हाईकोर्ट का अहम फैसला: मुस्लिम शख्स की दूसरी शादी अपराध नहीं, मुस्लिम पति के खिलाफ नहीं चलेगा केस
News in short
- मुस्लिम महिला ने कराया था पति पर धोखाधड़ी और द्विविवाह का केस दर्ज।
- मुस्लिम कानून एक पुरुष को चार शादियां करने की अनुमति देता है।
- IPC की धारा 494 मुसलमानों पर नहीं लागू।
- पति के खिलाफ जारी किए गए पुलिस समन और कानूनी कार्यवाही को खत्म कर दिया।
- जब तक पर्सनल लॉ में बदलाव नहीं होता, तब तक अपराध नहीं।
News In Detail
एक मुस्लिम शख्स का दूसरी शादी करना 'द्विविवाह' (Bigamy) में अपराध नहीं माना जाएगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत यह जुर्म की श्रेणी में नहीं आता। इस फैसले के अनुसार भारतीय कानून के तहत आईपीसी की धारा 494 मुस्लिम पुरुषों पर नहीं लगाई जा सकती और इसने नई बहस को जन्म दे दिया।
क्या है पूरा मामला
यह मामला मध्य प्रदेश का है, जहां एक महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। महिला का आरोप था कि उसके पति ने उसे बिना बताए और बिना तलाक दिए दूसरी औरत से निकाह कर लिया है।
महिला ने इसे कानूनन अपराध बताते हुए पति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद निचली अदालत ने पति के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया था।
मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला
निचली अदालत के फैसले को पति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई।
पति के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वह मुस्लिम है और उसका धर्म उसे एक से ज्यादा शादियां करने का अधिकार देता है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 उन लोगों पर लागू होती है जिनके धर्म में दूसरी शादी करना गलत है, जैसे कि हिंदू या ईसाई धर्म।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बनाम आईपीसी
जस्टिस की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक पुरुष को चार शादियां करने की छूट मिली हुई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि मुस्लिम कानून में बहुविवाह (Polygamy) की अनुमति है, इसलिए दूसरी शादी करना आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।
दूसरी पत्नी पर भी नहीं चलेगा केस
महिला ने न सिर्फ अपने पति बल्कि उसकी दूसरी पत्नी और परिवार वालों पर भी केस दर्ज कराया था। हाईकोर्ट ने इस पर भी राहत देते हुए कहा कि जब मुख्य आरोपी (पति) ने ही कोई अपराध नहीं किया है, तो दूसरी पत्नी या परिवार वालों को इस मामले में घसीटना गलत है। कोर्ट ने सभी के खिलाफ चल रहे केस को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया।
इस फैसले का मतलब क्या है
कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत में शादी और तलाक जैसे मामलों में अभी भी 'पर्सनल लॉ' (धार्मिक कानून) की बड़ी भूमिका है। जब तक देश में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड' (UCC) जैसे कानून लागू नहीं होते, तब तक मुस्लिम पुरुषों द्वारा की गई दूसरी शादी को द्विविवाह के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
मोहन कैबिनेट ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा, SC छात्रों को मिलेंगे 10 हजार रुपए, FTRI को मंजूरी
अतिक्रमण अभियान के विरोध में उतरीं उमा भारती, खुद लगाया सड़क किनारे हाथठेला, बेचे पोहे-जलेबी
भोजशाला परिसर के बाहर हिंदू समाज का सत्याग्रह, प्रवीण तोगड़िया ने नमाज पर उठाए सवाल
मुरैना में अवैध भ्रूण परीक्षण का भंडाफोड़, छप्पर तोड़कर भागे आरोपी, पुलिस कर रही तलाश