नीट पेपर लीक मामले में धीरेंद्र शास्त्री के बदले सुर, बोले- जो मुंह में आए कह देते हैं
खजुराहो के बागेश्वर धाम पीठाधीस धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री साधना से बाहर आए थे। लौटने के बाद उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। अगले दिन उनके सुर बदल गए। उन्होंने सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि साधु होने के नाते वे सच बोलते हैं और सरकार के फैसले की सराहना की है।
सरकार के फैसले की सराहना
अगले ही दिन उन्होंने सरकार के निर्णय की सराहना की है। सरकार ने आगामी नीट परीक्षाओं के लिए सेना और विमानों के माध्यम से प्रश्नपत्र सुरक्षा सुनिश्चित की। शास्त्री ने इसे छात्रों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
हम कोई प्लानिंग से नहीं बोलते
शास्त्री ने कहा, हम कोई प्लानिंग से नहीं बोलते। जो मुंह में आया, सो कह दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बच्चों के हितों की रक्षा करना है।
बेरोजगारी और वीआईपी कल्चर
साधु ने बेरोजगारी, नेताओं के वीआईपी कल्चर और आम जनता पर बढ़ती आर्थिक भार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आम जनता को नियमों का पालन करना पड़ता है, लेकिन नेताओं को भी जिम्मेदार होना चाहिए।
नीट पेपर लीक पर प्रतिक्रिया
बद्रीनाश धाम में शास्त्री ने कहा कि सिस्टम की गलती से विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि पेपर लीक पर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि छात्रों और परिवारों को राहत मिले।
धीरेंद्र शास्त्री ने दिया था ये बयान
धीरेंद्र शास्त्री ने साधना से लौटने के तुरंत बाद सरकार और व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए थे। नीट पेपर लीक पर चिंता जताई और बच्चों के रोते हुए हालात पर कटाक्ष किया था।
NEET पेपर लीक मामले पर धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार से अपील करते हुए कहा था कि यदि गलती सिस्टम की है, तो अगली बार छात्रों की फीस माफ होनी चाहिए। कुछ बच्चों ने बहुत मेहनत की। एक-दो बच्चे-बच्चियां यहां मुझसे मिलने आए। उनका मन हीन देखकर मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि पेपर तो दिया, लेकिन वह लीक हो गया। शास्त्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, चुनाव लीक नहीं होते, काश नेताओं की वोटें लीक हो जाएं।
गलती विद्यार्थियों की नहीं, सिस्टम की
धीरेंद्र शास्त्री कहा था कि गलती विद्यार्थियों की नहीं, सिस्टम की होनी चाहिए। सिस्टम को दंड मिलना चाहिए और अगली बार की फीस माफ होनी चाहिए। उन्होंने कहा जब गलती सिस्टम की है, विद्यार्थी क्यों भुगतें। सिस्टम को भुगतना चाहिए ताकि गलती का एहसास हो। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसा होने पर भारत जल्दी बदलेगा।
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