NEWS STRIKE : Bhopal में किसान आंदोलन क्या इंटेलिजेंस का फेलियर ? मूंग मामले में ही क्यों होता है हंगामा ?
NEWS STRIKE
क्या खूब कहावत बनी है... छाती पर मूंग दलना। भोपाल में चल रहे किसान आंदोलन को देखकर लगता है ये कहावत इसी दिन के लिए बनाई गई थी। वर्ना दाल कोई भी हो सकती थी और मुहावरा भी कि छाती पर मसूर दलना, छाती पर तुअर दलना वगैरहा वगैरहा। पर बनाने वाले को भी शायद ये अंदाजा होगा कि किसान और सरकार मूंग दाल पर ही आमने सामने होंगे। और मूंग दाल के लिए ही किसान सरकार की छाती पर मूंग दलने भोपाल तक आ जाएंगे।
पहले कॉकरोच और अब किसान, बीजेपी सरकार की नाक में दम कर रहे हैं। मेरा सवाल ये है कि इतनी बड़ी तादाद में किसान भोपाल तक पहुंचे कैसे। जब किसान सीएम हाउस की घेराबंदी के लिए सैकड़ों किमी की दूरी से निकले, तब क्या प्रदेश की पुलिस और इंटेलिजेंस सो रहे थे। मैं आपको ये भी बताउंगा कि हर साल क्यों मूंग के मामले में ही किसान को सड़क पर उतरना पड़ता है।
नमस्कार
जब मैंने ये सेगमेंट रिकॉर्ड करना शुरू किया तब तक किसान भोपाल की सड़क पर जमा थे। हम कह सकते हैं कि ये सड़क भोपाल की बड़ी आबादी को सिटी सेंटर से जोड़ती है। होशंगाबाद रोड के आसपार रहने वाले कई लोग होंगे जो सरकारी दफ्तर में काम करते हैं तो उन्हें अरेरा हिल्स तक आना होगा। बहुत से लोग होंगे जो प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं, उन्हें भी कम से कम एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और दस नंबर के इलाके तक आना ही पड़ेगा। लेकिन किसानों के प्रदर्शन के चलते डायरेक्टर कनेक्शन पूरी तरह से बंद हो गया। अधिकांश लोगों को डाइवर्जन का सहारा लेना पड़ा। स्कूल कॉलेजों की तो छुट्टी ही कर दी गई, पर कोई बात नहीं। किसान और जवान की जय करने वाला ये देश अन्नदाता की खातिर इतनी परेशानी तो उठा ही सकता है। सवाल ये है कि अन्नदाता क्यों परेशान है। क्यों प्रदेश का किसान हर बार मूंग दाल के मसले पर ही इतना परेशान होता है।
🔴NEWS STRIKE LIVE : Bhopal में किसान आंदोलन क्या इंटेलिजेंस का फेलियर ?
दो हजार किसान एक साथ आंदोलन पर
ताजे किसान आंदोलन की बात करें तो संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान इस प्रदर्शन पर अमादा है। जिनका इरादा सीएम हाउस घेराव का है। एक दिन पहले इन किसानों को बंगरसिया के पास रोक दिया गया था, लेकिन अगले दिन किसान भोपाल में इतना अंदर तक आ गए कि वीर सावरकर सेतु को ही बंद करना पड़ा। दिनभर उनके प्रदर्शन की ढेरों तस्वीरें वायरल होती रही। जेन जी आंदोलन का रंग भी कुछ कुछ नजर आया।
आज सुबह की शुरुआत किसानों ने भी फुटबॉल खेलकर की। रातभर सड़क पर बिताई और सुबह फिर आंदोलन के लिए तैयार हो गए। एक दिन पहले जो किसान बेरिकेड तोड़कर शहर में और अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था वो किसान आधे कपड़े उतारकर बसों पर चढ़ कर प्रदर्शन करता दिखा। किसान सीएम हाउस तक मार्च करना चाहते हैं, उनके तेवर साफ बताते हैं कि अगर सीएम हाउस तक जाने की इजाजत मिल गई तो शायद उनका मार्च बहुत शांतिपूर्ण तरीके से न हो। बताया जा रहा है कि करीब दो हजार किसान एक साथ आंदोलन पर उतर आया है।
NEWS STRIKE: जंतर मंतर वाली एकता टूटने वाली है? कॉकरोच v/s आरक्षण राजनीति
किसान राजधानी तक पहुंच गया। ऐसा कैसे हुआ
इस बारे में एसीपी आदित्य राज सिंहन भी बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पर जैसा मैंने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में किसान राजधानी तक पहुंच गया। ऐसा कैसे हुआ। जब किसान अलग अलग इलाकों से एकजुट होकर भोपाल के लिए निकले तब क्या लोकल इंटेलिजेंस या पुलिस नेटवर्क को ये पता नहीं चला कि किसानों की आगे की रणनीति क्या है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि किसानों की ये नाराजगी एक दिन की नहीं है, बल्कि कई दिनों से किसान मूंग दाल को लेकर ये प्रदर्शन कर रहा है। हरदा में ही किसान जुलाई की शुरुआत से ही मूंग खरीदी के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के कुछ संगठनों ने मिलकर वहां चक्काजाम भी किया और बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी। इसके बाद भी सरकार की खूफिया एजेंसी को ये अंदाजा नहीं हुआ कि देश का किसान किस हद तक आगे बढ़ सकता है।
देश ने अभी अभी एक आंदोलन देखा है। तब भी सवाल यही था कि क्या खूफिया एजेंसीयों को ये अंदाजा नहीं हुआ कि जेन जी का आंदोलन इतना बड़ा होगा। क्या उसी तरह प्रदेश की इंटेलिजेंस एजेंसी को ये अंदाजा नहीं हुआ कि कितनी संख्या में किसान हैं और कितने उग्र हैं। और, एक बात बता दूं, अगर ये आंदोलन काबू में नहीं आया तो आपको बहुत जल्द जेन जी वाला अंदाज भी इस आंदोलन में नजर आ सकता है।
NEWS STRIKE: 3 दिन में 15 बिल पास, चर्चा शून्य! मप्र विधानसभा में खो गए जनता के मुद्दे?
प्रदेश का किसान मूंग खरीदी को लेकर हर साल परेशान
इन किसानों की तीन बड़ी मांगें हैं एक मांग है सरकार मूंग की पूरी पैदावार खरीदने की गारंटी दे, इसके अलावा समय पर खाद ले और खाद के डिस्ट्रिब्यूशन यानी के वितरण की व्यवस्था में सुधार हो। किसानों से जुड़े और जो भी मुद्दे हों वो जल्द से जल्द निपटाए जाएं, बाकी मांग अलग हैं और मूंग का मामला अलग है। आपको याद होगा पिछले साल भी मूंग खरीदी को लेकर खूब बवाल हुआ था।
कहने को तो मप्र में डबल इंजन सरकार है यानी दोनों ही जगह बीजेपी हैं। इससे भी खास बात ये है कि केंद्र में जो कृषि मंत्री हैं वो मप्र के किसान पुत्र शिवराज सिंह चौहान ही हैं। जो मूंग के मसले से अच्छे से वाकिफ हैं। उसके बाद भी प्रदेश का किसान मूंग खरीदी को लेकर हर साल परेशान होता है। मूंग खरीदी के सीजन में प्रदेश और केंद्र सरकार एक दूसरे में बॉल फेंकने में ज्यादा बिजी रहते हैं।
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने भी इस मुद्दे पर कल कहा कि वो शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध कर चुके हैं। पर पत्र लिखने की जरूरत ही क्यों पड़ी। जब पहले से पता था कि मूंग इस सीजन में होती है और बिकने के लिए आती है तो केंद्र और प्रदेश ने पहले से तैयारी करके क्यों नहीं रखी। आंदोलन उग्र हो चुका है तो सीएम मोहन यादव ने भी कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना , मंत्री विश्वास सारंग , मंत्री राकेश सिंह , राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर शामिल है।
Shivraj Singh Chouhan ने CM Mohan Yadav को पत्र में क्या लिखा था ? MSP वाला चक्कर क्या है ? MP NEWS
सीएम ने उम्मीद जताई, जल्द निकलेगा समाधान
सीएम मोहन यादव ने उम्मीद जताई है कि कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों की समस्या पर जल्द समाधान निकलेगा। तब तक किसान क्या करेगा, क्या वो सब आंदोलन जारी रखेंगे और भोपाल की सड़क को जाम रखेंगे। या कमेटी की रिपोर्ट आने तक आंदोलन स्थगित कर देंगे।
इस साल इस आंदोलन का जो भी नतीजा हो, देखने वाली बात ये होगी कि क्या सरकार अगले साल मूंग खरीदी के लिए पहले से तैयारी करेगी या फिर हम अगले साल भी ऐसा ही कोई नजारा देखेंगे। ये हालात दिल्ली की पराली की याद दिलाते हैं। हर साल पराली जलती है, दिल्ली का गला चौक होता है। लेकिन पराली जलने के भी इंतजाम पहले से नहीं किए जाते। वही हालात मूंग बोने वाले किसानों के हो गए हैं। जो पहले मूंग की खेती करते हैं और फिर उसकी बिक्री के लिए परेशान होते हैं। क्या सरकार अगले साल उसी वक्त कोई इंतजाम कर लेंगे जब किसान मूंग के बीज बोना शुरू करेगा।