मुख्यमंत्री कन्या निकाह योजना में बहन की शादी, आतंकवाद के आरोपी को हाईकोर्ट से 4 घंटे की मोहलत
News in Short
- सलमान अंसारी को हाईकोर्ट से 4 घंटे की अंतरिम राहत।
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत बहन की शादी।
- पुलिस एस्कॉर्ट में भोपाल की ताजुल मस्जिद ले जाया जाएगा।
- पहले लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत अर्जी हो चुकी थी खारिज।
- आरोपी पर UAPA सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज।
News in detail
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आतंकवादी संगठन हिज्ब उत तहरीर (HuT) से जुड़े आरोपी सलमान अंसारी को मानवीय आधार पर राहत देते हुए अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए चार घंटे की विशेष अनुमति दी है।यह राहत 18 अप्रैल 2026 को सुनाए गए आदेश के तहत दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी को केवल सीमित समय के लिए ही बाहर लाया जाएगा।
लोकतंत्र को ध्वस्त करने की साजिश
आतंकवादी संगठन से जुड़कर लोकतंत्र को ध्वस्त करने की साजिश रचने वाले आरोपी को भी भारत में न्याय से वंचित नहीं रखा जाता। इसकी एक मिसाल जबलपुर हाईकोर्ट से सामने आई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिविजनल बेंच ने मानवीय आधार पर बड़ा फैसला सुनाया है।
भोपाल मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य को बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी गई है। हालांकि, यह राहत सीमित समय और सख्त पुलिस निगरानी के साथ दी गई है। बेल एप्लीकेशन में दी गई जानकारी के अनुसार आतंकी आरोपी की बहन की शादी भोपाल में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के अंतर्गत हो रही है।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना में बहन की शादी
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि सलमान अंसारी की बहन मुस्कान अंसारी की शादी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित हो रही है। यही आधार बनाकर आरोपी ने कोर्ट से अंतरिम जमानत की मांग की थी। मुस्कान अंसारी का निकाह 19 अप्रैल को भोपाल स्थित ताजुल मस्जिद में अरबाज अंसारी के साथ संपन्न होगा।
देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए सबक
देश के खिलाफ साज़िश रचने वाले गुमराह लोगों के लिए या मामला एक गहरा सबक है। एक ओर तो आतंकवाद के आरोपों से घिरे सलमान अंसारी की बहन के साथ सरकार ने भेदभाव ना करते हुए उसे सरकारी योजना का लाभ दिया। दूसरी ओर भारतीय कानून के अनुसार कोर्ट ने भी उसके साथ न्याय किया।
पुलिस निगरानी में ही होगा शामिल
जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिविजनल बेंच ने आदेश दिया कि आरोपी को 19 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजे पुलिस एस्कॉर्ट के साथ शादी स्थल ले जाया जाएगा। उसे शाम 6 बजे वापस पुलिस कस्टडी में लाया जाएगा। इस दौरान उसकी हर गतिविधि पर पुलिस की सख्त निगरानी रहेगी।
पहले खारिज हो चुकी थी जमानत अर्जी
गौरतलब है कि इससे पहले सलमान अंसारी की अंतरिम जमानत की अर्जी निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। विशेष न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता और UAPA के कड़े प्रावधानों को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में भी उसकी पिछली नियमित जमानत याचिका निरस्त हो चुकी थी।
सलमान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के गंभीर आरोप
सलमान अंसारी पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत तहरीर के भोपाल मॉड्यूल का सक्रिय सदस्य है। अभियोजन के अनुसार, वह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म कर शरिया कानून आधारित खिलाफत स्थापित करने की साजिश में शामिल था। साथ ही, युवाओं को भड़काने, प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने और संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप भी उस पर लगे हैं।
गतिविधियों और साजिशों का नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, सलमान अंसारी ‘दर्स’ कार्यक्रमों में शामिल होकर लोगों को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करता था। उसने भोपाल और रायसेन में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया, जहां हथियारों का अभ्यास और वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके अलावा, हैदराबाद में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में भी उसकी मौजूदगी सामने आई, जहां कथित रूप से जिहाद और आतंकी गतिविधियों की रणनीति बनाई गई।
सलमान अंसारी पर हुई कार्रवाई की टाइमलाइन
- 15 मई 2023: आरोपी के खिलाफ बयान दर्ज
- 16 मई 2023: जिहादी साहित्य की बरामदगी
- 30 मई 2024: IPC और UAPA की धाराओं में आरोप तय
- 27 जून 2024: NIA कोर्ट द्वारा पहली जमानत याचिका खारिज
- 11 मार्च 2026: हाईकोर्ट ने नियमित जमानत याचिका खारिज की
- 06 अप्रैल 2026: अंतरिम जमानत (शादी के लिए) लोअर कोर्ट से खारिज
- 18 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट से 4 घंटे की विशेष अनुमति मिली
यह मामला गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन उसके बाद भी यह सामने आ रहा है की जनकल्याण योजनाओं में सरकार ने उसके परिवार से भेदभाव नहीं किया। आरोपी के किए की सजा उसके परिवार को ना देते हुए उसकी बहन को भी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का लाभ मिला। वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीमित राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट का यह संतुलित फैसला न्यायिक विवेक और संवेदनशीलता दोनों को दर्शाता है, जिसमें आरोपी के अधिकार और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा गया है।
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