चौराहों पर नहीं बजेंगे लाउडस्पीकर: एनजीटी ने ट्रैफिक पुलिस को लगाई फटकार
समझें क्या है पूरा मामला
- ट्रैफिक चौराहों पर बजने वाले लाउडस्पीकर पर NGT ने सख्ती दिखाई है।
- हेलमेट पहनने और रेड लाइट जैसे संदेश देने वाले स्पीकर बंद होंगे।
- ट्रिब्यूनल ने कहा कि ट्रैफिक सुधार के नाम पर शोर नहीं बढ़ा सकते।
- अस्पताल, स्कूल और साइलेंस जोन के पास से लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे।
- पूरे शहर में अब नॉइज मैपिंग और डेसिबल टेस्ट कराया जाएगा।
ट्राफीक चौराहों पर दिनभर गूंजने वाली लाउडस्पीकर की आवाज अब बंद होगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने इस पर कड़ी सख्ती दिखाई है। चौराहों पर अक्सर हेलमेट पहनने और रेड लाइट जंप न करने के संदेश बजते हैं। ये तेज स्पीकर अब एनजीटी के निशाने पर आ गए हैं।
ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना बेहद जरूरी काम है। लेकिन इसके नाम पर लोगों की मानसिक शांति नहीं छीनी जा सकती।
लाउडस्पीकर से सेहत को क्या नुकसान होता है?
NGT ने प्रशासन को ऐसे सभी सिस्टम बंद करने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने तेज आवाज वाले स्पीकरों को नियंत्रित करने को कहा है। विशेषकर अस्पताल, स्कूल, कोर्ट और साइलेंस जोन के पास सख्ती रहेगी। इनके 100 मीटर के भीतर लगे स्पीकर तुरंत हटाए जाएंगे।
इसके साथ ही पूरे शहर में नॉइज मैपिंग कराई जाएगी। नियमित रूप से चौराहों का डेसिबल टेस्ट भी किया जाएगा। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी। तब तक प्रशासन को कई बड़े कदम उठाने होंगे।
दरअसल, भोपाल स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस ने ये हाई-वॉल्यूम सिस्टम लगाए हैं। इनसे चौराहों पर दिनभर रिकॉर्डेड अनाउंसमेंट होते रहते हैं। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इससे परेशानी बढ़ रही है। तेज आवाज के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
इन मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ेगा बुरा असर
कई जगह ये सिस्टम अस्पताल और स्कूल के ठीक सामने चल रहे हैं। लगातार तेज आवाज से लोगों में तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। डॉक्टरों के अनुसार इससे सिरदर्द और नींद न आने की समस्या होती है।
तेज शोर से ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी का खतरा है। इससे बच्चों की पढ़ाई और उनकी एकाग्रता पर बुरा असर पड़ता है। साइलेंस जोन के मरीज और बुजुर्ग इससे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
ट्रैफिक सुधारने के लिए NGT ने क्या सुझाव दिए?
एनजीटी ने ट्रैफिक को संभालने के लिए कुछ आधुनिक सुझाव भी दिए हैं। चौराहों पर लाउडस्पीकर की जगह बड़ी एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन लगाई जाएं। इन डिजिटल बोर्ड पर लिखकर लोगों को ट्रैफिक नियम समझाए जा सकते हैं।
इसके अलावा एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कैमरा सिस्टम को बढ़ाया जाए। तय सीमा से ज्यादा आवाज करने वाले सभी पुराने सिस्टम बंद हों। साइलेंस जोन के आसपास से स्पीकर तुरंत हटाए जाने चाहिए।
इस फैसले के दौरान एक पुराने मामले का जिक्र भी किया गया। एनजीटी ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के एक बड़े फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में भी चौराहों पर लाउडस्पीकर चलाने को गलत बताया गया था।
कोर्ट ने कहा था कि लाउडस्पीकर लोगों के लिए बड़ी परेशानी हैं। ट्रैफिक नियंत्रण के नाम पर नागरिकों को इस तरह परेशान नहीं कर सकते। इसी आधार पर अब भोपाल में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
FAQ
- NGT ने चौराहों पर बजने वाले लाउडस्पीकर को लेकर क्या आदेश दिया है?
NGT ने आदेश दिया है कि ट्रैफिक चौराहों पर तय डेसिबल सीमा से ज्यादा आवाज करने वाले पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम को बंद या नियंत्रित किया जाए। विशेष रूप से अस्पताल, स्कूल, कोर्ट और साइलेंस जोन के 100 मीटर के दायरे में आने वाले स्पीकरों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। - ट्रैफिक चौराहों पर लाउडस्पीकर से लोगों को क्या स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं?
लगातार तेज आवाज और शोर के कारण स्थानीय निवासियों में मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। इसके अलावा लोगों को सिरदर्द, नींद में बाधा, हाई ब्लड प्रेशर और दिल संबंधी बीमारियों का खतरा हो रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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