नेपाल त्रासदी में भोपाल के 29 लोग लापता, चीन ने बताया एक और बड़ा खतरा

Aman Vaishnav | Aug 28, 2026, 09:54 IST
नेपाल त्रासदी
नेपाल त्रासदी
नेपाल जलप्रलय में अब तक 389 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 1400 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें भोपाल के 29 नागरिक भी फंसे हुए हैं। चीन के देर से अलर्ट देने पर एक और बड़ी झील टूटने का खतरा है। इससे भारत में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक त्रासदी से हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 389 हो चुकी है।



साथ ही 1500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण त्रासदी का असर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तक देखने को मिल रहा है।



यहां के 29 लोग नेपाल में दर्शन और यात्रा के लिए गए थे और अब वहां बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं। परिजनों से उनका संपर्क टूट गया है जिससे लोग बेहद चिंतित हैं।



इसी बीच चीन के रवैये पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि उसने बाढ़ का अलर्ट पहले जारी नहीं किया। अब चीन ने चेतावनी दी है कि नेपाल-चीन सीमा के पास एक और बड़ी अस्थाई झील टूट सकती है। इससे आने वाले 72 घंटे नेपाल और भारत दोनों के लिए बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं।



c3132ef0-a161-11f1-aaf8-119f176ff4ce.jpg-528913


चीन ने पहले नहीं चेताया

काठमांडू में आई इस आपदा ने पूरे नेपाल को हिला दिया है। राहत और बचाव का काम अब भी जारी है। हादसे से एक दिन पहले चीन ने कोई अलर्ट नहीं दिया था।



अब चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने नई जानकारी दी है। छोछेन और पुरु त्सांगपो नदियों के संगम पर एक बड़ी झील बन गई है। इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा है।



nepal-flood-real-scintific-reason-1787749028511-699862


नई झील से बड़ा खतरा

झील में पानी की आवक लगातार जारी है। इसके टूटने का खतरा बना हुआ है। चेतावनी के अनुसार अगले 72 घंटे बेहद नाजुक हैं। अगर यह झील टूटी तो नेपाल में हालात और बिगड़ सकते हैं।



इसका असर सीधे भारत पर भी पड़ सकता है। गंडक नदी में पानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र के आठ देशों में खतरा माना जा रहा है।



काठमांडू स्थित संस्था आईसीआईएमओडी (ICIMOD – International Centre for Integrated Mountain Development) ने भी चेतावनी दी है। नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के ऊपरी हिस्से में एक अवरोध अभी भी फंसा है। इससे बाढ़ की एक और लहर आने का खतरा है।



60c48551-056


भारतीयों की तलाश जारी

आपदा में मरने वालों की संख्या 389 तक पहुंच चुकी है। 1500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। भारत के 225 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।



त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 भारतीयों को बचा लिया गया है। मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 200 लोग चीन में फंसे हुए थे। पहले 288 लोगों के लापता होने की सूचना थी जो अब घटकर 225 रह गई है।



तमिलनाडु से मानसरोवर यात्रा पर गए 21 लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। वहीं 86 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। लापता लोगों का पता लगाने के लिए प्रयास जारी हैं।



चीन ने भी कहा है कि उसके करीब 100 नागरिक नेपाल में लापता हैं। दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लापता भारतीयों की जानकारी दी।



1a2f66a8-bef


भोपाल के 29 लोग फंसे

नेपाल बाढ़ (नेपाल त्रासदी) में भोपाल के भी कई लोग फंसे हैं। कोलार और पीएंडटी चौराहा इलाके के करीब 29 लोग नेपाल गए थे। अब उनके परिवारों से संपर्क टूट गया है।



कोलार नयापुरा निवासी विष्णु भाटिया ने बताया कि उनके भाई-भाभी, बहू और रिश्तेदार गांव के 29 लोगों के साथ शिवकुंडा मंदिर दर्शन के लिए गए थे। बुधवार सुबह उनसे आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।



वहीं पीएंडटी चौराहा निवासी रामकृष्ण दुवेदी ने बताया कि उनके रिश्तेदार नेपाल के डोला गांव में रहते हैं। उनके छोटे भाई के सास-ससुर और अन्य रिश्तेदारों का भी कोई पता नहीं चल रहा है। परिवार उन्हें ढूंढने में जुटा है।



f7ce26ed-f0a


वैज्ञानिकों की अलग राय

इस आपदा को लेकर वैज्ञानिक विश्लेषण भी जारी है। इसरो (ISRO – Indian Space Research Organisation) से जुड़े नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप के बाद ग्लेशियर टूटा। इससे एक अस्थायी बांध बना जिसके टूटने से तबाही आई।



वैज्ञानिकों ने यह जानकारी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-2 और भारत के रिसोर्ससैट-2ए उपग्रहों से मिली तस्वीरों के आधार पर दी है।



रसुवा क्षेत्र में 26 अगस्त की सुबह 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था।



5352203e-8ad


अमेरिकी एजेंसी का दावा

वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण एजेंसी यूएसजीएस (USGS – United States Geological Survey) की राय अलग है। एजेंसी का कहना है कि वहां कोई भूकंप नहीं आया था। जिसे भूकंप बताया जा रहा है, वह असल में नदी में गिरे भारी मलबे का कंपन था।



भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के संगम पर बर्फ और चट्टानों का बड़ा भूस्खलन हुआ। इसी वजह से पानी महासैलाब में बदल गया। इस पर वैज्ञानिकों में अभी भी मतभेद बना हुआ है।



167fc7aa-066


मदद के लिए हेल्पलाइन

मध्यप्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों की मदद के लिए हेल्पलाइन जारी की है। नई दिल्ली में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस पर 011-26772005 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।



वॉट्सएप नंबर 9818963273 पर भी सूचना दी जा सकती है। ईमेल आईडी recpvmpbhawan@mp.gov.in पर भी संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



6f9e493d-3f3


ये खबरें भी पढ़िए...

नेपाल में मची तबाही, 92 मौतें,1400 लापता, फिर बाढ़ का खतरा



नेपाल में लापता हुईं विदिशा की स्वाती, बेटी को छोड़कर गईं थी मानसरोवर यात्रा



नेपाल में अचानक बाढ़ क्यों आई? ISRO सैटेलाइट ने खोला तबाही का राज



नेपाल बाढ़ आपदा: सरकार ने जारी किए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर



Tags:
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • Indian Space Research Organisation
  • विदेश मंत्रालय
  • रणधीर जायसवाल
  • नेपाल बाढ़
  • नेपाल त्रासदी