NCRB रिपोर्ट 2024: एमपी में हर 3 घंटे में एक रेप, आदिवासियों पर अपराध में देश में नंबर-1

Sanjay Dhiman | May 09, 2026, 16:56 IST
Photograph: (the sootr)
NCRB की 2024 रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की अपराधों की स्थिति चिंताजनक बताई है। रेप, अपहरण, दहेज हत्या और बच्चों के खिलाफ अपराध में राज्य की स्थिति बेहद खराब है। आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में एमपी देश में सबसे आगे है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने हाल ही में अपनी 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। प्रदेश में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध। रिपोर्ट के मुताबिक, हर तीन घंटे में एक रेप का मामला दर्ज हो रहा है। इसके अलावा, हर दिन औसतन 32 अपहरण की घटनाएं हो रही हैं।



आदिवासियों के खिलाफ अपराध: एमपी फिर बना नंबर-1

मध्य प्रदेश की सियासत में आदिवासियों का बड़ा रोल है। लेकिन NCRB की रिपोर्ट कहती है कि अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराध में एमपी पूरे देश में पहले नंबर पर है। राज्य में आदिवासियों के खिलाफ 3,165 मामले दर्ज हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि आदिवासी आज भी सुरक्षित नहीं हैं। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) के खिलाफ अपराध के मामले में भी प्रदेश दूसरे स्थान पर बना हुआ है।



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हर 3 घंटे में एक 'रेप': महिलाओं की सुरक्षा कहां है?

महिलाओं के सम्मान की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में हर 3 घंटे में एक बलात्कार का मामला दर्ज हो रहा है। सोचिए, जब आप एक फिल्म देख कर निकलते हैं, तब तक प्रदेश में कहीं न कहीं एक बेटी की अस्मत लूट चुकी होती है। महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 32,832 मामले दर्ज हुए हैं। राज्य महिला सुरक्षा के मामले में लगातार चौथे साल पांचवें स्थान पर रहा है।



बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध

बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन एमपी में वो भी सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले प्रदेश पहले से तीसरे स्थान पर आ गया है, लेकिन 21,908 मामले दर्ज होना कोई छोटी बात नहीं है। POCSO एक्ट के तहत 3,721 केस दर्ज किए गए हैं, जो प्रदेश को चौथे पायदान पर खड़ा करते हैं।



दहेज हत्या और किडनैपिंग का खौफ

प्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज हुए, जिसमें एमपी तीसरे नंबर पर रहा। वहीं, अपहरण (Kidnapping) के मामलों में भी प्रदेश चौथे स्थान पर है। हर दिन औसतन 32 लोगों का अपहरण हो रहा है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के बाद एमपी का नंबर आना वाकई चिंता का विषय है।



मर्डर के मामलों में मामूली गिरावट

एक अच्छी खबर यह है कि हत्या के मामलों में थोड़ी कमी आई है। 2022 में जहां 1,978 मर्डर हुए थे, वहीं 2024 में यह घटकर 1,813 रह गए हैं। लेकिन क्या 1,800 से ज्यादा मौतें एक साल में कम होती हैं? पुलिस प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वो अपराधियों के मन में कानून का खौफ कैसे पैदा करें।



निष्कर्ष:

NCRB की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि आम जनता का दर्द है। सत्ता में बैठे लोगों को अब इन आंकड़ों को गंभीरता से लेना होगा। क्या सिर्फ 'लाडली बहना' जैसी योजनाओं से काम चलेगा या बेटियों को सुरक्षित माहौल भी मिलेगा? यह सवाल आज हर प्रदेशवासी पूछ रहा है।



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