अजब एमपी का गजब पुल: 9 करोड़ रुपए की लागत से पुल तैयार, लेकिन पहुंचने वाली सड़क ही है गायब, जानिए क्या है मामला
यह पुल बने तीन साल हो गए और करीब एक किलोमीटर की एप्रोच रोड बनी ही नहीं। ऐसे में ग्रामीण आज भी कच्चे रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं। उधर, पुल निर्माण विभाग का कहना है कि सड़क कौन बनाएगा, यह सरकार तय करेगी। अब सवाल उठ रहा है कि जब पुल बनाया जा रहा था, तब उससे जुड़ने वाली सड़क की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई?
तीन साल में एक किलोमीटर सड़क भी नहीं बनी
हैरानी की बात यह है कि पुल बनने के तीन साल बाद भी एक किलोमीटर की एप्रोच रोड पूरी नहीं हुई है।इस मामले में निर्माण कार्य की योजना और विभागों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जब पुल तैयार किया जा रहा था, तब उसे मुख्य सड़क से जोड़ने की व्यवस्था क्यों पूरी नहीं की गई? सड़क बनाने में क्या परेशानी आ रही है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।
पुल तैयार होने के बावजूद उसके इस्तेमाल में परेशानी होना सरकारी निर्माण कार्यों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े करता है।
बारिश में कीचड़, फिर गड्ढों से परेशानी
एप्रोच रोड नहीं बनने से ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश के मौसम में पुल तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। ऐसे में लोगों के लिए वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है।
बारिश खत्म होने के बाद भी परेशानी दूर नहीं होती है। रास्ते में गड्ढे होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों को उम्मीद थी कि पुल बनने के बाद आने-जाने का रास्ता आसान हो जाएगा। लेकिन सड़क अधूरी रहने से उनकी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
40 से 50 गांवों के लिए जरूरी है पुल
दूधी नदी पर बना यह पुल नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिले के गांवों के लिए जरूरी है। इस पुल से आसपास के करीब 40 से 50 गांवों के लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सड़क और पुल दोनों का काम पूरा होने पर ग्रामीणों के लिए एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचना आसान हो सकता है।
किसानों को भी आवाजाही में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना आसान होने की उम्मीद है। लेकिन अभी एप्रोच रोड अधूरी होने से इन सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
योजना या मंजूरी, कहां अटकी सड़क?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल एप्रोच रोड के निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर है। पुल तैयार हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन सड़क का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है।
ऐसे में सवाल है कि क्या पुल के निर्माण के समय एप्रोच रोड की पूरी योजना बनाई गई थी? अगर योजना थी तो उसे अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया?
Road Construction Delay को लेकर विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत सामने आई है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या सड़क निर्माण में प्रशासनिक मंजूरी की परेशानी है या फिर विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है।
हालांकि, सड़क अधूरी रहने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
पुल निर्माण विभाग ने क्या कहा?
इस मामले में सेतु निर्माण विभाग के एसडीओ केशव रैदास का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि एप्रोच रोड के निर्माण से जुड़ी जानकारी शासन को भेज दी गई है।
अब शासन स्तर पर फैसला लिया जाएगा कि इस सड़क का निर्माण किस विभाग से कराया जाएगा। इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि जब पुल तीन साल से तैयार है, तो सड़क बनाने वाले विभाग का फैसला अब तक क्यों नहीं हो सका?
ग्रामीणों को कब मिलेगी सुविधा?
फिलहाल करीब 8.86 करोड़ रुपए का पुल तैयार खड़ा है। आसपास के ग्रामीण उससे जुड़ी सड़क पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग कब तय होगा। फैसला होने के बाद ही अधूरी सड़क पूरी होने की उम्मीद है।
फायदा तभी मिलेगा, जब पुल तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार होगा। दूधी नदी ब्रिज पर अब शासन के फैसले का इंतजार है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में बिना एप्रोच रोड वाला पुल कहां बना है?
यह पुल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी क्षेत्र में उमरोध गांव के पास दूधी नदी पर बना है। - दूधी नदी पर बने पुल की लागत कितनी है?
इस पुल के निर्माण पर करीब 8 करोड़ 86 लाख रुपए खर्च हुए हैं, और इसकी लंबाई 308 मीटर है। - ग्रामीणों को पुल बनने के बाद भी किस समस्या का सामना करना पड़ रहा है?
पुल बनने के बाद भी ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पुल के दोनों ओर करीब एक किलोमीटर की एप्रोच रोड का काम अधूरा है। - एप्रोच रोड के निर्माण को लेकर विभाग का क्या कहना है?
पुल निर्माण विभाग के एसडीओ केशव रैदास के अनुसार, सड़क निर्माण की जानकारी शासन को भेज दी गई है। अब शासन तय करेगा कि काम किस विभाग से कराया जाएगा।