भगवान नागचंद्रेश्वर के खुले पट, 24 घंटे होंगे दर्शन, फिर सालभर के लिए फिर बंद हो जाएंगे कपाट
उज्जैन में नागपंचमी का त्योहार इस बार खास संयोग लेकर आया है। आज सावन का तीसरा सोमवार है। इसी मौके पर उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट मध्यरात्रि 12 बजे खोले गए।
बता दें कि यह मंदिर साल भर में सिर्फ एक ही दिन खुलता है। इसी वजह से नागपंचमी पर देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इस बार दो त्योहारों का संयोग होने से भीड़ और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
साल में एक बार खुलता पट
पट खुलने से पहले रात 11:30 बजे प्रथम पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। मध्यरात्रि 12 बजे पट खुलने के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने पूजन-अभिषेक किया।
इस मौके पर महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। पहली पूजा पूरी होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कर दिए गए।
दर्शन का यह सिलसिला सोमवार मध्यरात्रि 12 बजे तक यानी पूरे 24 घंटे जारी रहेगा।
तीन बार होगी विशेष पूजा
नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की पुरानी परंपरा है। पहली पूजा रविवार मध्यरात्रि पट खुलने के तुरंत बाद संपन्न हुई।
दूसरी विशेष पूजा सोमवार दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से की जाएगी। तीसरी और आखिरी पूजा शाम को होगी।
भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी और पुरोहित नागचंद्रेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
दर्शन के लिए प्रवेश व्यवस्था
मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए हैं। सामान्य और शीघ्र दर्शन के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।
सामान्य दर्शन मार्ग
सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग से प्रवेश करेंगे। इसके बाद भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम और हरसिद्धि चौराहा होते हुए वे बड़ा गणेश पहुंचेंगे।
यहां से प्रवेश द्वार क्रमांक-4 से मंदिर परिसर में प्रवेश मिलेगा। विश्रामधाम होते हुए श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन करेंगे और प्रीपेड बूथ से बाहर निकलेंगे।
शीघ्र दर्शन मार्ग
शीघ्र दर्शन के लिए प्रवेश हरसिद्धि पाल की ओर से रखा गया है। श्रद्धालु बड़ा गणेश मार्ग से प्रवेश द्वार क्रमांक-5 से अंदर जाएंगे।
विश्रामधाम होते हुए दर्शन के बाद वे प्रीपेड बूथ से निकासी करेंगे। इसके बाद 24 खंबा रोड होते हुए वापस हरसिद्धि पाल पहुंचेंगे।
महाकालेश्वर भगवान के सामान्य दर्शन के लिए त्रिवेणी संग्रहालय स्थित द्वार से प्रवेश मिलेगा। शीघ्र दर्शन चाहने वालों के लिए नीलकंठ द्वार से प्रवेश तय किया गया है।
तीसरे तल पर नागचंद्रेश्वर
बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं। यहां की प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी फन फैलाए नाग पर बैठे नजर आते हैं।
प्रतिमा में शिवजी के गले और भुजाओं पर भी नाग लिपटे हुए हैं। नंदी और सिंह की प्रतिमाएं भी यहां स्थापित हैं।
यह दुर्लभ प्रतिमा नागपंचमी के मौके पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन जाती है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
महाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, बीच में ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर भगवान का मंदिर है।
मान्यता है कि परमार राजा भोज ने करीब 1050 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद 1732 में सिंधिया शासनकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
एक मान्यता यह भी है कि नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा नेपाल से लाकर यहां स्थापित की गई थी। यही वजह है कि यह मंदिर आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।
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