भोपाल में वायु प्रदूषण पर NGT सख्त, अफसरों को दो सप्ताह की मोहलत, 18 नवंबर को सुनवाई
एनजीटी भोपाल की पीठ और पक्ष
एनजीटी भोपाल की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ में न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह न्यायिक सदस्य रहे। विशेषज्ञ सदस्य के रूप में सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे। आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी उपस्थित रहे। प्रतिवादी (जिनसे जवाब मांगा गया) मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य हैं। सुनवाई में मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता पर विचार हुआ। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्य भी देखे गए। प्रदूषण के प्रमुख स्रोत रोकने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।
भोपाल वायु प्रदूषण के आंकड़े
पीएम10 यानी हवा में मौजूद बारीक धूल कण। इन्हें माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में नापा जाता है। भोपाल वायु प्रदूषण में पीएम10 का 2023-24 का औसत स्तर 113 रहा। वर्ष 2024-25 में यह 110 पर आ गया। यानी करीब 3 प्रतिशत का सुधार दर्ज हुआ। सोचिए एक बार। एक साल में भोपाल की हवा में सुधार सिर्फ 3 प्रतिशत रहा। लेकिन असली कहानी इंदौर के आंकड़ों में है।
सड़क की धूल पर सक्शन सफाई
भोपाल के हॉटस्पॉट (प्रदूषण वाली जगहों) के लिए अलग कार्ययोजना बनाने पर जोर रहा। सक्शन आधारित सफाई (धूल खींचने वाली सफाई) को प्राथमिकता देने की बात कही गई। सड़क किनारों और फुटपाथों की उचित व्यवस्था जरूरी बताई गई। उपयुक्त जगहों पर पौधरोपण की जरूरत भी गिनाई गई।
निगरानी केंद्र और हॉटस्पॉट
वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण की जरूरत भी बताई गई। निर्माण और विध्वंस गतिविधियों की निगरानी जरूरी है। निर्माण सामग्री और कचरे का उचित प्रबंधन भी जरूरी है। खुले में कचरा जलाने की घटनाएं रोकना भी शामिल है।
सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (CAAQMS) की संख्या बढ़ाने पर भी जोर रहा। ये केंद्र हवा की गुणवत्ता पर निरंतर नजर रखते हैं। इनकी जगह हॉटस्पॉट के आधार पर तय करने पर भी जोर दिया गया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक और ग्रेप
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की जानकारी भी रखी गई। यह हवा की हालत के हिसाब से चरणबद्ध कार्रवाई की योजना है। इसका आधार Air Quality Index है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में श्रेणियां इस तरह तय हैं। AQI 101 से 200 पर श्रेणी मध्यम है। 201 से 300 पर खराब श्रेणी है। 301 से 400 पर अत्यंत खराब श्रेणी है। 400 से ऊपर गंभीर श्रेणी मानी जाती है। श्रेणी के अनुरूप प्रतिबंध और सुधार के उपाय लागू करने पर जोर रहा। विभागों के बीच समन्वय की जरूरत भी बताई गई।
पटाखों से प्रदूषण पर सख्ती
त्योहारों में पटाखों से प्रदूषण हवा और शोर, दोनों में होता है। नियम किस आधार पर लागू होंगे? अधिकरण ने अधिकारियों को लागू नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देश पहला आधार हैं। दूसरा आधार मध्य प्रदेश शासन के लागू नियम और विनियम हैं। तीसरा आधार सर्वोच्च न्यायालय के प्रासंगिक आदेश हैं। ताकि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा हो सके।
अब आगे क्या होगा?
संबंधित अधिकारियों ने सुनवाई में बताया कि समय-समय पर बैठकें हो रही हैं। उनके मुताबिक सुधारात्मक उपाय भी किए जा रहे हैं। अधिकरण ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। पिछला आदेश 20 मई 2026 को आया था। राज्य और जिला समितियों के फैसलों के अनुसार कदम उठाने का निर्देश है। आगामी सुनवाई से पहले कार्रवाई की रिपोर्ट भी देनी होगी। अधिकरण ने साफ कहा कि सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं है। जमीन पर कार्रवाई, नियमित निगरानी और समयबद्ध पालन जरूरी है।