नीमच में फर्जी वारिस बनकर जमीन हड़पी, EOW ने दर्ज किया केस

Pawan Modiya | May 22, 2026, 22:29 IST
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नीमच के गांव बैसला में भगवान मीणा ने मृत व्यक्ति केदार का फर्जी वारिस बनकर करीब 2 हेक्टेयर जमीन हड़प ली। सरपंच, सचिव, पटवारी और तहसीलदार ने मिलकर फर्जी दस्तावेज बनाए। EOW भोपाल ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • नीमच जिले के गांव बैसला में भगवान मीणा ने मृत व्यक्ति केदार की जमीन हड़पने की साजिश रची।
  • खुद को केदार का बेटा बताने के लिए अपने पिता का नाम तक बदल दिया।
  • सरपंच, सचिव, पटवारी और तहसीलदार ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
  • करीब 2 हेक्टेयर कृषि भूमि पर धोखे से नामान्तरण करा लिया गया।
  • ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) भोपाल ने पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

एक मृत किसान की जमीन और एक बड़ी साजिश

मध्यप्रदेश के नीमच जिले के तहसील रामपुरा में एक गांव है, बैसला। यहां के मृत किसान केदार पिता धूरा के नाम करीब 2 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज थी। केदार के जाने के बाद यह जमीन उनके असली वारिसों को मिलनी चाहिए थी। लेकिन उसी गांव के एक शख्स ने इस जमीन पर नजर गड़ा ली। उसने एक ऐसी साजिश रची, जिसमें गांव के सरपंच से लेकर सरकारी तहसीलदार तक सब शामिल हो गए।



किसने बदला अपने पिता का नाम

आरोपी भगवान मीणा के पिता का असली नाम भेरूलाल मीणा है। लेकिन मृतक केदार की जमीन हड़पने के लिए भगवान को खुद को केदार का बेटा बताना था। इसके लिए उसने अपने पिता का नाम ही बदल दिया। कागजों में खुद को केदार का पुत्र और एकमात्र वारिस दिखाया। यह पूरे फर्जीवाड़े की नींव थी। इसके बाद एक-एक करके सभी जरूरी दस्तावेज जुटाने की कोशिश शुरू हुई।



सरपंच और सचिव ने बनाया झूठा प्रमाण पत्र

भगवान सबसे पहले ग्राम पंचायत बैसला पहुंचा। तत्कालीन सरपंच प्रेमलता अमर रावत और सचिव आनंद सक्सेना से उसने एक प्रमाण पत्र बनवाया। इस प्रमाण पत्र में लिखा गया कि भगवान, मृतक केदार का वैध पुत्र और एकमात्र वारिस है। यह प्रमाण पत्र पूरी तरह झूठा था। न कोई जांच हुई, न असली वारिसों को बताया गया।



पटवारी ने गढ़ी फर्जी वंशावली

फर्जी वारिसान प्रमाण पत्र मिलते ही भगवान ने तहसीलदार के यहां फौती नामान्तरण के लिए आवेदन दिया। नामान्तरण यानी मृत व्यक्ति के नाम की जमीन को वारिस के नाम करने की प्रक्रिया। इसके लिए तत्कालीन पटवारी अनुराग पाटीदार ने भी अपना काम किया। पाटीदार ने भगवान को केदार का वारिस बताते हुए फर्जी वंशावली, पंचनामा और प्रतिवेदन तैयार किया। ये सभी दस्तावेज नामान्तरण के मामले में पेश किए गए।



तहसीलदार ने बिना जांच के दे दिया आदेश

अब बारी थी तहसीलदार की। तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा बी.के. मकवाना के सामने सारे कागज रख दिए गए। नियम यह कहता है कि नामान्तरण से पहले मृत व्यक्ति के असली वारिसों की जांच होनी चाहिए। लेकिन मकवाना ने ऐसी कोई जांच नहीं की। उन्होंने उन्हीं फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर भगवान के पक्ष में फौती नामान्तरण का आदेश पारित कर दिया। इस तरह भू-राजस्व अभिलेख में भगवान का नाम दर्ज हो गया और असली वारिस ठगे गए।



EOW ने खोली साजिश की परतें

ईओडब्ल्यू मुख्यालय भोपाल में शिकायत क्रमांक 772/25 दर्ज हुई। जांच में पाया गया कि यह एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र था। जिसमें भगवान मीणा मुख्य आरोपी है और बाकी सरकारी कर्मचारी उसके सहयोगी। सभी आरोपियों ने मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली की तरह इस्तेमाल किया।



पांच आरोपियों के नाम मामले में शामिल हैं। भगवान मीणा पिता भेरूलाल मीणा, सरपंच प्रेमलता अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, पटवारी अनुराग पाटीदार और तहसीलदार बी.के. मकवाना।



किन धाराओं में मामला दर्ज

ईओडब्ल्यू ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धाराएं 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण (Prevention of Corruption) अधिनियम 1988 और उसके 2018 के संशोधन की धाराएं 7(ग) और 12 भी लगाई गई हैं। सरकारी कर्मचारियों पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप अलग से है। ईओडब्ल्यू ने कहा है कि मामले में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।



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