MPPSC में पेपर सेटिंग पर सेमिनार, विशेषज्ञ बोले कंटेट पर रहे ध्यान, गलतियां नहीं हो
INDORE. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने आयोग की भर्ती परीक्षाओं में क्वेश्चन पेपर रचना व मूल्यांकन में गुणवत्ता उन्नयन विषय (Upgrade Subject) पर राष्ट्रीय सेमिनार व प्रशिक्षण शाला आयोजित की है।
इसमें देश भर से 200 से ज्यादा विशेषज्ञ आए हैं। उन्होंने कई अहम बातें रखीं। खासकर अब जबकि परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग शुरू हो गई है, तब क्वेश्चन पेपर में गलत सवाल नहीं आए यह काफी अहम हो गया है।
मुख्य वक्ता ने कंटेट और सावधानी की बात कही
उद्घाटन सत्र अभ्युदय के दौरान प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरुजी मुख्य अतिथि थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्वेश्चन पेपर में कंटेट अहम होते हैं। यह कंटेट अधिक से अधिक भारतीय संस्कृति से युक्त होना चाहिए। इससे युवा अधिक से अधिक इसे पढ़ेंगे और उनमें राष्ट्रीयता की भावना जगेगी।
साथ ही उन्होंने कहा गलत क्वेश्चन नहीं होना चाहिए, इसके लिए बहुत अधिक सावधानी की जरूरत है। क्वेश्चन पेपर बनाने के दौरान गैर जरूरी प्रश्नों से बचना चाहिए, ताकि मूल्यांकन के दौरान किसी तरह का असमंजस नहीं रहे। इसलिए इसे बनाने के लिए मॉडरेशन पर अधिक जोर होना चाहिए।
पीएससी अध्यक्ष मेहरा क्या बोले
सेमिनार में यह वक्ता भी बोले
उद्घाटन सत्र के दौरान मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई, सचिव राखी सहाय, ओएसडी डॉ. रविंद्र पंचभाई व अन्य उपस्थित थे।
आयोग के सदस्य डॉ. एनके कोष्ठी की अध्यक्षता में तकनीकी सत्र हुआ। इसमें भारतीय संस्कृति, राजनीतिक विज्ञान, इतिहास, जनजातीय संस्कृति, समाजशास्त्र आदि विषयों पर प्रश्नपत्र बनाने में कैसे गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है इस पर चर्चा हुई।
डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. पिकेंश लता रघुवंशी आदि की उपस्थिति में हुए सत्र में गणित, सामान्य विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, कम्प्यूटर साइंस, पर्यावरण, हेल्थ आदि विषयों की गुणवत्ता पर चर्चा हुई। डॉ. अमीय पहारे ने समसमायिक घटनाओं को लेकर बात रखी।
पीएससी ने रोकी हैं क्वेश्चन पेपर्स में गलतियां
साल 2023 की पीएससी प्री सभी को याद है, जिसमें विवादित प्रशन को लेकर भारी बवाल हुआ। एक बार तो रिजल्ट निरस्त की भी बात हो गई थी। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर 2022 की भर्ती हो अन्य परीक्षाएं हों, सभी के सवालों पर जमकर विवाद हुआ और कोर्ट केस हुए।
लेकिन हाल के समय में पीएसी ने बड़ा बदलाव किया है। मॉडरेशन सिस्टम अपनाने से गलत प्रश्न और विवाद समाप्ति की ओर है। पीएससी हर साल 25 से ज्यादा परीक्षाएं कराता है। इसमें 600 से ज्यादा पेपर सेट होते हैं। इन परीक्षाओं में साल भर में करीब 4 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं। ऐसे में हर प्रश्न काफी अहम होता है। इसलिए पीएससी पेपर सेटिंग की गुणवत्ता पर लगातार काम कर रहा है।
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