कुछ ने किया फर्जीवाड़ा, भुगतेंगे सभी अभ्यर्थी? NCL का भर्ती परीक्षा रद्द करने को हाईकोर्ट में चुनौती

Neel Tiwari | Nov 02, 2026, 21:33 IST
NCL की सहायक फोरमैन भर्ती रद्द, हाईकोर्ट में चुनौती
NCL Assistant Foreman recruitment cancelled, challenged in High Court
नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की सहायक फोरमैन भर्ती 2026 को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने परीक्षा के दो केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करते पाए जाने के बाद पूरी भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी। अब इस फैसले को उन अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है, जो परीक्षा में सफल होकर दस्तावेज सत्यापन की सूची में जगह बना चुके थे।

याचिका पर 2 नवंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगत की एकल पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने NCL प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।



270 पदों के लिए फरवरी में निकला था भर्ती विज्ञापन

दरअसल, NCL ने 9 फरवरी 2026 को सहायक फोरमैन (ट्रेनी) ग्रेड-सी के 270 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और ईएंडटी (E&T) के पद शामिल थे। इन पदों के लिए 26 अप्रैल 2026 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद 8 अगस्त 2026 को परिणाम घोषित किया गया। इसमें सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए चयनित किया गया था।



रिजल्ट आने के बाद सामने आईं गड़बड़ियों की शिकायतें

परिणाम जारी होने के बाद कुछ विसंगतियों को लेकर शिकायतें सामने आईं। NCL को इस संबंध में कई ई-मेल भी मिले थे। इसके बाद कंपनी ने 13 अगस्त 2026 को सूचना जारी कर दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी थी। साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू की गई। जांच में 26 अप्रैल को हुई CBT परीक्षा में कुछ अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई।



10 अक्टूबर को NCL ने रद्द कर दी पूरी परीक्षा

जांच के बाद NCL ने 10 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण सूचना जारी कर 26 अप्रैल को आयोजित पूरी CBT परीक्षा रद्द कर दी। कंपनी ने अपने आदेश में कहा कि निष्पक्षता, पारदर्शिता और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए यह निर्णय लिया गया है। साथ ही 8 अगस्त को घोषित परिणाम को भी अमान्य कर दिया गया। यानी पहले जारी रिजल्ट के आधार पर अब कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। कंपनी ने दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसकी तारीख और अन्य जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी करने की बात कही गई है।



दागी अभ्यर्थियों की पहचान का जिक्र

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात NCL का 10 अक्टूबर का आदेश है। कंपनी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि परीक्षा में अनुचित साधनों और गलत गतिविधियों में शामिल पाए गए अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान कर ली गई है, तो पूरी परीक्षा रद्द करने की जरूरत नहीं थी। ऐसे अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करके बाकी उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया जारी रखी जा सकती थी।



अभ्यर्थियों ने संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला

NCL के इस फैसले के खिलाफ विवेक कुमार तिवारी और अन्य छह अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता बिहार, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड और तेलंगाना के निवासी हैं। उन्होंने NCL के 10 अक्टूबर के आदेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी की सजा उन उम्मीदवारों को नहीं दी जा सकती, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी और मेरिट में जगह बनाई।



वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता काजल विश्वकर्मा ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने मेहनत से अच्छे अंक हासिल किए थे और उनका नाम दस्तावेज सत्यापन के लिए जारी सूची में शामिल था। इसके बावजूद कुछ परीक्षा केंद्रों पर हुई गड़बड़ियों के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सचिन कुमार और वंशिका यादव मामलों में स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जहां गड़बड़ी करने वाले और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान संभव हो, वहां दोनों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं है।



हाईकोर्ट ने NCL से मांगा जवाब

मामले को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस विशाल धगत की एकल पीठ ने एनसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। प्रेस नोट के अनुसार, कंपनी को दो सप्ताह के भीतर अंतरिम राहत के आवेदन और याचिका में उठाए गए सवालों पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अब 23 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में NCL का पक्ष सामने आएगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। ऐसे में 270 पदों की इस भर्ती में पहले चयनित हुए अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी या उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी, यह आगे की सुनवाई में स्पष्ट होगा।

Tags:
  • जस्टिस विशाल धगत
  • एमसीएल भर्ती
  • सहायक फोरमैन भर्ती
  • कोल इंडिया भर्ती
  • हाईकोर्ट में चुनौती
  • NCL recruitment 2026
  • NCL exam cancelled
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड