NHM संविदा कर्मचारियों का ऐलान : 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल, 8 जून को सीएम हाउस का घेराव
पांच पाइंट में समझें पूरे मामले को
- मध्यप्रदेश के 32 हजार NHM संविदा कर्मचारी 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
- कर्मचारियों की मांग: नियमितीकरण, वेतन सुधार, वार्षिक 10% वृद्धि और महंगाई भत्ता।
- चरणबद्ध आंदोलन: काली पट्टी, ज्ञापन, सांसद-विधायक-मंत्रियों से संवाद और अंत में सीएम निवास घेराव।
- समान काम के लिए समान वेतन और नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियों का लाभ की मांग।
- हड़ताल में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है, प्रशासन से मांगों का समाधान अपेक्षित।
NHM संविदा कर्मचारियों का ऐलान
भोपाल. मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत काम कर रहे लगभग 32 हजार संविदा कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी लंबित मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो 2 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।
कर्मचारियों का कहना है कि वे सालों से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। पूर्व में सरकार ने कुछ मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं लिया गया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
नियमितीकरण और वेतन सुधार
संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग की है। उनका कहना है कि सभी संविदा कर्मचारियों को स्थायी बनाया जाए। इसके साथ ही वेतन में सुधार, वार्षिक 10% वृद्धि और महंगाई भत्ता लागू किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य बीमा और NPS का लाभ
कर्मचारी चाहते हैं कि सामान्य प्रशासन विभाग की नीति 2023 के अनुसार न्यू पेंशन स्कीम (NPS) और हेल्थ इंश्योरेंस उन्हें मिले। इससे उनकी वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी।
समान काम के लिए समान वेतन
कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन की मांग भी की है। उनका कहना है कि वही काम करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन नहीं मिलना चाहिए।
छुट्टियों और अन्य सुविधाओं का समान लाभ
संविदा कर्मचारियों ने नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियों और अन्य सुविधाओं का लाभ देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इससे कार्य संतुलन बेहतर होगा।
चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा
- 25 से 27 मई: कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे।
- 28-29 मई: कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- 30 मई से 1 जून: सांसद, विधायक और मंत्रियों को समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।
- 2 जून से: सभी कर्मचारी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार करेंगे।
- 8 जून: भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि समय रहते उनकी मांगों को पूरा किया जाए।
2 जून से टोटल लॉकडाउन
अगर सरकार ने 1 जून तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया तो काम ठप होगा। आगामी 2 जून से प्रदेश के सभी 32 हजार कर्मचारी पूर्ण हड़ताल पर चले जाएंगे। वे सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन सरकारी कामों का पूरी तरह से बहिष्कार करने वाले हैं।
इस अनिश्चितकालीन हड़ताल से गांवों से लेकर शहरों तक की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी। टीकाकरण, प्रसव सेवाएं और ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में कर्मचारी भोपाल कूच करने की तैयारी में हैं। वे सभी मिलकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। इस बड़े सियासी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की तय की गई है।
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