने बताया था

इन मांगों को लेकर शासन पक्ष से कुछ नहीं हुआ। इसके बाद यह याचिका दायर हुई थी जिसमें अब यह आदेश हुए हैं। उधर आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2026 की प्री 26 अप्रैल को प्रस्तावित है। इससे एक महीने में रिजल्ट आ जाएगा। यानी पद बढ़ने हैं तो वह रिजल्ट आने के पहले, मिड मई से पहले बढ़ाने होंगे, नहीं तो इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। अभी राज्य सेवा परीक्षा 2026 में केवल 155 पद हैं। इस बार पद कम आने हैं, यह खबर भी द सूत्र ने ही सबसे पहले ब्रेक की थी।





यह हैं प्रमुख मांगें:

  • मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2026 में न्यूनतम 700 पदों पर भर्ती की जाए।
  • मध्यप्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा 2026 में कम से कम 100 पद सुनिश्चित किए जाएं (विशेष रूप से UR-OBC-EWS वर्ग के लिए रिक्त पद बढ़ाए जाएं)।
  • भर्ती में हो रहे घपले-घोटालों को रोकने के लिए राज्य स्तरीय सशक्त पेपर लीक कानून बने, जिसकी ड्राफ्टिंग में छात्र प्रतिनिधियों को भी रखा जाए।
  • मध्यप्रदेश राज्य अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2025 में न्यूनतम 400 पदों पर भर्ती की जाए।
  • ADPO भर्ती 2026 में कम से कम 300 पदों का विज्ञापन जारी किया जाए तथा अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दी जाए।
  • सहायक प्राध्यापक परीक्षा (NET/SET Qualified) अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में सम्मिलित करने की अनुमति दी जाए (जैसा कि राजस्थान राज्य में यह व्यवस्था पहले से लागू है)।
  • वन सेवा परीक्षा में कम से कम 87% उत्तर-कुंजी (कॉपी) अभ्यर्थियों को दिखाने की व्यवस्था लागू की जाए तथा 100% पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
  • अतिथि-संविदा प्रथा को समाप्त किया जाए तथा सहायक प्राध्यापक परीक्षा में अतिथि विद्वान आरक्षण व्यवस्था समाप्त कर, पूर्व की भांति 20 बोनस अंक पुनः लागू किए जाएं।
  • इंटरव्यू प्रणाली में सुधार करते हुए राज्य सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के अंक 100 निर्धारित किए जाएं।
  • सहायक संचालक उद्योग सहित सभी विभागों में पदों को अराजनीतिक एवं पारदर्शी बनाते हुए योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
  • परीक्षा प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए; MPPSC की सभी परीक्षाएं UPSC की तर्ज पर एक वर्ष की समयसीमा में पूर्ण हों। परीक्षा विधि घोषित होने के बाद उसमें परिवर्तन न किया जाए तथा गलत प्रश्नों की संख्या 1-2 से अधिक न हो।

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