प्रमोशन में आरक्षण पर नई जंग: प्रमोशन में आरक्षण नियम 2025 के विरोध में अब अजाक्स भी मैदान में

Neel Tiwari | Sootr Creatives | Oct 07, 2026, 15:58 IST
मध्य प्रदेश में प्रमोशन आरक्षण नियम 2025 को लेकर विवाद फिर बढ़ गया है। अब अजाक्स ने भी हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
प्रमोशन में आरक्षण के प्रमोशन आरक्षण नियम 2025 पर अब अजाक्स भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। संगठन ने नियम 11 और 12 को संविधान के खिलाफ बताया है। उसका दावा है कि अलग सूची से मेरिट वाले आरक्षित कर्मचारी अनारक्षित पद नहीं पा सकेंगे। चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिका स्पेशल बेंच को भेज दी है। अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक केवल सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने ही इस नियम को चुनौती दी थी। अब अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ यानी अजाक्स भी मैदान में उतर गया है। अजाक्स ने प्रमोशन नियम 2025 के नियम 11 और 12 को चुनौती दी है। संगठन ने इन नियमों को संविधान के खिलाफ बताया है। इस याचिका पर बुधवार 7 अक्टूबर को सुनवाई हुई। सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने की।



अजाक्स ने नियम 11 और 12 पर क्या सवाल उठाए

अजाक्स की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि नियमों में आरक्षित और अनारक्षित वर्ग की अलग सूची बनती है। इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारी पहले प्रमोशन पा सकते हैं। इसके बाद अनारक्षित पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया होती है। अजाक्स का दावा है कि इससे मेरिटोरियस आरक्षित कर्मचारी अनारक्षित पद नहीं पा सकेंगे। संगठन ने इसी व्यवस्था को संवैधानिक चुनौती दी है।




36% आरक्षण और 64% अनारक्षित पदों का विवाद

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने बताया कि नियमों में 36% पद आरक्षित रखे गए हैं। इसमें 16% पद अनुसूचित जाति के लिए हैं। वहीं 20% पद अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। बाकी 64% पद अनारक्षित बताए गए हैं। अजाक्स का आरोप है कि अलग-अलग सूची बनाने से पूरी व्यवस्था आरक्षण आधारित हो जाती है। संगठन का कहना है कि आरक्षित वर्ग के योग्य कर्मचारियों को भी अनारक्षित पदों पर मौका मिलना चाहिए।



अजाक्स ने मेरिट वाले कर्मचारियों को लेकर उठाया सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने याचिका में अहम सवाल उठाया। आरक्षित वर्ग के योग्य कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर नहीं रखा जा रहा। ऐसे कर्मचारी अपनी आरक्षित श्रेणी में ही प्रमोट होंगे। अजाक्स का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों के विपरीत है। संगठन ने इंद्रा साहनी सहित कई फैसलों का हवाला दिया है।




अजाक्स के मुताबिक नियमों में उल्टी व्यवस्था है

अजाक्स का मुख्य तर्क प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर है। संगठन के अनुसार पहले अनारक्षित पदों पर मेरिट देखी जानी चाहिए। इसमें आरक्षित वर्ग के योग्य कर्मचारी भी शामिल होने चाहिए। इसके बाद आरक्षित पदों पर प्रमोशन होना चाहिए। लेकिन अजाक्स का आरोप है कि नियम 2025 में व्यवस्था उल्टी कर दी गई। पहले आरक्षित वर्ग की सूची तैयार होती है। इसके बाद अनारक्षित वर्ग की सूची बनाई जाती है।



सरकार ने किया याचिका का विरोध

सरकार की ओर से याचिका की सुनवाई पर ही सवाल उठाया गया। सरकारी अधिवक्ता ने इसे सुनवाई योग्य नहीं बताया। उनका कहना था कि संघ ने अपने सदस्यों की जानकारी नहीं दी है। यह भी बताया गया कि अजाक्स का पिछली याचिका में आवेदन भी खारिज हो चुका है।



कोर्ट ने याचिका खारिज करने से किया इनकार

सरकार की आपत्ति के बावजूद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज नहीं की। चीफ जस्टिस की बेंच ने इसकी सुनवाई का रास्ता खुला रखा। कोर्ट ने कहा कि याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर फैसला स्पेशल बेंच करेगी। यानी पहले यह तय होगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। इसके बाद मामले के मुख्य सवालों पर सुनवाई होगी।



प्रमोशन आरक्षण की स्पेशल बेंच ही करेगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने अजाक्स की याचिका को स्पेशल बेंच के पास भेजा है। प्रमोशन में आरक्षण के लिए पहले से स्पेशल बेंच गठित है। इसमें जस्टिस विनय सराफ और जस्टिस विवेक अग्रवाल शामिल हैं। अजाक्स की याचिका को पुराने मामलों के साथ जोड़ दिया गया है। इससे प्रमोशन नियम 2025 पर सभी बड़ी आपत्तियां एक साथ सुनी जाएंगी।




पुराने मामलों की सुनवाई 1 दिसंबर तक टली

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने प्रमोशन नियम 2025 को चुनौती दी है। इन मामलों की सुनवाई स्पेशल बेंच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय मामले के कारण सुनवाई आगे बढ़ी है। अब इन मामलों की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को तय है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का असर भी अहम रहेगा।



पहले हाई कोर्ट ने 50% सीमा पर दिया था निर्देश

इसी विवाद से जुड़े एक मामले में हाई कोर्ट ने अहम अंतरिम निर्देश दिया था। कोर्ट ने आरक्षित वर्ग के प्रमोशन को 50% सीमा के भीतर रखने को कहा था। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को इसकी निगरानी सौंपी गई थी। कोर्ट ने इंद्रा साहनी फैसले में तय 50% सीमा का हवाला दिया था। यह निर्देश अंतिम फैसले या संबंधित सुप्रीम कोर्ट फैसले तक लागू रहेगा।



अब अजाक्स की याचिका से विवाद क्यों बढ़ा

पहले प्रमोशन नियमों को लेकर सामान्य वर्ग की आपत्तियां सामने थीं। अब अजाक्स ने इन्हीं नियमों के दूसरे पहलू को चुनौती दी है। यानी एक तरफ सामान्य वर्ग नियमों पर सवाल उठा रहा है। दूसरी तरफ अजाक्स भी नियमों की संवैधानिकता पर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों की आपत्तियां अलग हैं। लेकिन दोनों की नजर प्रमोशन नियम 2025 पर है।



विभागों की रिव्यू डीपीसी से भी उठा सवाल

अजाक्स की ओर से सुनवाई में विभागों की कार्रवाई का भी जिक्र हुआ। संगठन के अनुसार कुछ विभागों ने रिव्यू डीपीसी के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई अलग-अलग सूची बनाने से जुड़े विवाद के बाद हुई। अजाक्स ने इसे नियमों में अस्पष्टता का संकेत बताया। संगठन का कहना है कि प्रमोशन इन्हीं नियमों के आधार पर हुए हैं। ऐसे प्रमोशन पहले से लंबित याचिकाओं के फैसले के अधीन हैं।




16 अक्टूबर को फिर होगी अजाक्स की याचिका पर सुनवाई

अजाक्स की नई याचिका पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। तब स्पेशल बेंच मामले की मेंटेनेबिलिटी पर भी विचार कर सकती है। साथ ही सरकार का नया विरोध भी सामने आ सकता है। इस याचिका के पुराने प्रमोशन मामलों से जुड़ने के बाद विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है। नियम 2025 की पूरी व्यवस्था पहले से ही अदालत की जांच के दायरे में है।



आखिर प्रमोशन आरक्षण नियम 2025 का पूरा विवाद क्या है

मध्य प्रदेश में प्रमोशन के लिए वर्ष 2025 में नए नियम बनाए गए। इन्हीं नियमों में आरक्षित और अनारक्षित पदों की प्रक्रिया तय है। सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इन नियमों को पहले चुनौती दी। उनका विवाद प्रमोशन में आरक्षण और उसकी सीमा से जुड़ा है। इसी मामले में हाई कोर्ट ने 50% सीमा पर अंतरिम निर्देश दिया। अब अजाक्स ने नियम 11 और 12 को अलग आधार पर चुनौती दी है।



उसका कहना है कि आरक्षित वर्ग के योग्य कर्मचारी अनारक्षित पदों पर भी विचार योग्य हैं। संगठन अलग-अलग सूची बनाने की व्यवस्था को संविधान के खिलाफ बता रहा है। अब दोनों पक्षों की दलीलें स्पेशल बेंच के सामने होंगी। इस पूरे विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी अहम होंगे। खासकर आरबी राय से जुड़े मामले का असर महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल अजाक्स की नई याचिका ने मामले को नया मोड़ दिया है।



  1. मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का विवाद क्या है?
    यह विवाद प्रमोशन नियम 2025 के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति कर्मचारी संघ (अजाक्स) द्वारा नियम 11 और 12 को संविधान के खिलाफ बताते हुए याचिका दायर करने पर आधारित है। सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने पहले ही इन नियमों को चुनौती दी थी।
  2. अजाक्स ने प्रमोशन के नियमों के खिलाफ क्या आपत्ति उठाई है?
    अजाक्स का कहना है कि नियमों के अनुसार आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों की अलग सूची बनती है, जिससे योग्य आरक्षित कर्मचारी अनारक्षित पदों पर प्रमोशन नहीं पा सकते।
  3. इस याचिका की अगली सुनवाई कब होगी?
    अजाक्स की याचिका पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी, जब स्पेशल बेंच मामले की मेंटेनेबिलिटी पर विचार करेगी।
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