NCRB Report 2024: आदिवासियों के खिलाफ अपराध में एमपी देश में टॉप पर, देखें ताजा रिपोर्ट
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
- देश के कुल आदिवासी अपराधों का लगभग 32 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश में है।
- साल 2024 में राज्य में कुल 3 हजार 165 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
- आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में भी राज्य पहले नंबर पर है।
- साल 2023 के मुकाबले इन अपराधों में 11 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है।
NCRB Report 2024:
मध्यप्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ बढ़ते अपराध एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB के नए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश आदिवासियों पर अत्याचार के मामले में देश में नंबर एक है। देशभर में आदिवासियों के साथ होने वाली कुल हिंसा का 32 प्रतिशत हिस्सा यहीं से है।
राज्य में पिछले एक साल में इन अपराधों में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साल 2024 में आदिवासियों (MP tribal community) के खिलाफ कुल 3 हजार 165 मामले दर्ज किए गए हैं।
इंदौर और सिंगरौली जैसी जगहों से आई खबरें इस सच को बयां करती हैं। इंदौर में एक युवक को जूते के लेस बांधने पर मजबूर किया गया। वहीं सिंगरौली में अवैध खनन रोकने पर किसान को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया।
आदिवासी महिलाओं के खिलाफ बढ़ते क्राइम
महिला सुरक्षाको लेकर भी राज्य के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। मध्यप्रदेश लगातार दूसरे साल आदिवासी महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों में टॉप पर है।
साल 2024 में ऐसे 358 मामले दर्ज किए गए, जो देश का 28 प्रतिशत है। साल 2023 में भी यह संख्या लगभग इतनी ही यानी 357 थी।अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर भी भोली-भाली लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। मई 2024 में एक व्यक्ति ने आवाज बदलकर कई लड़कियों से दुष्कर्म किया।
वह स्कॉलरशिप का लालच देकर लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था। छोटी बच्चियों के खिलाफ POCSO के तहत दर्ज मामले भी 132 से बढ़कर 137 हो गए हैं।
एमपी की अपराध में अन्य राज्यों से तुलना
हत्या के मामलों की बात करें तो यहां 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साल 2023 में 47 हत्याएं हुई थीं जो 2024 में बढ़कर 62 हो गईं। राष्ट्रीय स्तर पर यह बढ़ोतरी केवल 13 प्रतिशत है जो राज्य से बहुत कम है। राजस्थान इस लिस्ट में दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर आता है।
किडनेपिंग और शादी के लिए मजबूर करने वाले मामलों में भी स्थिति खराब है। मध्यप्रदेश और गुजरात ने ऐसे 7-7 मामले दर्ज किए जो देश का बड़ा हिस्सा है। मणिपुर में जातीय हिंसा के समय जो आंकड़े थे, अब मध्य प्रदेश उसके करीब है। यह स्थिति राज्य प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
सरकार और पुलिस को इन आंकड़ों पर गंभीरता से विचार करना होगा। आदिवासियों के बीच सुरक्षा और न्याय का भरोसा जगाना अब सबसे पहली जरूरत है। केवल केस दर्ज करना काफी नहीं है बल्कि सजा दिलाना भी जरूरी है। जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की बहुत आवश्यकता है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए?
2024 में मध्यप्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ कुल 3,165 मामले दर्ज हुए, जो देशभर के कुल मामलों का 31.75% हैं। यह राज्य को देश में पहले स्थान पर रखता है। - आदिवासी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोई कमी आई है?
नहीं, आदिवासी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कोई कमी नहीं आई। 2024 में दुष्कर्म के 358 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से एक अधिक हैं। - आदिवासी हत्या के मामलों में मध्यप्रदेश की स्थिति क्या है?
मध्यप्रदेश में आदिवासी हत्याओं में 24% की वृद्धि हुई, 2023 में 47 हत्याओं के मुकाबले 2024 में यह संख्या 62 हो गई।
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