भोपाल गैस त्रासदी पर फिर उलझा अमेरिकी कंपनी का कानूनी पेंच, JMFC कोर्ट में अधिकार क्षेत्र पर दो घंटे जोरदार बहस
News in Short
- JMFC हेमलता अहिरवार की कोर्ट में दो घंटे बहस चली
- भोपाल कोर्ट को सम्मन भेजने का अधिकार नहीं था
- TDCC भारत में पंजीकृत नहीं, इसलिए सम्मन अवैध
- MLAT से यूनियन कार्बाइड को बुलाने की बात कही
- 7 मई को अधिकार क्षेत्र पर और दलीलें देंगे
News in Detail
साल 1984 में हुए भोपाल गैस कांड में यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन की मालिक डाउ केमिकल है। उसके अधिकार क्षेत्र पर जेएमएफसी कोर्ट में सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने डाउ का पक्ष रखा। उन्होंने कहा भारतीय और अमेरिकी कंपनी कानून अलग हैं। उनके साथी रविंद्र श्रीवास्तव पहले ही काफी दलील दे चुके हैं।
लूथरा का मुख्य तर्क अधिकार क्षेत्र को लेकर था। उन्होंने कहा जिस जज ने नोटिस भेजा, उन्हें यह अधिकार नहीं था। कंपनी को समन भेजने के लिए कंपनी का भारत में पंजीकरण जरूरी है। TDCC यानी डाउ भारत में पंजीकृत नहीं है। इसलिए भोपाल कोर्ट का नोटिस कानूनन सही नहीं है। दो घंटे तक कोर्ट में CrPC पर जोरदार बहस चलती रही।
भारत- अमेरिका ट्रीट्री का सहारा
डाउ के वकील कोर्ट रूम में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर दलीलें देते रहे। पूरी बहस का मकसद यह बताना था कि डाउ कैमिकल्स को भारत बुलाने का अधिकार नहीं है। डाउ के वकील ने कोर्ट को MLAT (म्युच्युअल लीगल असिस्टेंस ट्रीट्री) संधि का हवाला दिया। उन्होंने कहा कोर्ट को डाउ की जगह यूनियन कार्बाइड को बुलाना चाहिए। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने सुनवाई बढ़ाने के लिए समय की मांग की। वकील ने कहा वे कोर्ट के सामने अधिकार क्षेत्र से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केस लॉज रखेंगे। उनकी मांग पर कोर्ट ने सुनवाई 7 मई के लिए बढ़ा दी।
3 साल से अधिकार क्षेत्र पर बहस
अमेरिकी कंपनी पर भोपाल जेएमएफसी कोर्ट में मुकदमा चलाने के मामले में तीन साल से बहस जारी है। साल 2023 में मामला जेएमएफसी कोर्ट पहुंचा था। तब से लगातार सुनवाई जारी है। अमेरिकी कंपनी के वकील हर बार नए तथ्यों के साथ कोर्ट में तर्क रखते आ रहे हैं। इस बार फिर वकीलों ने अमेरिका में रजिस्ट्रेशन के आधार पर भारतीय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी है। अब 7 मई को डाउ के वकील सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर दलील पेश करेंगे।
लंबी कानूनी लड़ाई में फंसी राहत
गैस त्रासदी पीड़ितों को अब भी राहत का इंतजार है। भीषण त्रासदी की चपेट में आकर बीमारियों की गिरफ्त में फंसे परिवार कंपनी से मुआवजा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यूनियन कार्बाइड द्वारा 2001 में भोपाल स्थित कार्बाइड कारखाने के अधिकार अमेरिकी कंपनी डाउ कैमिकल्स को बेंच दिए गए थे। मालिकाना हक संभालने के बाद गैस पीड़ित अब डाउ कैमिकल्स से यूनियन कार्बाइड के मुआवजे की भरपाई मांग रहे हैं।
FAQ
- भोपाल गैस त्रासदी में डाउ केमिकल की भूमिका क्या है?
डाउ केमिकल ने यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण किया था, जो भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार थी। अब पीड़ित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। - डाउ के वकील ने क्या तर्क प्रस्तुत किए?
डाउ के वकील ने कहा कि भारतीय कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि डाउ केमिकल भारत में पंजीकृत नहीं है। - 7 मई को इस मामले में क्या होगा?
7 मई को डाउ के वकील सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देंगे, और अदालत इस मामले में अंतिम फैसला सुनाएगी।
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