आयुष्मान योजना पर NABH की सख्ती: एमपी के 65 अस्पतालों में नहीं मिलेगा आयुष्मान कार्ड का लाभ, इंदौर के 17 और जबलपुर के 7 अस्पताल

Sanjay Dhiman | Sootr Creatives | Oct 10, 2026, 19:31 IST
आयुष्मान कार्ड से इलाज से पहले देखें लिस्ट, इंदौर-जबलपुर के 24 अस्पताल योजना से बाहर
आयुष्मान भारत योजना के नियम न मानने पर मध्य प्रदेश के 65 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है। इनमें इंदौर के 17 और जबलपुर के सात निजी अस्पताल शामिल हैं। वजह एनएबीएच मान्यता के नियमों का पालन न होना है। आठ अक्टूबर को राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी ने फैसला लिया। अब इंदौर में 91 की जगह 74 अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज मिलेगा। इलाज से पहले पुष्टि कर लें।

आयुष्मान भारत योजना में बड़ी कार्रवाई हुई है। मध्य प्रदेश के 65 अस्पतालों पर गाज गिरी है। इनमें इंदौर के 17 और जबलपुर के सात निजी अस्पताल शामिल हैं। वजह एनएबीएच मान्यता के नियमों का पालन न करना रही।



अगर आप आयुष्मान कार्ड से इलाज कराते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। अस्पताल पहुंचकर खाली हाथ लौटना पड़े, इससे बुरा क्या होगा? नीचे पूरी सूची दी गई है।



समझें क्या है पूरा मामला

आयुष्मान योजना में एमपी के 65 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है। इनमें इंदौर के 17 और जबलपुर के सात निजी अस्पताल शामिल हैं। वजह है एनएबीएच (NABH – National Accreditation Board for Hospitals and Healthcare Providers) की मान्यता। आठ अक्टूबर को राज्य इम्पैनलमेंट (सूची तय करने वाली) कमेटी ने फैसला लिया। अब इंदौर में 91 की जगह 74 अस्पतालों में इलाज मिलेगा।




कब और किसने लिया यह फैसला?

यह फैसला आठ अक्टूबर को हुआ। बैठक दीनदयाल स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद की राज्य इम्पैनलमेंट कमेटी की थी। पूरे प्रदेश में 65 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई। इनमें से 24 अस्पताल अकेले इंदौर और जबलपुर के हैं।



भोपाल में आयुष्मान भारत निरामयम मध्य प्रदेश की उच्चस्तरीय बैठक भी हुई। इसके बाद निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच मान्यता के नियम मानना अनिवार्य बताया गया। यानी अब बिना मान्यता योजना में टिके रहना मुश्किल है।



और इसी सख्ती की गाज सीधे अस्पतालों पर गिरी।



एनएबीएच मान्यता क्या होती है?

एनएबीएच अस्पतालों की गुणवत्ता परखने वाला बोर्ड है। योजना में बने रहने के लिए अब इसकी मान्यता जरूरी है।



एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट क्या है?

एंट्री-लेवल यानी शुरुआती स्तर की मान्यता। नए नियमों के तहत अस्पतालों के लिए एनएबीएच एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है। यह नियम अब सब निजी अस्पतालों पर लागू है। मान्यता खत्म हुई तो योजना से नाता भी टूटेगा।




कहां चूक गए ये अस्पताल?

कुछ अस्पतालों के पास एंट्री-लेवल मान्यता थी, पर उसकी वैधता खत्म हो चुकी थी। कुछ अस्पतालों ने तो मान्यता ली ही नहीं थी। तो सवाल उठता है कि अब मरीज क्या करें?



इंदौर के अस्पताल: 91 से 74

इंदौर में पहले 91 अस्पताल आयुष्मान योजना में इलाज दे रहे थे। अब 17 अस्पताल सूची से बाहर हैं। यानी करीब हर पांचवां अस्पताल बाहर हो गया। शहर में 74 अस्पताल ही बचे हैं। इन्हीं में अब आयुष्मान कार्ड से इलाज मिल पाएगा।




इंदौर के किन 17 अस्पतालों पर गिरी गाज?

सूची से बाहर हुए अस्पतालों में चोइथराम नेत्रालय, पीएटी अस्पताल और लक्ष्मी मेमोरियल हैं। दृश्य अस्पताल, मेकरेटिना और गुरुजी सेवा न्यास के नाम भी हैं। एमएस एनर्जी, बांठिया अस्पताल और एमएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भी इसमें हैं।



वर्मा यूनियन हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड और खंडेलवाल अस्पताल को भी बाहर किया गया। मोहक हाईटेक स्पेशियलिटी, गीता भवन अस्पताल और सेवाकुंज भी सूची में हैं। मेडिस्टा, आर्थोस क्लिनिक और मेवाड़ा अस्पताल के नाम आखिर में आते हैं।



जबलपुर के अस्पताल भी लपेटे में

जबलपुर के अस्पताल भी इस कार्रवाई से अछूते नहीं रहे। यहां सात निजी अस्पताल योजना की सूची से बाहर किए गए हैं। एनएबीएच मान्यता के नियम यहां भी उतने ही सख्त रहे।



किन सात अस्पतालों के नाम आए?

नेशनल अस्पताल और पीजी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल इनमें शामिल हैं। मोहनलाल हरगोविंददास पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल का नाम भी है। समर्थ श्री मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल और सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भी बाहर हुए। गोलछा अस्पताल और जेके अस्पताल के नाम भी सूची में हैं।



मरीज इलाज से पहले क्या करें?

आयुष्मान योजना अस्पताल लिस्ट में यह बदलाव सीधे लाभार्थियों पर असर डालता है। कई परिवार पुराने भरोसे पर उसी अस्पताल पहुंच जाते हैं। पर सूची बदल चुकी है। आठ अक्टूबर के फैसले के बाद तस्वीर पहले जैसी नहीं रही।



सोचिए, रात में इमरजेंसी हो और अस्पताल कार्ड लेने से मना कर दे। तब कहां जाएंगे? इसलिए पुरानी जानकारी पर भरोसा न करें।




आयुष्मान कार्ड से इलाज, क्या जांचें?

सूची से हटे अस्पताल अब योजना के तहत इलाज नहीं देंगे। आयुष्मान योजना से बाहर अस्पताल में कार्ड की उम्मीद न रखें। इलाज से पहले अस्पताल में कार्ड की सुविधा की पुष्टि कर लें। मरीज और परिजन दोनों यह पूछताछ कर सकते हैं।



  1. आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के कितने अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है?
    आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के 65 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई है।
  2. एनएबीएच मान्यता क्या होती है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
    एनएबीएच मान्यता अस्पतालों की गुणवत्ता को परखने वाला एक बोर्ड है, और योजना में बने रहने के लिए इसकी मान्यता अब आवश्यक है।
  3. अगर मेरा अस्पताल आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करता, तो मुझे क्या करना चाहिए?
    आपको पहले अस्पताल में जाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आयुष्मान कार्ड स्वीकार कर रहे हैं, क्योंकि सूची में बदलाव के कारण कई अस्पताल अब योजना से बाहर हो चुके हैं।
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