ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई झेल चुकी एलएन इंफ्रा को MPRDC ने दिया 11.90 करोड़ का ठेका
News in Short
- EOW में केस फिर भी LN इंफ्रा को MPRDC ने दिया ठेका।
- ग्रीनफील्ड एक्सेस कॉरीडोर के सुपरविजन के लिए मिला 11.90 करोड़ का काम।
- फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के जरिए ठेके लेने के आरोपों से घिरी रही है फर्म।
- MPRDC के लिए 358 किमी सड़क की DPR तैयार करेगी कंपनी।
- अधिकारियों के संपर्क के सहारे बड़े प्रोजेक्ट का काम किया हासिल।
News in Detail
मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा सड़क और पुल निर्माण में गड़बड़ी के आरोपों में घिरी कंपनी को ठेका दिया है। कंपनी के खिलाफ EOW में दर्ज केस को भी MPRDC द्वारा नजरअंदाज किया गया है। कंसल्टेंट फर्म LN मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल सड़क की जिम्मेदारी दी गई है। यह काम करीब 11.90 करोड़ रुपए का है।
कंसल्टेंट कंपनी पर पूर्व में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर हजारों करोड़ के ठेके लेने के आरोप भी लग चुके हैं। अब यही कंपनी जबलपुर-आशापुर मार्ग का 358 किमी ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के रूप में डेवलपमेंट करने DPR तैयार करेगी।
पुरानी गड़बड़ियों को किया अनदेखा
जबलपुर-आशापुर मार्ग को फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के तौर पर विकसित किया जाना है। इस प्रोजेक्ट की लंबाई 358 किमी है। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और सुपरविजन का काम LN मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ इनोवेटिव सीएडी सेंटर को दिया गया। काम के बदले में कंसल्टेंट फर्म को 6.34 करोड़ मिलेंगे। जबकि यह पूरा काम 11.90 करोड़ का है।
EOW ने फर्म पर दर्ज किया था केस
EOW ने 2024-25 में एलएन मालवीय इंफ्रा पर धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। फर्म द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर लोक निर्माण विभाग से ठेके लेने के आरोप लगे थे।
इसकी शिकायतें भी EOW और विभाग के अधिकारियों से की गई थीं। कंपनी को ठेके देने के मामले में विभाग के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ चुके हैं। मामले में PWD के एक रिटायर्ड प्रमुख अभियंता की भूमिका की भी जांच हो रही है।
फर्जी सर्टिफिकेट से हासिल किए टेंडर
एलएन इंफ्रा लोक निर्माण विभाग से पुल और सड़क निर्माण की कंसल्टेंसी हासिल करने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कर चुकी है। अस्पताल भवन के निर्माण का ठेका लेने के लिए कंपनी ने चिरायु अस्पताल के निर्माण का फर्जी सर्टिफिकेट लगाया था।
इस मामले में EOW द्वारा अस्पताल के मालिक अजय गोयनका से सवाल जवाब किए जा चुके हैं। जिसमें उनके फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिस अस्पताल के निर्माण की कंसल्टेंसी एनएन इंफ्रा ने अपनी बताई थी उसकी डिजाइन एक अन्य आर्किटेक्ट ने तैयार की थी।
MPRDC पहले भी दे चुकी है ठेके
MPRDC के अधिकारी पहले से ही एनएन इंफ्रा के संपर्क में रहे हैं। एक फ्लाय ओवर, रेलवे अंडरब्रिज और रेलवे ओवरब्रिज के अथॉरिटी इंजीनियर के तौर पर सुपरविजन के लिए 2024 में रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने टेंडर बुलाए थे।
यह काम अधिकारियों द्वारा LN मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को मेर्स्स हाईवे इंजीनियरिंग कंसल्टेंट के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था। इस काम के बदले में कंपनी को 12.10 करोड़ का भुगतान किया जाना था।
गलती छिपाने सफाई दे रहे अफसर
गड़बड़ी के आरोप और फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए ठेके हासिल करने वाली कंसल्टेंट कंपनी को MPRDC द्वारा ठेके देने का मामला चर्चा में है। अधिकारियों द्वारा कंपनी को उपकृत करने की शिकायतें भी विभाग तक पहुंची हैं। जिसके बाद अधिकारी सफाई देने में जुट गए हैं।
कॉर्पोरेशन के तकनीकी सलाहकार आरके मेहरा का कहना है टेंडर के आधार पर प्रोजेक्ट के लिए फर्म का चयन किया गया है। यदि किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई तय करेंगे।
FAQ
- LN मालवीय इंफ्रा पर क्या आरोप है ?
EOW ने 2024-25 में LN मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर सैकड़ों करोड़ के कंसल्टेंसी काम लिए। ग्वालियर में ऐसे पुल का सर्टिफिकेट लगाया जो बना ही नहीं। चिरायु अस्पताल का फर्जी सर्टिफिकेट भी लगाया।
ये भी पढ़ें...
फर्जी बीमा–रजिस्ट्रेशन केस में रोहित खटवानी की अग्रिम जमानत खारिज, अब EOW की कार्रवाई पर निगाहें
नगरपालिका टैक्स घोटाला: पतंजलि फूड्स टैक्स राहत मामले में हाईकोर्ट ने EOW से मांगा जवाब
इंदौर EOW ने नगर निगम के 2 करोड़ के डामर घोटाले की शुरू की जांच, चिंटू ने खोला 12 लाख का सड़क घोटाला
छिंदवाड़ा में EOW का छापा: रिटायर्ड अफसर के ठिकाने पर कार्रवाई