News Strike: मोहन भागवत के दो बयान और सियासत में तूफान! निशाने पर विपक्ष या बीजेपी?
वैसे ही मोहन भागवत के विजयादशमी पर दिए भाषण की छोटी-छोटी रील्स अब वायरल हो रही हैं। कोई इसे बीजेपी और आरएसएस की अनबन से जोड़ रहा है तो कोई जेन जी प्रोटेस्ट पर निशाना मान रहा है। असल में इन बयानों की हकीकत क्या है?
संघ प्रमुख के बयान पर बाजार गर्म
संघ प्रमुख के कुछ बयान सोशल मीडिया पर बवाल मचा रहे हैं। संघ प्रमुख के ये बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है और सियासत भी धुआं धार हो रही है। इन बयानों को सुनकर आपको क्या लगता है, मोहन भागवत क्या कहना चाहते हैं?
एक रील में वो कह रहे हैं कि मनुष्य अहंकार में सब और मेरी सत्ता चलती है ऐसा सोचने लगता है और एक बयान में वो रिजीम चेंज वाली ताकतों पर निशाना साध रहे हैं। ये दोनों ही बयान काफी वायरल हो रहे हैं और इसे अलग-अलग मायनों के साथ अपने शब्दों से सजा कर लोग पोस्ट भी कर रहे हैं।
रिजीम चेंज वाले बयान पर क्या बोले भागवत
विजयादशमी के अपने भाषण में मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा कि ये सोचना गलत होगा कि सत्ता बदलने से हालात बदल सकते हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आगे भी कभी ऐसा नहीं होगा। फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की कुछ ताकतें अपने हितों के लिए दूसरे देशों में रिजीम चेंज की कोशिश करती हैं।
सांसद आलोक शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधा
इस बयान के जरिए भागवत का इशारा किसकी तरफ था ये समझा जा सकता है। इसे उन लोगों या दलों पर निशाना माना गया जो इन दिनों सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, जिसमें पूरा विपक्ष और सीजेपी दोनों शामिल हैं। इसके बाद से सियासी बवंडर शुरू हो गया। म.प्र. में इस मामले में भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि रिजीम चेंज की कोशिशें तेज हैं। आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं बल्कि समाधान के लिए होना चाहिए। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल किया कि सरकार आपकी है, जनता सड़कों पर उतर रही है तो सवाल तो बनता ही है।
रिजीम चेंज के जुमले पर बयानबाजी
तमाम नेशनल लीडर्स ने भी रिजीम चेंज के जुमले पर बयानबाजी की। लेकिन ये जुमला आया कहां से? क्या संघ प्रमुख ने पहली बार रिजीम चेंज जैसे फ्रेज का इस्तेमाल किया है? अगर आपको ऐसा ही लगता है तो आपको इसका पूरा रेफरेंस जानने की जरूरत है। असल में रिजीम चेंज करने की बात पहली बार प्रशांत भूषण ने की थी, जो सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बने थे। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि हां हम लोग रिजीम चेंज चाहते हैं।
इसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकार भी बताया और कहा कि भारत के संविधान के अनुसार विरोध प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं है। जिसके बाद पूर्व सीएम और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी रिजीम चेंज का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा था। तो अब अगर आप मोहन भागवत का रिजीम चेंज वाला बयान सुनें तो उसे पूरा सुनें और समझ लें कि वो आखिर किसकी तरफ निशाना है।
अहंकार वाला बयान बीजेपी के लिए चेतावनी?
अब बात करते हैं संघ प्रमुख के एक और बयान की, जिसमें वो अहंकारी की सत्ता पर बात करते सुनाई दे रहे हैं। इस बयान को कुछ लोग सत्ता और संघ की अनबन से जोड़ रहे हैं। किसी ने पोस्ट किया है कि संघ ने अब बीजेपी का साथ छोड़ दिया है इसलिए बीजेपी की हार अब निश्चित है या बीजेपी कमजोर हो चुकी है। पर इस बयान के कुछ भी मायने निकाले जाने से पहले इसे पूरा सुनना और समझना जरूरी है।
क्या बीजेपी और आरएसएस के रिश्तों में दरार?
खुद संघ प्रमुख भी ये कह चुके हैं कि उनके बयान होते कुछ और हैं और उन्हें पेश कुछ अलग अंदाज में किया जाता है। इस बयान के संदर्भ में भी कुछ ऐसा ही नजर आता है। असल में बीजेपी और संघ को जो कड़ी जोड़ती है उसमें विचारधारा और बैकग्राउंड के साथ-साथ एक और मजबूत कड़ी है, वो है अनुशासन। जिसकी वजह से बीजेपी और संघ की तू-तू मैं-मैं या कलह कभी खुलकर बाहर नहीं आई। बेशक उनमें मतभेद हो सकते हैं, पर उन्हें सामने रखने और स्पष्ट करने का मंच अलग और बेहद गोपनीय होता है। इसलिए संघ प्रमुख के स्तर का नेता इनडायरेक्टली बीजेपी के किसी बड़े नेता पर निशाना साधेगा इसकी संभावना बेहद कम होती है। इसलिए इस बयान को भी सुनना और समझना जरूरी है।
राम मंदिर उद्घाटन से संघ की दूरी!
ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि राम मंदिर उद्घाटन से संघ की दूरी के बाद भी ऐसी ही अटकलें लगी थीं। ये दावे किए गए थे कि अब संघ बीजेपी से खफा है और चुनाव में पार्टी की हार तय है। लेकिन जब चुनाव हुए और नतीजे सामने आए तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। संघ के कार्यकर्ताओं ने भरपूर एनर्जी के साथ चुनाव प्रचार किया और बीजेपी को मजबूत बनाया। बीजेपी भले ही चार सौ सीटें न जीत सकी हो पर सरकार बनाने में जरूर कामयाब हुई। इसलिए भी सत्ता और अहंकार के बयान को किसी और इशारे से जोड़ना या बीजेपी के किसी नेता की तरफ संकेत से जोड़ना काफी बेमानी हो सकता है।