MPPSC की साइट पर आई मेंस 2025 के रिजल्ट की गलत जानकारी, मच गया हड़कंप; आयोग ने बताई वजह

Sanjay Gupta | Nov 04, 2026, 15:49 IST
MPPSC की वेबसाइट पर राज्य सेवा परीक्षा 2025 के रिजल्ट की गलत जानकारी फ्लैश होने से अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया।
MPPSC website mistakenly displayed the State Service Examination 2025 result update, creating confusion among candidates. Officials clarified that it was a technical error.
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की वेबसाइट पर बुधवार दोपहर राज्य सेवा परीक्षा 2025 के रिजल्ट की गलत जानकारी अपलोड होने से अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया। द सूत्र के पास लगातार मैसेज और फोन आने लगे। रिजल्ट की सच्चाई जानने के लिए द सूत्र ने आयोग के अधिकारियों से संपर्क किया। इस दौरान पता चला कि वेबसाइट पर तकनीकी चूक के कारण गलत जानकारी अपलोड हुई थी।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के रिजल्ट फिलहाल होल्ड पर हैं। हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले पर फैसला आने के बाद से रिजल्ट रुके हुए हैं। द सूत्र ने इस संबंध में पहले भी विस्तार से जानकारी दी है। लेकिन बुधवार को आयोग की वेबसाइट पर अचानक 'राज्य सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट' फ्लैश होने लगा। इस पर क्लिक करने से रिजल्ट वाले पेज पर ले जाया जा रहा था, लेकिन वहां कोई रिजल्ट नहीं खुल रहा था।



आयोग ने बताया, कैसे हुई गलती

इस संबंध में द सूत्र ने तत्काल आयोग के ओएसडी डॉ. रविंद्र पंचभाई से बात की। जानकारी मिलने पर वह भी चौंक गए। उन्होंने कहा कि अभी रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा है। इसके बाद द सूत्र ने उन्हें वेबसाइट का स्क्रीनशॉट भेजा। कुछ देर बाद पंचभाई ने बताया कि यह तकनीकी चूक है। वेबसाइट पर काम चल रहा है। इसी दौरान गलती से रिजल्ट संबंधी सूचना अपलोड हो गई।



द सूत्र की सूचना के बाद हटाई गई जानकारी

ओएसडी डॉ. पंचभाई ने बताया कि गलत जानकारी को वेबसाइट से हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके बाद आयोग की वेबसाइट से यह सूचना हटा दी गई।



क्यों रुके हैं रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन

हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण मामले में अपने फैसले में आरक्षण को 27 फीसदी करने वाले एक्ट को असंवैधानिक घोषित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी ही रहेगा। फैसले के बिंदु 221 में सबसे अहम बात कही गई है कि अब चयन एजेंसियों को इसी आधार पर सभी रिजल्ट जारी करने होंगे।



यानी एक तरह से 87-13 फीसदी का फॉर्मूला खारिज हो गया है। अब चयन एजेंसियों को ओबीसी के लिए 14 फीसदी आरक्षण के अनुसार 100 फीसदी रिजल्ट जारी करना होगा। इसी आदेश के बाद से रिजल्ट और नए भर्ती विज्ञापन होल्ड हो गए हैं।



अब सरकार के स्तर पर क्या चल रहा है

भोपाल स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार, विधि विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने फिलहाल पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दिया है। यानी जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तब तक सरकार इस मामले में कोई कदम नहीं उठाने वाली है।



जीएडी ने भी फिलहाल पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल (ESB) को आगे कोई निर्देश नहीं देने की नीति बनाई है। ऐसे में रिजल्ट और भर्ती विज्ञापन होल्ड ही रहेंगे।



ओबीसी की नाराजगी का सता रहा डर

सरकार ओबीसी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि वह 14 फीसदी ओबीसी आरक्षण के साथ 100 फीसदी रिजल्ट जारी करने से बच रही है। ऐसा करने पर इतने सालों से रुके 13 फीसदी होल्ड पद भी अनारक्षित वर्ग को देने होंगे।



सरकार को आशंका है कि इससे ओबीसी समाज में नाराजगी बढ़ सकती है, क्योंकि यह वर्ग इन पदों पर अपना अधिकार मानता है।



इसी तरह नए भर्ती विज्ञापनों में भी आरक्षण के अनुसार पदों का बंटवारा करना होता है। विज्ञापन में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। मौजूदा स्थिति में ओबीसी को 14 फीसदी ही आरक्षण देना होगा।



आगे रिक्त पदों के हिसाब से बड़ी संख्या में भर्तियां निकलनी हैं। ऐसे में सरकार भर्ती विज्ञापनों को लेकर भी ओबीसी वर्ग की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। इसी वजह से नए भर्ती विज्ञापन भी फिलहाल रोक दिए गए हैं।



सुप्रीम कोर्ट में सरकार क्या चाहती है

कुल मिलाकर सरकार की मंशा यही है कि किसी तरह हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल जाए। इसके बाद भले ही सुप्रीम कोर्ट में मामला चलता रहे।



इससे पहले जब ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने का मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, तब भी सरकार की मांग यही थी कि पहले से निकली भर्तियों में 27 फीसदी आरक्षण के आधार पर रिजल्ट जारी करने और पद भरने की अनुमति दी जाए।



सरकार ने छत्तीसगढ़ की तरह राहत मांगी थी, लेकिन उसकी यह मांग स्वीकार नहीं हुई थी। अब भी सरकार की पहली प्राथमिकता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगवाना है, ताकि भर्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके और मामला सुप्रीम कोर्ट में चलता रहे।



स्टे मिलने से क्या होगा, फिर सक्रिय होगा 87-13 फॉर्मूला?

हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे मिलने से सरकार को तत्काल राहत मिल सकती है। इससे 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण वाले एक्ट के दोबारा प्रभावी होने का रास्ता खुल जाएगा।



ऐसी स्थिति में 87-13 फीसदी फॉर्मूला भी फिर से सक्रिय हो सकता है। इसके बाद सरकार सभी चयन एजेंसियों को इसी फॉर्मूले के आधार पर रिजल्ट जारी करने के निर्देश दे सकती है। साथ ही नए भर्ती विज्ञापन भी इसी व्यवस्था के तहत जारी होने शुरू हो सकते हैं।



90 दिन में करना है हाईकोर्ट के आदेश का पालन

हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर के आदेश में फैसले का पालन करने के लिए 90 दिन की समयसीमा दी है। आदेश के अनुसार, होल्ड किए गए 13 फीसदी पद अनारक्षित वर्ग को देने हैं।



इस मामले में सामान्य वर्ग की ओर से पीएससी, ईएसबी, जीएडी और मुख्य सचिव (CS) को लीगल नोटिस भी दिया जा चुका है। ऐसी स्थिति में आदेश का पालन नहीं होने पर सामान्य वर्ग अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है।



हालांकि, इससे कितनी राहत मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट के आगे हस्तक्षेप की संभावना सीमित हो सकती है।



वहीं, अवमानना की कार्यवाही होने पर सरकार यह तर्क भी दे सकती है कि उसकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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