नेहा पच्चीसिया ने पुलिस विभाग पर ही लगाए आरोप, सह आरोपी को पहचानने से किया इनकार
नेहा ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल
कटनी की पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत खारिज हो गई थी। इस मामले में अब कोर्ट का विस्तृत आदेश सामने आया है। आदेश में नेहा की ओर से रखी गई दलीलें भी दर्ज हैं। इन दलीलों में पुलिस जांच पर ही सवाल उठाए गए हैं।
नेहा ने जांच को दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया। साथ ही खुद को कुठला पुलिस द्वारा मामले में गलत तरीके से फंसाने की बात कही। जमीन सौदे में अपनी कोई भूमिका भी नहीं मानी।
इतना ही नहीं नेहा ने सह आरोपी क्षितिज राज बरापत्रे को पहचानने से इनकार कर दिया। मारूफ अहमद हनफी से भी संबंध नहीं होने की बात कही। यानी अदालत के सामने नेहा ने पूरे मामले से दूरी बनाई। वहीं एक साथ लगी दोनों आरोपियों की जमानत भी कई सवाल खड़े कर रही है।
सह आरोपी को नहीं जानने का दावा
नेहा की ओर से कोर्ट में कहा गया कि क्षितिज से संबंध नहीं है। नेहा और क्षितिज की ओर से एक ही अधिवक्ता ने पैरवी करते हुए बताया कि दोनों के बीच कोई कनेक्शन नहीं है। नेहा ने जमीन की रजिस्ट्री में अपनी भूमिका भी नकारी। उनका कहना था कि रजिस्ट्री दूसरे पक्षों के बीच हुई थी।
इसलिए जमीन सौदे में उन्हें जोड़ना गलत है। बिलकुल यही दावा सह आरोपी क्षितिज राज बारपत्रे ने भी किया। लेकिन पुलिस जांच में तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है।
जांच में दोनों के बीच संबंध की कड़ी पहले ही जुड़ गई है। इसका एक आधार बैंक खातों का लेनदेन भी बना। पुलिस ने इसी आधार पर क्षितिज की भूमिका पर सवाल उठाए।
15 लाख के लेनदेन ने खड़े किए सवाल
पुलिस जांच में मारूफ के बैंक खाते की पड़ताल हुई थी। 15 अप्रैल को उसके खाते में 15 लाख रुपए पहुंचे।
इसमें पांच लाख रुपए क्षितिज के खाते से आए। दस लाख रुपए शाइन पार्टनर्स के जरिए आए।
जांच में शाइन पार्टनर्स का लिंक भी क्षितिज से जोड़ा गया। पुलिस ने मारूफ की आर्थिक क्षमता की भी जांच की। जांच में उसके पास पर्याप्त रकम नहीं होने की बात आई। इसके बाद क्षितिज की भूमिका को लेकर सवाल उठे। पुलिस ने इन लेनदेन को महत्वपूर्ण जांच कड़ी माना।
दोनों आवेदन साथ लगे, नंबर भी लगातार
कोर्ट रिकॉर्ड में एक और तथ्य ध्यान खींचता है। नेहा का अग्रिम जमानत आवेदन 821/2026 है। क्षितिज का अग्रिम जमानत आवेदन 822/2026 है। दोनों आवेदन लगातार क्रमांक पर दर्ज किए गए। दोनों मामलों में एक ही अधिवक्ता पेश हुए।
यह तथ्य अकेले कोई अपराध साबित नहीं करता, लेकिन मामले की पूरी परिस्थितियों में यह अहम है। दोनों आरोपी अपने बीच संबंध से इनकार कर रहे हैं।
वहीं उनके आवेदन एक साथ अदालत पहुंचे। दोनों का मामला एक ही अधिवक्ता ने दायर किया। फिर उनकी पैरवी भी एक ही अधिवक्ता ने की। पुलिस जांच में भी दोनों के बीच संबंध की कड़ी पहले ही जुड़ गई है।
टूटी शादी और बच्चों की भी दी दुहाई
नेहा की और से कोर्ट को बताया गया कि उसकी शादी साल 2025 में शून्य घोषित हो चुकी है। उसके 2 छोटे छोटे बच्चे हैं जो स्कूल में पढ़ते हैं। उनकी जिम्मेदारी भी नेहा पर ही है।
इस आधार पर अग्रिम जमानत के पक्ष में रखा गया। नेहा की ओर से जांच में सहयोग का दावा भी किया गया। इसके बावजूद अदालत ने राहत देने से इनकार किया।
अभियोजन सहित आपत्तिकर्ता ने किया विरोध
सरकार की ओर से दोनों जमानत आवेदनों का विरोध हुआ। इसके साथ ही आपत्तिकर्ता अधिवक्ता अविनाश तिवारी ने भी जमानत का पुरजोर विरोध किया। अभियोजन ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताया और जांच अभी पूरी नहीं होने का हवाला दिया।
कोर्ट को बताया गया कि दोनों आरोपी फरार हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। अग्रिम जमानत मिलने से गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई।
अभियोजन का कहना था कि इस स्थिति में राहत उचित नहीं है। जांच के दौरान कई तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपियों की हिरासत जरूरी हो सकती है।
आपत्तिकर्ता अविनाश तिवारी की ओर से अदालत में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया गया। यह भी कहा गया कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है। ऐसे गंभीर मामलों में सावधानी की जरूरत है।
कोर्ट ने केस डायरी देखकर लिया फैसला
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लीला लोधी ने दोनों आवेदन सुने। अदालत ने केस डायरी का भी अवलोकन किया। कोर्ट ने माना कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। आरोपों की प्रकृति को भी अदालत ने गंभीर माना।
जांच में सहयोग से जुड़ी आपत्तियों पर भी विचार हुआ। गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी देखी गई। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को भी रिकॉर्ड किया, लेकिन कोर्ट ने साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन नहीं किया।
अदालत ने माना कि कई दलीलें जांच से जुड़ी हैं। इनका फैसला मुकदमे के दौरान किया जाना है। इसी आधार पर दोनों अग्रिम जमानत आवेदन खारिज हुए। नेहा का आवेदन 821/2026 खारिज कर दिया गया। क्षितिज का आवेदन 822/2026 भी खारिज हुआ।
जमीन सौदे से शुरू हुआ था विवाद
बता दें कि यह पूरा मामला कटनी के कन्हवारा गांव की जमीन से जुड़ा है। जमीन का खसरा नंबर 2618/1 बताया गया है। 15 अप्रैल 2026 को जमीन की रजिस्ट्री हुई थी। रजिस्ट्री मारूफ अहमद हनफी के नाम हुई। सौदे की रकम 1.07 करोड़ बताई गई।
वहीं जमीन के मालिक शिकायतकर्ता को केवल 15 लाख रुपए ही मिले। बाकी रकम को लेकर विवाद सामने आया। आरोप लगे कि नेहा पच्चीसिया ने जेल में बंद आरोपी का चालान देरी से पेश कर उसे राहत दिलाई। जिसके एवज में डराकर उसकी 1 करोड़ से अधिक की जमीन अपने सहयोगी के साथ मिलकर हड़प ली।
अब सबसे बड़ा सवाल जांच की अगली दिशा
नेहा ने पुलिस जांच को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। सह आरोपी क्षितिज और नेहा ने एक दूसरे को पहचानने से भी इनकार किया। वहीं पुलिस जांच में दोनों के बीच कड़ी बताई गई।
बैंक लेनदेन इस कड़ी का अहम हिस्सा है। दोनों के जमानत आवेदन लगातार क्रमांक पर दर्ज हुए। दोनों की पैरवी एक ही अधिवक्ता ने की। फिलहाल अदालत ने केवल अग्रिम जमानत पर फैसला दिया है।
आरोपों की सच्चाई का अंतिम फैसला अभी बाकी है। पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यही प्रक्रिया तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है।
नोट: अदालत के आदेश में दर्ज आरोप दोषसिद्धि नहीं हैं। मामले में आरोप साबित होना अभी बाकी है।
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