मध्यावधि 2026: नर्मदापुरम संभाग में 11 में से 10 सीटों पर विधायकों से जनता नाराज
मध्यप्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... नर्मदापुरम संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।
हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल
- क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
- BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
- क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?
तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा
- उसके अपने जिले का मूड क्या है
- उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
- मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
- कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
नर्मदापुरम संभाग में कौन कितना मजबूत
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग में तीन जिले आते हैं, बैतूल, नर्मदापुरम और हरदा। कुल 11 विधानसभा सीटें हैं। 2023 के चुनाव में इनमें से 9 सीटें BJP के पास हैं और 2 सीटें कांग्रेस के पास, और दोनों कांग्रेस सीटें हरदा जिले में हैं।
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि संभाग में विधायक संतुष्टि का औसत 39%, सरकार संतुष्टि 37.5% और कांग्रेस सक्रियता 36.8% रही। तीनों आंकड़े 35 से 40 फीसदी के बीच सिमटे हैं। यानी यह संभाग पूरी तरह से राजनीतिक रूप से अनिर्णीत जमीन है। न BJP का दबदबा स्पष्ट है और न कांग्रेस की पकड़ मजबूत।
बैतूल: संभाग की इकलौती मजबूत सीट
बैतूल जिले में पांच विधानसभाएं हैं और सभी पर BJP काबिज है। जिले का विधायक संतुष्टि औसत 41.9% है जो मुख्यतः बैतूल शहर की वजह से ऊंचा है।
बैतूल शहर के विधायक हेमंत बिजय खंडेलवाल (BJP) 64.6% विधायक संतुष्टि के साथ पूरे संभाग में सबसे आगे हैं। यहां BJP सरकार की संतुष्टि भी 57.4% है, जो संभाग में एकमात्र सीट है जहां सरकार को बहुमत की स्वीकार्यता मिली है। कांग्रेस यहां 37.4% पर कमजोर है। सर्वे संकेत देता है कि खंडेलवाल ने जनसंपर्क और विकास कार्यों से भरोसा जीता है, लेकिन 36% असंतुष्ट मतदाताओं को नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।
मुलताई में BJP की स्थिति औसत से बेहतर है। विधायक चंद्रशेखर देशमुख 41.8% संतुष्टि के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यहां कांग्रेस की सक्रियता 34.9% के साथ संभाग के सबसे निचले स्तरों में से एक है, जो BJP के लिए राहत की बात है।
भैंसदेही: BJP के लिए सबसे बड़ा खतरा
भैंसदेही बैतूल जिले की सबसे नाजुक सीट है। विधायक महेंद्र केशरसिंह चौहान (BJP) की संतुष्टि महज 31.2% है। इसका मतलब है कि हर तीन में से दो से ज्यादा मतदाता उनसे नाराज हैं। यहां सरकार संतुष्टि 35.8% है जो विधायक संतुष्टि से साफ ज्यादा है। यह अंतर यह बताता है कि जनता का गुस्सा सरकार पर नहीं, सीधे विधायक पर है।
आमला और घोड़ाडोंगरी (ST यानी Scheduled Tribe आरक्षित सीट) में भी हालात चिंताजनक हैं। आमला में विधायक योगेश पंडाग्रे की संतुष्टि 37.4% है जबकि कांग्रेस सक्रियता 39.8% तक पहुंच गई है। घोड़ाडोंगरी में विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके की संतुष्टि 34.5% है, और सरकार (36.8%) उनसे ज्यादा स्वीकार्य है। यानी आदिवासी मतदाता विधायक की कार्यशैली से नाखुश हैं।
नर्मदापुरम जिला: चारों सीटें कमजोर
नर्मदापुरम जिले में चार विधानसभाएं हैं और सभी BJP के पास हैं, लेकिन यह जिला संभाग में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला है। यहां विधायक संतुष्टि का औसत केवल 36.5% और सरकार संतुष्टि 33.8% है, जो तीनों जिलों में सबसे कम है।
होशंगाबाद के विधायक सीतासरन शर्मा 43.1% संतुष्टि के साथ जिले में सबसे आगे हैं, लेकिन यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 36.5% है और कांग्रेस सक्रियता 39.8% तक पहुंची है। जिला मुख्यालय जैसे शहर में यह स्थिति सोचनीय है।
सिवनी-मालवा संभाग की सबसे जटिल सीट है। विधायक प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा (BJP) की संतुष्टि 31.7% है। सरकार संतुष्टि 34.2% है। और सबसे बड़ी चिंता यह है कि यहां कांग्रेस सक्रियता 42.9% है जो पूरे संभाग में सबसे ज्यादा है। BJP की अपनी सीट पर इतना बड़ा तबका विपक्ष को सक्रिय मानता है, यह सीधा अलार्म है।
पिपरिया (SC यानी Scheduled Caste आरक्षित) में तीनों आंकड़े संभाग के न्यूनतम स्तर पर हैं। विधायक संतुष्टि 33.3%, सरकार संतुष्टि 30.3% और कांग्रेस सक्रियता 30.9%। यहां जनता न सरकार से खुश है, न विधायक से और न विपक्ष को सक्रिय पाती है। यह राजनीतिक उदासीनता की सबसे गहरी तस्वीर है।
हरदा: कांग्रेस सीटों पर BJP की वापसी की उम्मीद
हरदा जिला संभाग का सबसे छोटा जिला है, लेकिन राजनीतिक रूप से सबसे दिलचस्प है। यहां दोनों सीटें कांग्रेस के पास हैं, फिर भी BJP सरकार की संतुष्टि (34.9%) कांग्रेस विधायकों की व्यक्तिगत संतुष्टि (34.7%) के लगभग बराबर है। यह BJP के लिए भविष्य में वापसी का रास्ता खोलता है।
टिमरनी में कांग्रेस विधायक कुंवर अभिजीत शाह की संतुष्टि 35.6% है। हरदा सीट पर विधायक रामकिशोर दोगने की संतुष्टि 33.7% है जो BJP सरकार की 36.9% संतुष्टि से कम है। यह एक कांग्रेस विधायक के लिए असामान्य स्थिति है और BJP के लिए 2028 में इस सीट को जीतने का ठोस आधार बन सकती है।
2028 के लिए क्या है संदेश
सर्वे का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि नर्मदापुरम संभाग 2028 के विधानसभा चुनाव में एक बड़ा swing zone यानी निर्णायक क्षेत्र बनने वाला है। अगले दो साल जो दल बेहतर जनसंपर्क, संगठन और विकास दिखाएगा, जीत उसी के पक्ष में जाने की संभावना है।
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