News Strike: ब्राह्मण नेताओं पर निशाना, कथावाचकों की खिलाफत, कैसे दलितों का चेहरा और Gen Z का फेवरेट बन रहे दामोदर यादव!

Harish Divekar | Apr 30, 2026, 07:01 IST
News Strike 29-04-26
दामोदर यादव, जो आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय नेता बन चुके हैं, अपनी विवादित बयानों और ब्राह्मण नेताओं के खिलाफ मुखरता से Gen Z के दिलों में जगह बना रहे हैं। उनकी लोकप्रियता अब बड़ी पार्टियों के लिए खतरा बन सकती है।

News Strike: सीहोर की एक गली में चंद घंटे पहले सैकड़ों लोग जमा हुए। देर रात तक भाषण का दौर चलता रहा और सब लोग चुपचाप बैठ कर सुनते रहे। इस भाषण में कभी धीरेंद्र शास्त्री का इशारों इशारों में जिक्र हुआ तो कभी किसी आला नेता का। न कोई बड़ी सभा की तैयारी, न आलीशान वाहनों से सुसज्जित रैली और न ही बड़े बड़े हॉर्डिंग पोस्टर से सजी सड़कें, फिर भी एक शख्स को सुनने बड़ी तादाद में लोग पहुंच गए। ये वो शख्स है जो अकेले ही कांग्रेस और बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियों को चुनौती देने निकल पड़ा है। अपने बयानों से ही बड़े नेताओं और हस्तियों की पॉपुलेरिटी के लिए खतरा बन रहा है।



सोशल मीडिया पर फॉलोअर बेशक कम है लेकिन Gen Z का फेवरेट है। नरोत्तम हों या सिंधिया हों या फिर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री हों उसके बयानी तीर सबके लिए बराबरी से छूटते हैं। यही हालात रहे तो ये एक शख्स... अकेला ही... अपने दम पर बड़ी पार्टियों का चुनावी खेल बिगाड़ सकता है।



सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सुर्खियों में दामोदार यादव

आप अगर फेसबुक या ट्विटर जैसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूज करते हैं तो उस पर एक अकाउंट सर्च कीजिए। ये अकाउंट है दामोदर यादव का. दामोदर यादव आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय नेता बन चुके हैं। लेकिन अपनी पॉपुलेरिटी के लिए वो ऐसे किसी पद के जरूरतमंद नहीं हैं। आप ट्विटर या फेसबुक पर उनके अकाउंट को स्क्रॉल करते हुए देखते जाइए, आप खुद ही समझ जाएंगे कि दामोदार यादव क्यों सुर्खियों में रहते हैं।



🔴 News Strike: Damodar Yadav की सभा में बढ़ती भीड़, Scindia, Mishra और Shastri पर हमला



विवादित बयानों के सहारे मिली लोकप्रियता

दामोदार यादव ने चंद्रशेखर रावण की पार्टी ज्वाइन की है। सोशल मीडिया पर हिट होने के लिए और Gen Z का फेवरेट नेता बनने के लिए वो पैंतरा आजमाया है जो सबसे ज्यादा ईजी और कॉस्ट इफेक्टिव है। दामोदार राव की आप कई पोस्ट देख सकते हैं, जिसमें उनके बयानों में अक्सर बीजेपी के बड़े नेता निशाने पर रहते हैं। कभी वो नरोत्तम मिश्रा पर निशाना साधते हैं तो कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तंज कसते हैं।



करीब तीन साल पहले अचानक दामोदार यादव चर्चाओं में आए। जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुर्गा बनाने की बात कही और नरोत्तम मिश्रा को मच्छर कहा। उस समय नरोत्तम मिश्रा प्रदेश के गृह मंत्री थे। तब दामोदार यादव ने उन्हें मच्छर की तरह मसलने की बात कही।



तब दामोदार यादव संदेश यात्रा निकाल रहे थे। इस यात्रा का पड़ाव जब शिवपुरी पहुंचा तब दामोदार यादव ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा सुन ले मैं 25 जून को दतिया में यात्रा का समापन करूंगा। मेरी यात्रा के समापन के साथ नरोत्तम मिश्रा की राजनीति भी खत्म हो जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि हम नरोत्तम मिश्रा को मच्छर समझते हैं तो बाकी किसी मंत्री संतरी को बोलने लायक ही नहीं समझते हैं।



News Strike: मोहन कैबिनेट के सीनियर मंत्री ने अफसर को घर बुलाया, धमकाया और गालियां भी दी, क्या एकजुट होगी IAS एसोसिएशन?



धीरेंद्र शास्त्री और प्रीतम लोधी की राह पर दामोदर

यहां मैं आपको एक किस्सा याद दिलाता हूं। आपको मध्यप्रदेश की पॉपुलर जुबानी बैटल याद होगी। जो हुई थी बीजेपी नेता प्रीतम लोधी और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बीच। प्रीतम लोधी ने कथावाचकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने भी कथाओं के जरिए बयान दिया। प्रीतम लोधी बीजेपी से निष्कासित हुए लेकिन उनकी वापसी भी हो गई। घटनाक्रम जो भी रहा हो, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि धीरेंद्र शास्त्री भी हिट हो गए और प्रीतम लोधी भी लोधी समाज का फेस बन गए।



दामोदार यादव भी इस पूरे नरेटिव को अच्छे से समझ चुके हैं और अब उसी लाइन पर काम कर रहे हैं। सवर्णों के खिलाफ राजनीति कर अपने समाज का जनाधार मजबूत कर रहे हैं। और बड़े नेताओं को निशाना बना कर और सो कॉल्ड इंट्रेस्टिंग से बयान देकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यानी जैन जी वोटर्स का फेवरेट फेस बन रहे हैं। ये याद रखिए कि मैं यहां फेवरेट फेस बोल रहा हूं। वोटर्स वाकई उन्हें वोट देंगे या नहीं मैं इसका कोई दावा नहीं कर रहा हूं।



News Strike: भर्ती परीक्षा को लेकर सीएम की अहम घोषणा ही भूले अफसर! कब खत्म होगा लाखों युवाओं का इंतजार?



बहुजन समाज का फेस बनने की कोशिश

आपको यादव के कुछ ऐसे ही चंद किस्से और बताता हूं। फिर ये बताता हूं कि यादव का बैकग्राउंड क्या है और फिर ये भी समझाता हूं कि कैसे वो कांग्रेस या बीजेपी में से किसी एक या दोनों के लिए खतरा बन सकते हैं। नरोत्तम मिश्रा और सिंधिया पर तंज कर चुके दामोदार यादव के निशाने पर इन दिनों धीरेंद्र शास्त्री भी रहे। असल में गणित समझिए धीरेंद्र शास्त्री ब्राह्मण समाज का फेस बन चुके हैं। अब सीधे उन्हें चैलेंज करके दामोदार यादव बहुजन समाज का फेस बन रहे हैं।



नवंबर में जब धीरेंद्र शास्त्री ने छतरपुर से सनातन एकता पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया था। तब यादव ने यात्रा रुकवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का ऐलान कर दिया था। चंद्रशेखर रावण की पार्टी में शामिल होने के बाद से यादव के तेवर और तीखे हो गए हैं। वो तमाम ब्राह्मण शख्सियतों के खिलाफ मुखर हैं। इस जनवरी को एक यात्रा में यादव ने धीरेंद्र शास्त्री, प्रदीप मिश्रा, अनिरुद्धाचार्य जैसे कथावाचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि कथावाचक अंधविश्वास फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मप्र को वो पाखंड की धरती नहीं बनने देंगे।



कलेक्टर और एसपी तक निशाने पर

उनके नाम के डंके मध्यप्रदेश ही नहीं झांसी तक बज चुके हैं। जनवरी में वो झांसी पहुंचे थे। जहां पुलिस ने उन्हें शहर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। लेकिन उनके स्वागत में कोई कमी नजर नहीं आई। राजनेता, बाबाओं के अलावा अफसर भी यादव के निशाने पर रहते हैं। इटारसी में संकल्प यात्रा लेकर पहुंचे यादव ने नर्मदापुरम कलेक्टर और एसपी तक से कहा कि तुम लोग सत्ताधारियों की चप्पल उठाते हो और अपने सिर पर रखते हो।



सीहोर में आधी रात तक सुनने के लिए बैठे थे लोग

अब बात सीहोर की कर लेते हैं, उनकी सभा देर रात को शुरू हुई सीहोर के बरखेड़ा कुर्मी गांव में वो अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित सभा में पहुंचे थे। इस सभा में उन्होंने कहा कि जिन्हें सदियों तक गुलाम बनाकर रखा गया वो अब देश के मालिक और शासक बनेंगे। धीरेंद्र शास्त्री अक्सर ठठरी जैसा शब्द इस्तेमाल करते हैं। यादव ने ठठरी और बार देना शब्दों का मतलब भी समझाया। बताया जा रहा है कि रात ज्यादा होने के बाद भी इस सभा में बड़ी तादाद में आसपास के गांव वाले उन्हें सुनने पहुंचे थे।



खुद को अंबेडकारवादी बताने वाले यादव आईएएस मीनाक्षी सिंह के पति हैं। 2023 में उन्होंने सेंधवा सीट से चानव लड़ा, तब वो कांग्रेस में थे। ये चुनाव वो हार गए. अब चंद्रशेखर रावण की आजाद समाज पार्टी का हिस्सा बन गए हैं। नई पार्टी में रह कर वो कभी आईएएस संतोष वर्मा का समर्थन करते हैं तो हाल ही में प्रीतम लोधी का पक्ष लेते हुए भी नजर आए।



🔴News Strike: MPPSC और ESB की संयुक्त परीक्षा कब से होंगी? सीएम की मंशा पूरी होने में किस बात की देर



प्रदेश की अस्सी से ज्यादा सीटों पर नजर

अब समझने वाली बात ये है कि यादव की ये सियासत क्या रंग लाएगी। कांग्रेस छोड़ कर एक नई और छोटी पार्टी को उन्होंने क्यों ज्वाइन किया। और इस पार्टी में रह कर भी वो दिन रात मेहनत कर रहे हैं। क्या वो अंदर ही अंदर अपने लिए या अपनी पार्टी के लिए एक नया जनाधार बना रहे हैं। जिसमें दलित, ओबीसी, आदिवासी वोटर्स को साथ जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं। देखिए चुनाव में अब भी ढाई साल है। ये ढाई साल में यादव कुछ सीटों पर तो पकड़ मजबूत कर ही सकते हैं।



प्रदेश में अस्सी से ज्यादा ऐसी सीटे हैं जहां दलित, ओबीसी और आदिवासी जैसे समाज या तो मुख्य वोटर्स हैं या निर्णायक होते हैं। यादव ने दस से पंद्रह सीटों पर भी जनाधार मजबूत किया तो वो किंग मेकर बन सकते हैं। बुंदेलखंड में वो तेजी से एक्टिव हैं। यही वो हिस्सा हैं जहां कभी बीएसपी मजबूत हुआ करती थी। दिग्विजय सिंह ने सरकार में रहते हुए बहुत मुश्किल से बीएसपी को अपने साथ लिया था, इसके बाद फूल सिंह बरैया भी कांग्रेस का ही चेहरा बन गए थे।



दामोदर की लोकप्रियता भाजपा-कांग्रेस के लिए खतरा

अब दलितों और आदिवासियों के लिए मप्र में कोई ऐसी पार्टी एक्टिव नहीं है जहां उन्हें ऐसा अपनापन या अपने लिए उठती ऐसी आवाज नजर आए। ये तबका आमतौर पर कांग्रेस को चुनता आया है। ऐसे में क्या यादव अपनी पार्टी के जरिए कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएंगे। ये बहुत संभव है कि इस तबके का जो वोटर बीजेपी को नहीं चुनना चाहता वो कांग्रेस से पहले आजाद समाज पार्टी को चुन सकता है, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को होगा। लेकिन बीजेपी भी नुकसान से बच नहीं सकेगी। यादव या चंद्रशेखर रावण ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।



विधानसभा चुनाव के बाद क्या वो किसी पार्टी को समर्थन दे सकते हैं। अगर हां तो वो पार्टी कौन सी होगी, बीजेपी या कांग्रेस। लेकिन ये सवाल तब वाजिब होगा जब आजाद समाज पार्टी कुछ सीटें जीत जाती हैं। असल खतरा तो तब है जब पार्टी जीते भी नहीं लेकिन वोट काटने वाली पार्टी बन जाए। तब सियासी समीकरण किसी सीट पर बिगड़ेंगे और किस पार्टी का खेल खराब करेंगे। इस समझने के लिए बड़ी पार्टियों को अभी से यादव के मूवमेंट पर बारीकी से नजर रखना चाहिए। उसके बाद ही क्लियर होगा कि यादव चुनाव में क्या ट्विस्ट ला सकते हैं।



Tags:
  • News Strike
  • सीहोर
  • धीरेंद्र शास्त्री
  • प्रदीप मिश्रा
  • सोशल मीडिया
  • प्रीतम लोधी
  • चंद्रशेखर रावण