मरीजों की जान से खिलवाड़ : बिना डिग्री के सर्जरी! सरकारी अस्पतालों में इलाज का खतरनाक सच!

Sanjay Sharma | May 07, 2026, 23:17 IST
Photograph: (the sootr)
नर्मदापुरम के पिपरिया सिविल अस्पताल में OT अटेंडेंट ने डॉक्टर बनकर महिला की ब्रेस्ट सर्जरी कर दी। 8 दिन बाद पीड़िता ने BMO से शिकायत की। आरोपी सस्पेंड। रविवार को खुलासा हुआ।

News in Short :

  • सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी
  • मोटा वेतन लेकर 5-7 हजार में रखे निजी कर्मचारी
  • प्रबंधन की उदासीनता के चलते हो रहा खिलवाड़
  • अटेंडर कर रहे सर्जरी, पंक्चर वाला लगा रहा इंजेक्शन
  • एमपी की पीएचसी- सीएचसी में इलाज भगवानभरोसे

News in Detail :

मध्य प्रदेश की पीएचसी और सीएचसी पर सबसे ज्यादा मरीज निर्भर हैं। ग्रामीण अंचल की सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के नाम पर जोखिम में डाला जा रहा है। बीते महीनों में मरीजों की जान से खिलवाड़ के कई मामले सामने आए हैं। इनमें राजधानी भोपाल के बैरसिया, फंदा, बेरखेड़ी के अलावा नर्मदापुरम और विदिशा जिलों में अनाधिकृत कर्मचारी रखने की शिकायतें भी अधिकारियों तक पहुंची हैं।



ये अनाधिकृत लोग प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी, डिग्री-डिप्लोमा के बिना ही मरीजों को ड्रिप और इंजेक्शन लगाने से लेकर प्रसव जैसा जटिल काम करते रहे हैं। यही नहीं नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में तो सर्जन की गैरमौजूदगी में ओटी अटेंडर द्वारा महिला की सर्जरी करने का मामला भी सामने आया है।



सर्जरी के बाद हुआ खुलासा

पिपरिया सीएचसी में भर्ती महिला को सीने में गांठ होने की शिकायत थी। महिला सर्जन ने उसे ऑपरेशन की सलाह दी थी। महिला कुछ दिन बाद सरकारी अस्पताल पहुंची। वहां मौजूद युवक ने महिला और परिजनों से बात करने के बाद उसका ऑपरेशन कर दिया। तकलीफ बढ़ने पर जब वे डॉक्टर के पास पहुंचे तक उन्हें ओटी अटेंडर द्वारा सर्जरी करने का पता चला। जिसके बाद शिकायत बीएमओ से की गई। ओटी अटेंडर को निलंबत कर अस्पताल प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया है। अस्पताल में मरीज की जान से खुलेआम खिलवाड़ पर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।



डिसप्ले पर हो काम और पहचान

अस्पतालों में किस स्वास्थ्यकर्मी के पास क्या दायित्व हो इसका पता ही नहीं चलता। कर्मचारी कम होने का हवाला देकर किसी भी कर्मचारी को कोई भी जिम्मेदारी थमा दी जाती है। कभी वार्डबॉय को इंजेक्शन लगाने और दवा बांटने का काम दे दिया जाता है तो कभी स्वीपर ड्रिप लगाते मिल जाते हैं। लैब में ब्लड सैंपल लेने से लेकर उनकी टेस्टिंग भी ऐसे ही अप्रशिक्षित लोगों के हाथ में सौंप दी जाती है। मरीजों का मानना है अस्पतालों में कर्मचारी की ड्यूटी के साथ उसका नाम और जिम्मेदारी डिसप्ले होनी चाहिए। जिससे पता लगे किसके हाथ में क्या काम है।



ये मामले बढ़ा रहे चिंता

1. नर्मदापुरम के पिपरिया सिविल अस्पताल में OT अटेंडेंट ने डॉक्टर बनकर महिला की ब्रेस्ट सर्जरी कर दी। महिला की शिकायत के बाद इसका खुलासा हुआ। ओटी अटेंडर ने ऐसा करने में महिला की जान की भी परवाह नहीं की।


2. बैरसिया CHC में सरकारी कंपाउंडर रमेश 35 हजार वेतन ले रहा, पर ड्यूटी पर 10वीं पास सुनील मिला। सुनील को 6 हजार महीना देकर रखा गया। वह मरीजों को इंजेक्शन लगा रहा था। रमेश हफ्ते में एक बार साइन करने आता है।


3. भोपाल के फंदा PHC में बीते दिनों रात 8 बजे के बाद सरकारी नर्स और वार्ड बॉय गायब थे। उनकी जगह अस्पताल में 2 लड़के और 1 लड़की प्राइवेट काम करते मिले। पूजा नाम की लड़की बिना ट्रेनिंग प्रसूति कराती रही है।


4. भोपाल के बेरखेड़ी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन अजय को 42 हजार वेतन मिलता है, लेकिन उसकी जगह राजू नाम का युवक लैब संभालता है। अस्पताल के बाद राजू लैब अपनी खुद की पंचर की दुकान भी चलाता है।



जिम्मेदारों ने क्या कहा

1. नर्मदापुरम सीएमएचओ डॉ. नरसिंह का कहना है BMO से शिकायत की गई थी। जिसके बाद ओटी अटेंडर द्वारा अनाधिकृत रूप से सर्जरी की जांच कराई जा रही है। सर्जन की अनुपस्थित में ऐसो करने पर ओटी अटेंडर को निलंबित किया गया है।



2. भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है पीएचसी और सीएचसी की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई है। अनाधिकृत लोगों से काम कराने की शिकायत पर निर्देश दिए गए हैं। अब जो कर्मचारी मुख्यालय पर रहेंगे उन्हें ही वेतन का भुगतान होगा।



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