NHM में तीन बार वसूली परीक्षा फीस, रिजल्ट जारी किए बिना ही रद्द कर दी भर्ती

Sanjay Sharma | May 14, 2026, 22:13 IST
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NHM ने स्टाफ नर्स के 2877 पदों के लिए 3 बार नोटिफिकेशन जारी किया। 1 लाख अभ्यर्थियों से 700-700 रुपए वसूले, कुल 7.35 करोड़ रुपए। परीक्षा रद्द कर दी गई और टाल दी गई। अगस्त 2023 की परीक्षा का रिजल्ट 2 साल से नहीं आया।

News in Short

  • स्टाफ नर्स 2877 पदों पर 3 बार नोटिफिकेशन, 700 रुपए फीस।
  • एक लाख अभ्यर्थियों से 2100-2100 रुपए, कुल 7.35 करोड़ वसूले।
  • पहली परीक्षा रद्द, दूसरी टली, तीसरी अगस्त 2023 का रिजल्ट नहीं।
  • हाईकोर्ट के आदेश के 60 दिन बाद भी NHM ने रिजल्ट नहीं दिया।
  • IPHS-2022 का हवाला देकर भर्ती टाली, फीस लौटाने पर चुप्पी।

News in Detail

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने स्टाफ नर्स भर्ती के नाम पर हजारों अभ्यर्थियों के करोड़ों रुपए डकार लिए हैं। तीन साल में 2877 पदों के लिए तीन बार नोटिफिकेशन जारी किए गए। हर बार 700 रुपए फीस ली गई। यानी एक अभ्यर्थी से 2100 रुपए वसूले गए। एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों से कुल 7.35 करोड़ रुपए जमा कराए। पहली बार परीक्षा रद्द कर दी, दूसरी बार टाल दी गई। तीसरी बार अगस्त 2023 में परीक्षा हुई पर रिजल्ट आज तक जारी नहीं हुआ। सैकड़ों चक्कर काटने के बाद अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे। अब NHM IPHS-2022 नियमों का हवाला देकर भर्ती टाल रहा है। फीस लौटाने पर भी चुप है।



बार- बार वसूलते रहे फीस

2 जून 2023 को NHM ने संविदा स्टाफ नर्स के 2877 पदों के लिए इश्तेहार जारी किया। MP ऑनलाइन से 700 रुपए फीस लेकर आवेदन कराए। 31 अगस्त 2023 को निजी एजेंसी से परीक्षा हुई। पर रिजल्ट नहीं आया। इससे पहले 2022 में भी भर्ती निकली थी। अभ्यर्थी सेंटर पहुंचे तो तकनीकी कारण बताकर लौटा दिया गया। 6 माह पहले भी इन्हीं पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। तीनों बार मिलाकर 1 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए। हर अभ्यर्थी से 2100 रुपए वसूले गए। कुल 7.35 करोड़ NHM के खाते में गए।



पहले रिजल्ट अटका, फिर रद्द की भर्ती

रिजल्ट के लिए अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने 60 दिन में रिजल्ट जारी करने को कहा। पर 60 दिन बीतने पर भी NHM टालमटोल करता रहा। कोर्ट के आदेश और अभ्यर्थियों के दबाव के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने गुपचुप भर्ती ही रद्द कर दी। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला स्तर पर पदों को भर दिए जाने का हवाला दिया गया है। मिशन की अपर संचालक दिशा प्रणय नागवंशी ने इस संबंध में पत्र भी जारी किया था। उन्होंने IPHS-2022 नॉर्म्स लागू होने को भर्ती न होने की वजह बताया। जबकि ये नियम किसी भर्ती पर रोक नहीं लगाते।



सरकार-मिशन में विरोधाभास

एनएचएम की नर्सिंग भर्ती को रद्द करने के पीछे जिला स्तर पर स्टाफ नर्स के पद भरे जाने का हवाला दिया गया है। वहीं मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग में 40 हजार से ज्यादा पद खाली बता रही है। इन पदों पर अगले 3 साल में भर्ती की घोषणा भी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने की है। ऐसे में मिशन द्वारा नर्सिंग भर्ती को पद रिक्त न होने का जवाब देकर रद्द करना विरोधाभास पैदा करता है। दो बार परीक्षा रद्द और तीसरी बार में महीनो तक रिजल्ट रोकने के बाद अब भर्ती रद्द करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



फीस लौटाने पर साधी चुप्पी

नर्सिंग भर्ती के अभ्यर्थी फरवरी 2026 तक स्टाफ नर्स के 2877 पदों पर भर्ती की राह देख रहे थे। पहले महीनों तक वे रिजल्ट का इंतजार करते रहे, लेकिन मिशन ने भर्ती ही रद्द कर दी। दो बार परीक्षा रद्द होने और तीसरी बार पेपर देने के बाद निराश अभ्यर्थी अब जमा की गई फीस वापस मांग रहे हैं। अभ्यर्थी इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य कार्यालय के कई चक्कर लगा चुके हैं। मिशन संचालक सलोनी सिडाना से लेकर कई अफसरों से भी बात कर चुके हैं। हांलाकि उन्हें राशि लौटाने के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।



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