NEWS STRIKE : बीजेपी की टेंशन, संघ का एक्शन प्लान! MP से जेन जी को साधने की तैयारी

Harish Divekar | Nov 03, 2026, 07:00 IST
बीजेपी की टेंशन, संघ का एक्शन प्लान! MP से जेन जी को साधने की तैयारी
BJP's tension, Sangh's action plan! Prep to woo Gen Z from MP
आरएसएस का हेडऑफिस बेशक नागपुर है, लेकिन कामयाबी की प्रयोगशाला मध्यप्रदेश ही रहा है। जहां पहले संघ ने अपनी रीस्ट्रक्चरिंग पर फोकस किया और अब उसे परखने के लिए एमपी में ही जुटा है। एक एक्सपेरिमेंट के कनक्लूजन पर चर्चा हो रही है तो दूसरा एक्सपेरिमेंट शुरू करने की तैयारी है।

नए प्रयोग में अब संघ अपने नेटवर्क को और डेंस और मजबूत करने जा रहा है। फोकस में वो जेन जी वोटर्स हैं जो फिलहाल प्रोटेस्ट की राह पर ज्यादा नजर आ रहे हैं। ऐसे कई जेन जी वोटर्स हो सकता है राहुल गांधी की दिल्ली रैली का हिस्सा भी रहे हों। उन वोटर्स के बीच पैठ गहरी करने के लिए संघ की कवायद तेज है।



दो रैलियों ने बीजेपी समेत संघ की नींद उड़ाई

दो रैलियों ने बीजेपी समेत संघ की भी नींद उड़ा दी है। पहली रैली जंतर मंतर पर हुई रैली थी, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने की नौबत आ गई। उसके बाद बीजेपी और संघ दोनों को जेन जी की ताकत का अंदाजा हुआ। अब इंडिया गंठबंधन की रैलियां और मार्च टेंशन का कारण बन गए हैं।



सरकार अपने लेवल पर इनसे निपटने की प्लानिंग कर सकती है या कर ही रही होगी। लेकिन संघ ने इन हालातों को देखते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जेन जी वो वोटर्स हैं जो आने वाले इलेक्शन में सरकार बनाने के लिए वोट करेंगे। उनकी नाराजगी की बानगी सरकार, सिस्टम और संघ तीनों देख चुके हैं।



उनकी ताकत को समझते ही संघ तेजी से सक्रिय हो चुका है। खुद संघ प्रमुख जेन जी वोटर्स से सीधे संपर्क कर रहे हैं. चर्चा कर रहे हैं। ताकि संघ की विचारधारा को जेन जी के मुताबिक ढाल सकें और जेन जी को भी संघ की विचारधारा का हिस्सा बना सकें।



मोहन भागवत की आचार्य श्री समय सागर से मुलाकात

खासतौर से मध्यप्रदेश में संघ की सक्रियता किस तेजी से बढ़ी है। इसका अंदाजा संघ प्रमुख के प्रदेश दौरे से लगाया जा सकता है। अक्टूबर के महीने में संघ प्रमुख मोहन भागवत बार बार मध्यप्रदेश आए। अक्टूबर में वो इंदौर आए, फिर जबलपुर और बालाघाट में भी रहे और महीना खत्म होते होते वो अचानक भोपाल आए।



आरएसएस दफ्तर जाकर पदाधिकारियों से बैठक की और फिर जैन आचार्य श्री समय सागर महाराज से भी मिले। सितंबर में भी वो 13 और 14 तारीख को मप्र में ही थे। अब फिर से मध्यप्रदेश में है। इंदौर में उनकी तीन दिवसीय बैठक है। ये कोई आम बैठक या पदाधिकारियों से सामान्य चर्चा नहीं है, बल्कि संघ की बड़ी भारी बैठक है। हालांकि संघ हर साल एक बड़ी सालाना बैठक करता है। इसे भी वही सालाना बैठक बताया जा रहा है।



बैठक बड़ी इसलिए है क्योंकि इसमें चार सौ से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। तीन अहम बिंदुओं पर संघ के सारे प्रतिनिधि मंथन कर रहे हैं। जिसमें सबसे अहम मुद्दा युवा पीढ़ी से संघ को जोड़ने की कोशिश का ही है. इसी पर रणनीति तैयार की जाएगी।



40 प्रांतों में संघ चालक और प्रचारक सहायक का मंथन

इस रणनीति को तैयार करने के लिए 11 क्षेत्रों के संघ चालक, कार्यवाहक, प्रचारक, सहायक शामिल हैं। साथ ही 40 प्रांतों के संघ चालक और प्रचारक सहायक मंथन कर रहे हैं। 32 और संगठनों के राष्ट्रीय संघनट मंत्री, सह संगठन मंत्री भी इस माथापच्ची में जुटे हुए हैं। युवाओं से सीधा जुड़ने के लिए संघ की ताकत और नेटवर्क बढाना अब लाजमी सा हो गया है। इसलिए इतने सारे दिमाग मिलकर संघ की शाखा बढ़ाने पर भी चर्चा कर रहे हैं। शाखा बढ़ाने के साथ साथ कैसे बैठकों का दौर बढ़ाया जाए, इस पर बात होगी।



देशभर में संघ के 90 संभाग बनाने का विचार

इसके बाद कतार में है हिंदू सम्मेलन अपने शताब्दी वर्ष में संघ पूरे देश में 65 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन कर चुका है। उनका क्या इंपेक्ट हुआ। कितने कैंपस में ये सम्मेलन हो सके, ये भी चर्चा का हिस्सा है। एक अहम प्रस्ताव जो सामने आया है वो ये है कि अब देशभर में संघ के 90 संभाग बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। पहले दिन की बैठक यानी कि आज इस पर जमकर मंथन होने की खबर भी सामने आई है। आरएसएस अब तक के अपने सबसे ज्यादा सशक्त और बेहतरीन दौर में कहा जा सकता है। जिसकी शुरूआत जरूर नागपुर से हुई है. लेकिन पिछले कुछ सालों से संघ की प्रयोगशाला मध्यप्रदेश ही कहा जा सकता है. जहां संघ के खुद के विस्तार की बात करने के लिए जुटा है। अब से कुछ ही महीनों पहले संघ रीस्ट्रक्चरिंग पर चर्चा कर चुका है।



ये मंथन भी मप्र में ही हुआ था

यानी संघ अपने स्तर पर पहले ही काफी तैयारियां कर चुका है। जेन जी आंदोलन से पहले से संघ खुद को ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए एक्टिव हो चुका है। इसी साल मार्च में संघ ने अपने पुराने ढांचे को बदल कर कायाकल्प का फैसला लिया था। तब मप्र में बड़े बदलाव किए गए थे। पहले मप्र को संघ ने तीन प्रांतों में बांटा था। जो मालवा, महाकौशल और मध्य भारत थे। नई व्यवस्था के तहत मध्यभारत को सात अलग अलग संभागों में बांटा गया। जिसमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और रीवा को शामिल किया गया। हर संभाग की अपनी कार्यकारिणी बनाई गई। जिनकी निगरानी के लिए संभाग प्रचारक तैनात किए गए। कार्यसमिति में प्रदेश प्रचार, प्रदेश कार्यवाह, और दो तीन सहयोगी सदस्य भी बनाए गए जिनके नीचे संभाग, विभाग और जिला स्तरीय कमेटियां एक्टिव कर दी गईं।



बीजेपी के बीच मतभेद या मनमुटाव

अक्सर संघ और बीजेपी के बीच मतभेद या मनमुटाव की खबरें आती हैं। लेकिन संघ का लगातार अपने ढांचे को लगातार रिवाइव करना और नेटवर्क को ज्यादा मजबूत करना ये साफ जाहिर करता है कि मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं। लेकिन संघ, बीजेपी के लिए पूरी तरह एक्टिव है। नई कवायद भी ये जाहिर करती है कि अब जेन जी को साधने के लिए अगर सरकार इंस्टाग्राम पर आ रही है तो संघ जमीन पर नए अंदाज और नए स्ट्रक्चर के साथ उतरने की तैयारी कर चुका है। बल्कि यूं कहें कि उसका एग्जीक्यूशन भी हो चुका है। तमाम हिंदू सम्मेलन उस प्लानिंग का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन असल मास्टर स्ट्रोक संघ प्रमुख का सीधे जेन जी से रूबरू होना साबित हो सकता है।



राहुल गांधी की रैली में लाखों लोगों की भीड़

बेशक राहुल गांधी की रैली में लाखों लोगों की भीड़ जुटी है। भीड़ में शामिल हर व्यक्ति विचाराधारा से प्रेरित नहीं माना जा सकता। न ही उसके वोट में तब्दील होने की गारंटी ली जा सकती है। हो सकता है वो एक दिन का गुबार भर साबित हो। शायद इसलिए संघ पूरी तैयारी के साथ और तगड़े नेटवर्क से साथ जमीन पर उतरने की रणनीति तैयार कर रहा है, ताकि भीड़ का तोड़ निकाल सके और जेन जी का रिझा सके।

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