इंदौर पुलिस का फर्जी पट्टा कांड- केवल एक केस नहीं, मेडिकल और एक्स-रे बुलाइए सीपी साहब

Sanjay Gupta | Jul 29, 2026, 12:26 IST
इंदौर पुलिस का फर्जी पट्टा कांड, इंदौर पुलिस फर्जी पट्टा कांड
इंदौर की हीरानगर पुलिस का सामने आए फर्जी पट्टा कांड की जांच तेज हो गई है। सीपी संतोष सिंह इस घटना से नाराज हैं और कह रहे हैं कि इस तरह के कृत्य सहन नहीं होंगे। वहीं सीपी संतोष सिंह सभी मामले की मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे बुला लें तो कई पट्टा-कांड खुल जाएंगे।

इंदौर पुलिस की सिंघम बनने की कार्यशैली फिर कठघरे में आई है।इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंहकी सख्त शैली को अधीनस्थों ने ही धूमिल कर दिया है।



दरअसल यह मामला हीरानगर थाने का है। यहां पुलिस ने बीते रविवार को आरोपियों का जुलूस निकाला था। उनके हाथों में पट्टे बंधे थे। इसके बाद यह पट्टे जेल गेट के बाहर ही उतर गए।



सीपी ने बैठाई जांच, इनके हुए बयान

एडिशनल डीसीपी जोन 3 ओमप्रकाश को मामले की जांच सौंपी गई है। इसमें एसीपी रुबीना मिंजवानी और टीआई संतोष पटेल के बयान हो गए हैं। साथ ही एसआई दिनेश त्रिपाठी, सिपाही सौरभ, विश्व रत्न, अनिल जायसवाल व देवेंद्र यादव के बयान हो गए हैं।



पट्टा बांधने की सलाह किस डॉक्टर ने दी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पट्टा बांधने की सलाह किस डॉक्टर ने दी यह साफ नहीं है। बताया जा रहा है कि आरोपियों का उपचार पहले निजी अस्पताल में हुआ फिर एमवायएच अस्पताल में एमएलसी बनी। अब जांच अधिकारी डॉक्टर के भी बयान ले रहे हैं।



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इंदौर पुलिस ने आरोपियों को पट्टे लगाकर जुलूस निकाला, जेल के बाहर पट्टे उतारे



रोजनामचे में अलग बात लिखी

यह भी सामने आया है कि जिन आरोपियों के पट्टे उतारने की बात सामने आई है, उनके लिए पुलिस ने रोजनामचे में लिखा है कि पकड़ने के दौरान आरोपी भागे और गिरने से हाथ-पैर में चोट आई। वहीं टीआई का बयान था कि आरोपियों को पहले से ही चोट थी।



यह है पूरा मामला

हाल ही में हीरानगर थाना क्षेत्र में कार और बाइक की टक्कर के बाद विवाद हुआ था। इस मामले में चार लोगों पर केस दर्ज हुआ था। आरोपियों का रविवार को जुलूस निकाला गया।



इसमें मयंक और शोभित आरोपी के हाथों में पट्टे बंधे थे और वे लंगड़ाकर चल रहे थे। इसके बाद उन्हें जेल पहुंचाया गया। देर रात एक और वीडियो सामने आया। इसमें आरोपी जेल में प्रवेश करने से पहले अपने हाथों पर बंधे पट्टे उतारकर फेंकते दिखाई दे रहे थे।



ऑडियो में लेन-देन की भी बात

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो के साथ एक ऑडियो में भी लेन-देन की बात सामने आई है। इसमें कुछ लोग 20 हजार रुपए के लेन-देन का जिक्र कर रहे हैं।



सवाल उठ रहे हैं कि क्या रुपए लेकर नकली पट्टे बांधे गए थे। हालांकि,इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।



डीआईजी रहते एक्स-रे बुलाते थे संतोष सिंह

पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह साल 2015-16 के दौरान इंदौर में डीआईजी थे। यह जहां भी पदस्थ रहे हैं वहां आरोपियों के हाथ-पैर टूटने की घटनाएं सामने आती रही हैं और इसे जनता ने सराहा भी है कि बदमाशों के हाथ-पैर टूटने चाहिए।



डीआईजी रहते हुए सिंह के पास एक डॉक्टर सीनियर पुलिस अधिकारी भी थे, जो पूरी मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे बुलाकर देखते थे कि क्या चोट सही में लगी है और क्यों लगी है।



खुद संतोष सिंह भी इसकी तस्दीक करते थे लेकिन अब जांचना बंद हो गया है। इसी के चलते निचले थाना स्तर पर यह जमकर खेल हो रहा है और पट्टे के नाम पर फर्जी प्लास्टर चढ़ाया जा रहा है। इसके ऐवज में नई दुकान खुल गई है।



पट्टा बंधा तो कभी कोर्ट में क्यों नहीं आए आरोपी

जानकार सबसे बड़ा सवाल यह उठा रहे हैं कि, यह पट्टा और चोट सही है तो फिर यह आरोपी जब कोर्ट में आते हैं तो फिर पट्टा क्यों नजर नहीं आता है। वहीं पट्टा असली है तो फिर काटकर खुलेगा, यह कभी सामने क्यों नहीं आया कि जेल ने डॉक्टर को बुलाकर पट्टा कटवाया।



जेल सभी आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट लेता है। यदि पट्टे वाले सभी आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे को बुला लिया जाए तो सालों से चल रहे इस पट्टा कांड की कई पर्तें खुल जाएंगी। पुलिस की सिंघम छवि को निचले स्तर पर दागदार किया जा रहा है।



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