NEWS STRIKE: बयान से बवाल, सफाई से सवाल! क्या विवादों से बढ़ती है बाबा बागेश्वर की लोकप्रियता?
सवाल ये है कि बाबा बागेश्वर ऐसा करते क्यों हैं। खुद पीएम मोदी उन्हें अपना छोटा भाई बोल चुके हैं। यानी लोकप्रियता की तो उनके पास कोई कमी नहीं है। फिर ऐसा बयान का धीरेंद्र शास्त्री ने गलती से दे दिया। क्या उसके गलत मायने निकले। इन सब पर चर्चा जारी है। फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री पर बयानी हमले हो रहे हैं।
क्या थी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ?
जेन जी के बीच एक पंच लाइन बड़ी फेमस है वो कहते हैं यू हेट हिम और लव हिम बट यू कांट इग्नोर हिम। वैसे तो ये लाइन तब से फेमस है जब धीरेंद्र शास्त्री को ज्यादा लोग नहीं जानते थे। ऐसा लगता है कि लाइन बनी ही उनके लिए है। आप धीरेंद्र शास्त्री को उनके बयानों के लिए पूज सकते हैं या उन पर निशाना साध सकते हैं। उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते। उनका ताजा बयान इस बात की मिसाल है। उन्होंने कुछ ही दिन पहले भगवान राम और कृष्ण की तुलना की। बातों ही बातों में भगवान कृष्ण की मुद्रा पर कुछ ऐसा कह डाला जो यकीनन कृष्ण भक्तों को नागवार ही गुजरा होगा।
धीरेंद्र शास्त्री का कृष्णजी पर बयान
इस बयान को सुनकर कोई बच्चा भी ये अंदाजा लगा सकता है कि इस पर विवाद होगा ही। राम और कृष्ण दोनों विष्णुजी के रूप हैं तो फिर ये भेद कैसा। मेरे राम बेस्ट और तुम्हारे कृष्ण टेढ़े क्या कृष्ण भक्त या विष्णु भक्त ये बात हजम कर सकते हैं। आप में से अधिकांश का जवाब भी नहीं ही होगा तो क्या धीरेंद्र शास्त्री इतने भोले हैं कि वो अपने ही बयान पर क्या बवाल होगा ये समझ न सके हों। उन्हें अंदाजा तो जरूर होगा कि वो जो बयान दे रहे हैं उसके बाद बवाल होगा ही। इसलिए शायद माफी या यू टर्न की भी तैयारी उन्होंने कर के रखी थी। जैसे ही विवाद बढ़ा उन्होंने तुरंत बयान दिया कि राम और कृष्ण दोनों उनके लिए पूज्य हैं। उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया।
धीरेंद्र शास्त्री पर सियासी हमला
क्या धीरेंद्र शास्त्री ने ये बयान सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए दिया था या सियासत में एक नई हलचल पैदा करना था। क्योंकि जैसे ही उन्होंने ये बयान दिया कई नेताओं ने उन पर जमकर निशाना साधा। दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि धीरेंद्र शास्त्री कब से बाबा बन गए। कंप्यूटर बाबा ने उन्हें राजनीतिक बाबा बताया। दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री के बहिष्कार की ही अपील कर डाली। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को केमिकल लोचा हो गया है। मथुरा का संत समाज भी बाबा से नाराज बताया जा रहा है। इस बयान की आंच से सबसे ज्यादा यूपी की सियासत तप रही है। अखिलेश यादव ने इस बयान पर तीखा हमला किया। पूरा यादव समाज भी इसके खिलाफ नाराजगी जता रहा है। अखिलेश यादव ने काशी में सभा को संबोधित किया। वोट चोरी के मुद्दे पर बयान दिया और फिर धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि श्री कृष्ण के अपमान पर क्या धीरेंद्र शास्त्री के आश्रम पर बुलडोजर चलेगा। उनके पुराने सहयोगी और अब एनडीए का साथ दे रहे राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोला कि उन्हें भगवानों से क्या मतलब।
धीरेंद्र शास्त्री का यू टर्न
क्या धीरेंद्र शास्त्री का बयान यूपी की राजनीति में यही उथलपुथल मचाने के लिए था या उन्हें इस गलती का अहसास हुआ कि यादव उनसे और बीजेपी दोनों से खफा हो सकते हैं इसलिए जल्दी यू टर्न मार लेना चाहिए। खैर इस सारे घमासान के बीच धीरेंद्र शास्त्री केन्या चले गए हैं और वहां के जंगलों में कुदरती हवा का मजा ले रहे हैं। साथ में भगवान राम को भी याद कर रहे हैं। वैसे हम भगवान राम और कृष्ण की बात छोड़ भी दें तो धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयानों की कोई कमी नहीं है वो अक्सर अपनी कथा में या बातों में ऐसा कुछ कह जाते हैं जो सुर्खियां बन जाता है। हाल ही में वो दुर्गा पूजा के दौरान खासे विवादों में रहे।
पंश्चिम बंगाल में जाकर दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार छोड़ने की अपील की। नॉनवेज खाने वालों के धर्म पर भी सवाल उठा दिए। जिसके बाद उन्हें नाराजगी झेलना पड़ी। खासतौर से बंगाली समुदाय के लोगों ने उनके ज्ञान पर खुब गुस्सा दिखाया। सांई बाबा पर भी वो विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि सांई बाबा फकीर हो सकते हैं लेकिन भगवान नहीं हो सकते। इतना ही नहीं उन्होंने इस बयान को जारी रखते हुए कहा कि गीदड़ की खाल पहनकर कोई शेर नहीं बन सकता है। एमपी में उनके बयान तो आपको याद ही होगा। जिसने रातोंरात उन्हें बाबा बागेश्वर के रूप में ख्याति दी थी।
प्रीतम लोधी को लेकर क्या बोले प्रीतम लोधी?
विधायक प्रीतम लोधी के एक अजीबोगरीब बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वो प्रीतम लोधी को मसल कर रख देंगे। नागपुर में उन्होंने कहा कि शिवाजी ने हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने के लिए कहा। जिसमें से एक आरएसएस की सेवा के लिए समर्पित करने के लिए भी कहा संत तुकाराम के लिए उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी रोज उन्हें डंडे मारती थी। इस बयान पर भी संबंधित समुदायों में नाराजगी देखी गई। कुछ साल पहले सहस्त्र बाहु को उन्होंने कुकर्मी बताया। इन सब बयानों में अधिकांश के बाद या तो धीरेंद्र शास्त्री ने यूटर्न लिया या अपने बयान पर सफाई दी। इस बार भी उन्होंने यही किया है। धीरेंद्र शास्त्री का बयान सिर्फ सुर्खियां बटोरने की एक कोशिश भर था या फिर इसका मकसद किसी धार्मिक बहस को छेड़ना था जो एमपी और यूपी की सियासत में हलचल मचा सके।