एमपी में मूंग खरीद विवाद: उग्र हुए किसान, बुधवार को सीएम हाउस का करेंगे घेराव!
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार की मूंग खरीद नीति से किसान नाराज हैं।
- सरकार सिर्फ 25 प्रतिशत मूंग ही खरीद रही है।
- इसके विरोध में किसानों ने सोमवार को भोपाल कूच शुरू किया।
- प्रशासन ने रास्ते में कई जगह बैरिकेड लगाए और किसान नेताओं को नजरबंद किया।
- किसानों ने बुधवार को सीएम निवास घेरने की योजना बनाई है।
क्यों भड़के किसान
दरअसल मध्यप्रदेश में मूंग (एमपी में मूंग खरीदी) उगाने वाले किसान लंबे समय से सरकारी खरीद को लेकर परेशान हैं। इस बार सरकार ने कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही खरीदने की नीति बनाई है।
बाकी फसल का क्या होगा, इसे लेकर किसानों में गुस्सा है। कई किसान संगठनों ने मिलकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
नाराज किसानों ने सोमवार, 27 जुलाई को भोपाल की ओर कूच करने का ऐलान किया। उन्हें रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया।
जगह-जगह सड़कें बंद कर दी गईं। कई किसान नेताओं को अस्थायी जेलों में नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई से किसान और भड़क उठे।
नर्मदापुरम से शुरू हुआ मार्च
बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े 13 संगठनों ने मिलकर यह आंदोलन खड़ा किया है। इनमें क्रांतिकारी किसान संगठन, भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ और किसान कांग्रेस शामिल हैं। अलग-अलग गांवों से निकलकर किसान सोमवार सुबह 11 बजे नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर जमा हुए थे।
यहां पहुंचने से पहले भी उन्हें रोकने की कोशिश हुई। हरदा और भैरुंदा जैसी जगहों पर किसान नेताओं को नजरबंद किया गया। इसके बावजूद किसान अलग-अलग रास्तों से निकलकर नर्मदापुरम पहुंच गए थे।
सेठानी घाट पर पहले नर्मदा पूजन हुआ। इसके बाद किसानों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और पैदल यात्रा शुरू कर दी।
बैरिकेड तोड़ आगे बढ़े किसान
बता दें कि प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए कई जगह मोर्चा संभाला। पहले झंडा चौक पर बैरिकेड लगाए गए। इसके बाद इंदिरा चौक और फिर भोपाल तिराहे पर भी रोक लगाई गई। हर जगह किसानों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई और किसान बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ते रहे।
कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसपी साईं कृष्णा एस थोटा खुद मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने किसानों को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।
पहली बैरिकेडिंग पार करने के बाद किसान नर्मदा ब्रिज के पास गांव डोगरवाड़ा तक पहुंच गए। यहां प्रशासन ने पहले से ही तीन स्तर की बैरिकेडिंग तैयार कर रखी थी। दर्जनों पुलिसकर्मी भी तैनात थे। यहां भी झड़प हुई और किसानों ने यह बैरिकेड भी तोड़ दिया।
बुधनी में पुलिस से झड़प
डोगरवाड़ा के बाद संभाग आयुक्त श्रीकांत बनोठ खुद किसानों से बातचीत करने पहुंचे। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकल सका। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसानों का जत्था आगे बढ़ता रहा। शाम करीब 7:15 बजे यह जत्था बुधनी पहुंच गया।
बुधनी में भी भारी पुलिस बल तैनात था। यहां किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच करीब 15 से 20 मिनट तक जमकर संघर्ष हुआ। आखिरकार किसानों ने बुधनी ओवरब्रिज पर लगा बैरिकेड भी हटा दिया। इसके बाद जत्था भोपाल की दिशा में आगे बढ़ गया।
मुख्यमंत्री निवास घेराव
जानकारी के अनुसार किसान संगठनों की योजना बुधवार सुबह भोपाल पहुंचने की है। वहां वे मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने वाले हैं। प्रशासन के लिए अगले दो दिन बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।
देखना होगा कि सरकार किसानों की मांग पर क्या रुख अपनाती है और आगे स्थिति कैसे बदलती है।
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