मॉब लिंचिंग केस में 14 को उम्रकैद, फैसले के बाद जज को जान से मारने की धमकी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मॉब लिंचिंग में सजा सुनाई, अब जज को मिल रही जान की धमकी।
- नर्मदापुरम: 14 को उम्रकैद, जज तबस्सुम को कत्ल की धमकी वायरल।
- वीडियो में बोला- 10 दिन में रिहा करो वरना कत्लेआम होगा।
- मुस्लिम जज ने फैसला सुनाया, सोशल मीडिया पर भड़की नफरत।
- सिवनी मालवा मॉब लिंचिंग: सजा के बाद अब जज की जान खतरे में।
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में साल 2022 के मॉब लिंचिंग मामले में 14 आरोपियों को 12 जून को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। फैसला एडीजे तबस्सुम खान की अदालत ने सुनाया।
इसके बाद सोशल मीडिया पर धमकी भरे वीडियो वायरल हुए जिनमें जज को जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने दो अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है और गृह मंत्रालय की साइबर सेल ने भी नोटिस भेजा है।
मूल मामला 3 अगस्त 2022 का है जब बराखड़ गांव के पास एक ट्रक रोककर उसमें सवार लोगों की पिटाई की गई थी और नाजिर अहमद की मौत हो गई थी।
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां एक अदालत ने मॉब लिंचिंग केस में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इसके बाद सोशल मीडिया पर फैसला सुनाने वाली जज को जान से मारने की धमकी दी गई। जज को धमकी देने वाले वीडियो तेजी से वायरल हुए इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। गृह मंत्रालय की साइबर सेल भी हरकत में आई।
क्या था 2022 का मामला?
3 अगस्त 2022 की रात एक ट्रक महाराष्ट्र के अमरावती की तरफ जा रहा था। ट्रक में करीब 30 मवेशी थे। सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास भीड़ ने ट्रक रुकवाया।
ट्रक में सवार तीन लोगों को घेरकर लाठी-डंडों से पीटा गया। हमले में ट्रक ड्राइवर शेख लाला समेत सभी घायल हुए। नाजिर अहमद की मौत हो गई।
शेख लाला ने बाद में बताया था कि सड़क पर 50 से 60 लोग खड़े थे। उन्होंने ट्रक रोका और बिना कुछ पूछे मारपीट शुरू कर दी। घटना का वीडियो भी सामने आया था जिसमें भीड़ हमला करती दिखी।
तीन साल बाद आया फैसला
करीब तीन साल की सुनवाई के बाद 12 जून को सिवनी मालवा की एडीजे (ADJ – Additional District Judge) तबस्सुम खान की अदालत ने फैसला सुनाया।
14 आरोपियों को दोषी पाया गया। उन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा और रास्ता रोकने समेत कई धाराओं में दोषी ठहराया गया। सभी को उम्रकैद की सजा मिली।
वायरल हुए धमकी भरे वीडियो
फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने लगे। एक वीडियो में एक युवक कहता है कि 10 दिन के भीतर हमारे हिंदू भाइयों को रिहा नहीं किया गया तो देश-प्रदेश में कत्लेआम होगा।
एक अन्य वीडियो में एक महिला जज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहती है कि उन्हें इसका दंड भोगना पड़ेगा। दोनों वीडियो में जज तबस्सुम खान को सीधे निशाना बनाया गया।
पुलिस और साइबर सेल सक्रिय
सिवनी मालवा पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज की। पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर ने बताया कि जज की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। लेकिन पुलिस ने खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय की साइबर सेल ने भी आईटी एक्ट (IT Act – Information Technology Act) के तहत नोटिस भेजा है।
कांग्रेस नेता ने भी दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस मामले पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोषी ठहराए गए लोगों को उनके धर्म की वजह से सजा नहीं मिली। उन्हें दंगा, हत्या के प्रयास और हत्या का दोषी पाया गया इसलिए सजा मिली। उन्होंने यह भी कहा कि नफरत फैलाने वाले खुलेआम घूम रहे हैं।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल
यह मामला एक बड़े सवाल की तरफ ध्यान खींचता है। क्या एक जज को सिर्फ इसलिए धमकाया जा सकता है क्योंकि उन्होंने कानून के मुताबिक फैसला सुनाया?
कानून की नजर में हर दोषी को सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का हो। और फैसला सुनाने वाले जज की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।
FAQ
- नर्मदापुरम मॉब लिंचिंग केस क्या था?
3 अगस्त 2022 को सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास एक ट्रक रोककर उसमें सवार लोगों की लाठी-डंडों से पिटाई की गई थी। हमले में नाजिर अहमद की मौत हो गई थी। तीन साल की सुनवाई के बाद 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली। - जज तबस्सुम खान को धमकी क्यों मिली?
जज तबस्सुम खान ने मॉब लिंचिंग केस में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद सोशल मीडिया पर धमकी भरे वीडियो वायरल हुए जिनमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। - इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
सिवनी मालवा पुलिस ने दो अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है। गृह मंत्रालय की साइबर सेल ने IT Act के तहत नोटिस भेजा है। जज की तरफ से औपचारिक शिकायत न मिलने के बावजूद पुलिस ने खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू की।
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