भोपाल न्यू मित्र मंडल सहकारी संस्था घोटाला : EOW की जांच में करोड़ों की धोखाधड़ी और गबन उजागर

Sanjay Dhiman | Feb 25, 2026, 17:49 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल में न्यू मित्र मंडल सहकारी संस्था के घोटाले का खुलासा हुआ है। संस्था के पदाधिकारियों और अन्य आरोपियों पर करोड़ों की धोखाधड़ी और गबन का आरोप है।

News in Short

  • भोपाल ईओडब्ल्यू ने संस्था में करोड़ों की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है ।
  • करीब 25 वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार और गबन पर एफआईआर दर्ज ।
  • मूल सदस्यों को हटाकर अवैध रूप से 28 नए सदस्य जोड़े गए ।
  • नियमों के विरुद्ध आवासीय प्लॉटों को व्यवसायिक बताकर करोड़ों में बेचा गया ।
  • संस्था और शासन को कुल मिलाकर करोड़ों की राजस्व हानि हुई है ।

News in Detail

BHOPAL. राजधानी भोपाल के बागमुगालिया इलाके से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले ने सहकारिता विभाग और भू-माफियाओं के गठजोड़ की पोल खोल दी है। राजधानी की न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था में पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस पूरे मामले में जांच के बाद अब एफआईआर दर्ज की है।



यह कार्रवाई अर्जुन वाधवानी और अन्य सदस्यों की लिखित शिकायत के बाद हुई है। जांच में पाया गया कि संस्था के पदाधिकारियों ने करोड़ों की जमीन अवैध तरीके से बेच दी। दोषी पाए गए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2), 316(2) और 318(4) के तहत कार्रवाई की गई है।



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क्या था मामला?

न्यू मित्र मंडल की स्थापना 1981 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य संस्था सदस्य को घर बनाने के लिए जमीन देना था। इसके तहत बागमुगलिया क्षेत्र में लगभग 3.5 एकड़ भूमि खरीदी गई थी। जांच में पता चला कि यह भूमि सदस्यों को नहीं दी गई और इसे अन्य बाहरी लोगों को बेचा गया। साल 1996 में सड़क निर्माण के कारण कुछ जमीन शासन ने अधिग्रहित कर ली और उसके बदले संस्था को मुआवजा दिया गया था, लेकिन इस मुआवजे का लाभ भी संस्था के कुछ खास लोगों को दिया गया और अन्य लोगों को धोखे में रखा गया।



घोटाले की पूरी कहानी

संस्था ने 2004 में 45 आवासीय भूखंडों का नक्शा पास करवाया था, लेकिन बाद में उसे संशोधित करके भूखंडों का आकार बदल दिया गया और इन्हें गैर-सदस्यों को बेच दिया गया। इससे संस्था और सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। 2023 में अवैध रूप से नए नक्शे पास कराए गए और इन भूखंडों को व्यावसायिक उपयोग का दिखाकर गैरकानूनी तरीके से बेचा गया।



इस दौरान कई पुराने सदस्य को धोखा देकर उनकी जगह नए सदस्यों को जोड़ा गया और बहुत कम मूल्य में इन भूखंडों को बेचा गया। इसके कारण संस्था को लगभग 8.84 करोड़ रुपए और शासन को 4.5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।



ईओडब्ल्यू की रडार पर आए ये बड़े नाम

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। इसमें धारा 61(2), 316(2) और 318(4) के तहत कार्रवाई की जा रही है। मुख्य आरोपियों में दिवंगत संगमलाल हासीजा, नीलम हासीजा, और पायल हासीजा शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष मो. अफसर और उपाध्यक्ष नफीस पर भी शिकंजा कसा है। जांच में सहकारिता विभाग के कुछ अज्ञात अधिकारियों की मिलीभगत भी पाई गई है।



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आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

जांच में संलिप्त सभी आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें संलिप्त होने के कारण कई बड़े अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया गया है।



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