सीएम मोहन यादव ने 860 MSME को 225 और बड़े उद्योगों को दिए 1274 करोड़ रुपए
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल के रवींद्र भवन में एमएसएमई समिट आयोजित हुआ।
- 860 इकाइयों को 225.19 करोड़ रुपए प्रोत्साहन मिला।
- बड़े उद्योगों को 1274 करोड़ रुपए अलग मिले।
- प्रदेश में 25 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं।
- ये इकाइयां एक करोड़ से अधिक रोजगार देती हैं।
भोपाल में जुटे 2000 से ज्यादा उद्यमी
रवींद्र भवन में हुए इस समिट में प्रदेशभर से 2000 से अधिक उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि, बैंक और वित्तीय संस्थानों के अधिकारी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और महिला स्व-सहायता समूह शामिल हुए।
करीब 60 स्टॉल लगाए गए जहां सरकारी योजनाओं और नए उत्पादों की जानकारी दी गई। तीन अलग-अलग सत्रों में नए बाजार, फंडिंग और उत्पाद गुणवत्ता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
225 करोड़ एमएसएमई को
सीएम मोहन यादव ने 860 से अधिक एमएसएमई (MSME ) इकाइयों को 225.19 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की। इसके अलावा निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत बड़े उद्योगों को 1274 करोड़ रुपए की सहायता दी गई।
कई उद्यमियों को भूमि आवंटन पत्र और ऋण स्वीकृति पत्र भी सौंपे गए। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत स्टार्टअप हितग्राहियों को भी आर्थिक मदद मिली।
5 साल में टॉप-3 का लक्ष्य
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में तेजी से उद्योग लग रहे हैं और निवेश बढ़ रहा है। इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो अगले पांच साल में प्रदेश देश के तीन सबसे बड़े औद्योगिक राज्यों में शामिल होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ उद्योगों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और नए उद्यमी तैयार करना भी है।
1 करोड़ को रोजगार
प्रदेश में 25 लाख से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां सक्रिय हैं। इनसे एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सीएम ने कहा कि छोटे उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए सरकार उन्हें पूंजी, बाजार और नई तकनीक देने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है।
आधे से ज्यादा महिलाओं के नेतृत्व में
दिसंबर 2023 में प्रदेश में करीब 4800 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे। अब यह संख्या बढ़कर 7700 से ज्यादा हो गई है। इनमें खास बात यह है कि आधे से अधिक स्टार्टअप महिलाएं चला रही हैं। सीएम ने कहा कि सरकार महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहन दे रही है।
19 हजार को ZED प्रमाण पत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सिर्फ उद्योगों की गिनती नहीं बढ़ाना चाहती, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता भी सुधारना चाहती है। पिछले ढाई साल में करीब 19 हजार एमएसएमई इकाइयों को जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट (ZED – Zero Defect Zero Effect) प्रमाणन मिला है। इससे मध्यप्रदेश के उत्पाद देश और विदेश के बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
कपास पर मंडी शुल्क घटाया
सीएम ने कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को कम करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ज्यादा शुल्क की वजह से कपास का कारोबार दूसरे राज्यों में जा रहा था। शुल्क घटने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और कपड़ा उद्योग को भी फायदा होगा।
अभी प्रदेश में 150 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र हैं। 30 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। महिला कामगारों के लिए वर्किंग वूमेन हॉस्टल जैसी सुविधाएं भी बनाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए निवेश समझौते अब जमीन पर उतर रहे हैं। कनाडा, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और आयरलैंड की कंपनियां खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस, दवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। सीएम ने यह भी बताया कि 2027 में अगला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में होगा।
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