मुरैना में फर्जी दिव्यांग शिक्षकों का फिर मेडिकल टेस्ट, मुरैना डीईओ का एक्शन

Ratan Kumar Mishra | Aug 07, 2026, 23:01 IST
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मुरैना में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी कर रहे शिक्षकों का दोबारा मेडिकल टेस्ट होगा। डीईओ ने ब्लॉक अधिकारियों को सात दिन की मोहलत दी है।

मुरैना जिले में 450 दिव्यांग शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इनमें से 77 शिक्षक फर्जी पाए गए थे। अब वर्ष 2024 और उसके बाद चुने गए संदिग्ध शिक्षकों का दोबारा मेडिकल टेस्ट होगा। डीईओ ने सात दिन पहले सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से जानकारी मांगी थी। किसी ने जवाब नहीं दिया, इसलिए अब दोबारा सात दिन की चेतावनी दी गई है।



मुरैना जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों का मामला एक बार फिर सामने आया है। चार महीने पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से 46 शिक्षकों की शिकायत की गई थी। इन शिक्षकों को लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने मेडिकल टेस्ट के आदेश दिए थे। यह टेस्ट अभी मुरैना सिविल अस्पताल में चल रहा है।



ज्यादातर शिक्षक टेस्ट देने नहीं पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ एम्स भोपाल में भी आधा दर्जन शिक्षकों को दोबारा मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया था। इनमें से कोई भी वहां नहीं पहुंचा। इससे विभाग का शक और गहरा गया है।



शिक्षा विभाग का मानना है कि ज्यादातर दिव्यांग शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहे हैं। इसी वजह से जिला शिक्षा अधिकारी ने सात दिन पहले आदेश पत्र जारी किया था। इसमें जिले के सभी सात ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की कॉपी मांगी गई थी।



दोबारा दी गई सात दिन की मोहलत

ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों ने अब तक जानकारी नहीं भेजी। इस पर शुक्रवार को डीईओ ने दोबारा आदेश जारी किया। सभी अधिकारियों को सात दिन के अंदर जानकारी देने को कहा गया है। जो अधिकारी जानकारी नहीं भेजेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।



इस पत्र के बाद फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। कई शिक्षक यह सोचकर बैठे थे कि नौकरी मिलने के बाद वे सुरक्षित हो गए हैं। अब उन्हें डर है कि मेडिकल टेस्ट में पकड़े जाने पर नौकरी के साथ जेल भी हो सकती है।



2024 के बाद वालों पर होगी कार्रवाई

वर्ष 2024 और उसके बाद नियुक्त हुए दिव्यांग शिक्षकों पर विभाग की खास नजर है। विभाग का मानना है कि इनमें से ज्यादातर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर भर्ती हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत दिव्यांग शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे काम कर रहे हैं। इन सभी का दोबारा मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा।



ट्रांसफर के लिए भी हुआ फर्जीवाड़ा

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ शिक्षकों ने घर के पास पदस्थापना पाने के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाए। इसका मकसद सुविधाजनक जगह पर ट्रांसफर पाना था। यह जानकारी शिक्षा विभाग की जांच में सामने आई है।



किस कैटेगरी में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

दिव्यांगता की कुल 21 कैटेगरी होती हैं। इनमें से मुख्य रूप से तीन कैटेगरी के प्रमाण पत्र सबसे ज्यादा बनते हैं। ये हैं श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित और अस्थि बाधित। मुरैना जिले में बने कुल दिव्यांग प्रमाण पत्रों में से 95 प्रतिशत श्रवण बाधित और दृष्टि बाधित कैटेगरी के हैं।



इसी वजह से विभाग का शक इन शिक्षकों पर गया है। साथी शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भी विभाग को लिखित शिकायत दी है। इन शिकायतों में फर्जीवाड़े का जिक्र किया गया है।



ब्लॉक अधिकारियों की लापरवाही आई सामने

जिला शिक्षा अधिकारी ने 29 जुलाई को सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से जानकारी मांगी थी। उस समय सिर्फ दो दिन का समय दिया गया था। इसके बावजूद किसी भी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने जानकारी नहीं भेजी। इसी वजह से अब दोबारा सात दिन की मोहलत दी गई है।



अधिकारी ने क्या कहा

डीईओ भगवान सिंह इंदौलिया ने कहा कि मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाए जाने पर ज्यादातर शिक्षक नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि इससे साफ लगता है कि जिले में बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी हो रही है। उन्होंने बताया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को सात दिन का समय दिया गया है। जानकारी न देने पर सख्त कार्रवाई होगी। जानकारी मिलने के बाद सभी संदिग्ध शिक्षकों का मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा।



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