News Strike : MP में गांव अंधेरे में, जयविलास पैलेस के मीटरों पर सवाल, बिजली संकट की पूरी पड़ताल

Harish Divekar | Oct 17, 2026, 07:00 IST
मध्य प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।
News Strike : बिपासा, ये किसी हीरोइन का नाम नहीं वो मुद्दे हैं जिस पर दिग्विजय सिंह की सरकार हारी थी। अब MP फिर उसी बिपासा का शिकार बनता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हो रहा है। ये तकलीफ उस और बढ़ जाती है जब पता चलता है कि सिंधिया के जयविलास पैलेस को ये सुविधा बेहद रियायती दर पर मिल रही है।

बिपासा की ताकत ने 2003 में बदल दी थी सरकार

आप बिपासा को समझने के लिए दिमाग पर ज्यादा जोर डालें उससे पहले बता देता हूं। बिपासा यानी कि बिजली पानी और सड़क, जो बदतर हालात में थी। इसलिए दिग्विजय सिंह का नाम पड़ गया था मिस्टर बंटाधार और 2003 में उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद दोबारा कांग्रेस मध्यप्रदेश में खड़ी ही नहीं हो पाई। ये बिपासा कि ताकत है जो सीधे आम आदमी से कनेक्ट करती है, आम वोटर का दिल जीतती है और सरकार को मजबूती देती है।



पानी की किल्लत तो गर्मियां गुजरने के साथ काफी हद तक कंट्रोल में आ जाती है। सड़कों के हालात तो सभी देख रहे हैं। हम जरा आज बिजली पर फोकस करते हैं। बहुत समय बाद प्रदेश में फिर ऐसे हालात बन गए हैं जैसे अघोषित बिजली कटौती जारी हो चुकी हो।



गांवों में 8 से 10 घंटे बिजली कटौती

खासतौर से प्रदेश के गांवों में अब अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। बहुत से गांव ऐसे हैं जहां आठ से दस घंटे तक बिजली कटौती की शिकायत सामने आ रही है। कोई गांव पूरी पूरी रात अंधेरे में डूबा है तो कोई गांव दिन दिन भर बिजली का इंतजार कर रहा है।



सबसे ज्यादा दिक्कत किसानों को है। जो सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करते हैं। लेकिन काम शुरू हो उससे पहले बिजली गुल हो जाती है। नतीजा ये है कि खेत सूख रहे हैं। त्योहार बेनूर हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। हालात ऐसे होंगे तो गुस्सा भी सड़क तक नजर आएगा भी। ये हालात मप्र में नजर आने लगे हैं। भोपाल, सीहोर, बैतूल, विदिशा, नर्मदापुरम, राजगढ़ जैसे जिलों में किसान अब बिजली कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन पर अमादा हो चुके हैं। प्रदेश के कई हिस्सों से चक्काजाम, और बिजली दफ्तर के घेराव की खबरें सामने आने लगी हैं। कुछ जगहों पर किसान धरना भी दे रहे हैं।



भोपाल के 35 गांव बिजली को लेकर परेशान

भोपाल के ईंटखेड़ी फीडर से कनेक्ट करीब 35 गांव बिजली कटौती से हलाकान हैं। सीहोर में कई जगहों पर शाम 6 से 8 के बीच बिजली कटौती हो रही है। दो घंटे के लिए लाइट आती है उसके बाद रात 10 से सुबह छह बजे तक बिजली गुल ही रहती है। गुस्साए लोग चक्काजाम कर रहे हैं और जावर के इलेक्ट्रिसिटी ऑफिस में ताला भी जड़ चुके हैं।



राजगढ़ में बिजली को लेकर कांग्रेस का चक्काजाम

राजगढ़ जिले में भी बिजली कटौती को लेकर प्रदर्शन जारी है। आठ अक्टूबर से शुरू हुए प्रदर्शन में चक्काजाम और प्रदर्शन तक हो चुके हैं। पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर और अधीक्षण यंत्री भी एक दूसरे से नोकझोंक कर चुके हैं। मामले में कांग्रेस भी कूद चुकी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया.और गेट पर बैठ कर भजन भी गाए। बैतूल, विदिशा और नर्मदापुरम में भी हालात यही हैं। यहां धरना प्रदर्शन, चक्काजाम तक हुए हैं।



शहरों को रोशन रखने के लिए गांवों में बिजली कटौती?

इस मामले में मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जनरल मैनेजर अंकुर सेठ ने कुछ मीडिया हाउसेस से कहा कि त्योहार के दिनों में शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए कुछ गांवों में कटौती की जा रही है। अधिकारी ने भले ही ये दिलासा दे दिया हो कि कुछ दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे पर इस जवाब से ये भी साफ हो गया है कि प्रदेश में बिजली की किल्लत तो है। जिस वजह से शहरों में तो त्यौहारी सीजन रोशन हो रहा है लेकिन गांवों में सन्नाटा पसरा है। ये जानकर गुस्सा तो आएगा ही एक गांव पूरी रात अंधेरे में डूबा है और शहर में झांकियां सजी हुई हैं। इससे भी ज्यादा गुस्सा शायद ये जानकर आए कि जयविलास जैसे आलीशान महल में बिजली का बिल किसी आम मिडिल क्लास फैमिली के टूबीएचके मकान से भी कम है।



जयविलास पैलेस के 21 बिजली कनेक्शन

ये बात चौंकाने वाली है लेकिन द सूत्र ने इस मामले पर पूरी गहराई से पड़ताल की है। एक एक मीटर का डिटेल हासिल किया है, जिसे जानने के बाद आप भी चौंक जाएंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया का जय विलास पैलेस करीब 400 कमरों का आलीशान महल है। जिसमें बिजली के मीटर ही करीब 21 लगे हैं यानी 21 अलग अलग कनेक्शन हैं। लेकिन बिल चंद हजार रुपये का ही आता है। 21 में से एक दो मीटरों को छोड़ दें तो बाकी सारे मीटर वही पुराने हैं। जिसमें रीडिंग के नाम पर चकरी घूमती हुई नजर आती है। जिसकी वजह से या तो बिजली खपत बहुत कम दिखती है या फिर जीरो यूनिट ही आती है।



उषा किरण पैलेस होटल का अलग बिजली कनेक्शन

इस पैलेस का एक हिस्सा उषा किरण पैलेस है। जिसके पचास कमरे ताज ग्रुप ऑफ होटल्स के तहत होटल में तब्दील किए गए हैं। यहां 400 किलोवोल्ट एम्पियर का एचटी कनेक्शन है। जिसका बिल अलग आता है। इसलिए वहां का मीटर अलग है। द सूत्र ने अपनी खबर में इस होटल के बिजली बिलों को लेकर या मीटर को लेकर कोई दावा नहीं किया है। उषा किरण पैलेस के अलावा जयविलास पैलेस के अधिकांश पुराने हैं।



खुद सिंधिया राजघराने की बात करें तो उसके सदस्य पैलेस के रानी महल वाले हिस्से में रहते हैं। इस हिस्से में एक साल यानी कि 12 महीने में 360 यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत हुई। यहां पर स्मार्ट मीटर लगा हुआ है। अब हम बाकी के मीटरों की बातकर लेते हैं।



महादजी चैरिटेबल ट्रस्ट की बिजली खपत जीरो

पहला मीटर लगा है महादजी चैरिटेबल ट्रस्ट में, इसका एक साल का बिजली का बिल जीरो है। सिर्फ 1006 रुपए का बिल आया है, जो अन्य चार्जेस का हिस्सा है। दूसरा मीटर चीफ सेक्रेटरी टू श्रीमंत हिज हाईनेस के नाम से दर्ज है। इसकी सालाना खप 2016 यूनिट है और 14 हजार से ज्यादा का बिल बकाया है। तीसरा कनेक्शन कमर्शियल कनेक्शन है। लेकिन उसमें एक साल में सिर्फ 5 यूनिट बिजली खपट बताई गई है।



चौथा कनेक्शन वसुंधरा राजे चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम दर्ज है। जिसकी बिजली खपत 2764 यूनिट है, और बिल बकाया है 24 हजार 687 रुपए का। पांचवां कनेक्शन मन्नू महल का है। जिसकी सालभर की बिजली खपत जीरो यूनिट है। छठवां कनेक्शन द ऑफिसर एस आरयश के नाम से है। जूनियर महारानी स्वी हाउस के एड्रेस वाले इस मीटर का पर पिछले एक साल से एक यूनिट बिजली खपत भी नहीं हुई। यहां मीटर भी पुराना ही लगा है। सातवां कनेक्शन एमपी सिंह सेक्रेटरी के नाम से इस पुराने मीटर पर भी बिजली खपत दो यूनिट ही नजर आ रही है।



आठवां मीटर भी कैपिटल कंपनी का पुराना मीटर है जो हिरनवन कोठी में लगा है। ये भी सालभर की बिजली खपत एक यूनिट ही दिखा रहा है। नवां कनेक्श द महारानी स्वीट हाउस का है। इसका पुराना मीटर भी जीरो यूनिट बिजली खपत दिखा रहा है।



सिंधिया का राजमहल अटल गृह ज्योति योजना का फायदा ले रहा

दसवां कनेक्शन भी एमपी सिंह सेक्रेटरी के नाम से इसका पुराना मीटर दो यूनिट बिजली खपत दिखा रहा है। वो भी पूरे साल की। इस हिसाब से देखें तो दस में से चार कनेक्शन ऐसे हैं जिनका बिल जीरो आया है। जिसे देखकर ये भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या सिंधिया का राजमहल अटल गृह ज्योति योजना का फायदा ले रहा है। ये वही योजना है जिसके तहत एक बत्ती कनेक्शन दिया जाता है। गरीब सौ यूनिट तक बिजली खर्च से छूट ले सकता है। इस योजना में अब इतना बदलाव हुआ है कि सौ यूनिट तक सौ रुपए का बिल अदा करना होता है। क्या आलीशान महल को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है। ये सवाल उठेगा ही जब प्रदेश के किसान को बिजली नहीं मिलेगी। आम आदमी बिजली कटौती का शिकार होगा। तब ऐसे सवालों से कब तक बचा जा सकेगा। सरकार को भी ये तस्वीर साफ करनी चाहिए कि अघौषित कटौती के हालात क्यों बने। ये कब तक जारी रहेगी।

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