सीएम मोहन यादव का नर्मदा संरक्षण का बड़ा मास्टरप्लान: अमरकंटक को बनाया जाएगा 'नो कंस्ट्रक्शन जोन'
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी का उद्गम स्थल अमरकंटक अब एक नए स्वरूप में नजर आने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्र में कांक्रीट का जाल नहीं बिछाया जाएगा। सोमवार को पवित्र नगरी अमरकंटक पहुंचे मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और आस्था के संगम को बचाने के लिए कई फैसले लिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा। अमरकंटक को बचाने के लिए अब यहां 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' लागू होगा।
अमरकंटक अब 'नो कंस्ट्रक्शन जोन'
मुख्यमंत्री ने अमरकंटक में अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण पर रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमरकंटक में 'नो मूवमेंट' और 'नो कंस्ट्रक्शन' जोन तय किए जाएं। इसके अलावा, नर्मदा उद्गम स्थल और उसके आसपास के अवैध अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि नर्मदा की पवित्रता भी बनी रहेगी।
एक घंटे देर से शुरु हुआ आयोजन
मुख्यमंत्री अपने निर्धारित समय से लगभग घंटे भर की देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनका हेलिकॉप्टर मेला ग्राउंड स्थित हेलिपैड पर 2:42 बजे उतरा। फिर वे सीधे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। इस देरी के बावजूद मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित किया और संतों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने स्व. भगवत शरण माथुर की छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने उनके जीवन और योगदानों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन किया और मंच पर दीप प्रज्ज्वलन किया। संतों को तुलसी का पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया गया।
शराब और प्लास्टिक पर प्रतिबंध
अमरकंटक में शराब और प्लास्टिक के उपयोग पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है, इसकी पवित्रता को संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है।
प्राकृतिक वनों का संवर्धन
मुख्यमंत्री ने अमरकंटक में विदेशी प्रजातियों के पेड़ों को हटाने और स्थानीय प्रजातियों जैसे साल, महुआ, आंवला, चार और गुलबकावली का रोपण करने का भी निर्देश दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 2.50 लाख से अधिक स्थानीय पौधे उपलब्ध हैं, जो भूमिगत जल स्तर में सुधार लाएंगे।
स्व. भगवत शरण माथुर का योगदान
स्व. भगवत शरण माथुर ने 1975 से संघ प्रचारक के रूप में राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया था। उनके कार्यों और नेतृत्व को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके योगदान की सराहना की। उनके समाज सेवा के कार्यों और दूरदर्शी नेतृत्व को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने शाम को मां नर्मदा के उद्गम स्थल पहुंचकर विधिपूर्वक आरती की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
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