हजारों प्राथमिक शिक्षकों को बेरोजगार बनाना चाहता है NIOS ? HC ने जताई नाराजगी

Neel Tiwari | Jul 22, 2026, 20:23 IST
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प्रदेश के हजारों प्राथमिक शिक्षकों के लिए नौकरी बचाने को जरूरी ब्रिज कोर्स में NIOS सबसे बड़ी रुकावट बन गया। कई आदेशों के बाद भी पोर्टल नहीं खुला। इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और चेतावनी दी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला..

  • प्राथमिक शिक्षक के लिए ब्रिज कोर्स पूरा करना जरूरी है।
  • ब्रिज कोर्स नहीं होने पर उनकी नौकरी पर खतरा बना हुआ है।
  • हाईकोर्ट कई बार NIOS को पोर्टल खोलने का आदेश दे चुका है।
  • आदेशों के बाद भी कई शिक्षकों का आवेदन नहीं हो सका।
  • अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अंतिम चेतावनी दी है।

प्रदेश के हजारों प्राथमिक शिक्षकों के लिए नौकरी बचाने को जरूरी ब्रिज कोर्स में NIOS सबसे बड़ी रुकावट बन गया। कई आदेशों के बाद भी पोर्टल नहीं खुला। इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि आदेश नहीं माना गया तो अधिकारी एस.के. पाण्डेय को 10 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।



नौकरी बचाने वाले ब्रिज कोर्स में NIOS बना बाधा

प्राथमिक विद्यालय के हजारों शिक्षकों के सामने इस समय नौकरी बचाने की चुनौती है। इसके लिए ब्रिज कोर्स करना जरूरी है। लेकिन यही ब्रिज कोर्स कराने में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान यानी NIOS सबसे बड़ी बाधा बन गया। कई बार हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद भी शिक्षकों के लिए पोर्टल नहीं खोला गया।



इसी रवैये पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि उसके आदेशों की लगातार अनदेखी हो रही है। इसका सीधा नुकसान उन शिक्षकों को हो रहा है, जिन्हें समय पर ब्रिज कोर्स पूरा करना है।



हाईकोर्ट बोला, आदेश नहीं माना तो अधिकारी खुद होंगे पेश

हाईकोर्ट ने साफ चेतावनी दी है। यदि 15 दिन के भीतर पोर्टल नहीं खोला गया, तो शपथपत्र देने वाले अधिकारी एस.के. पाण्डेय को 10 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। कोर्ट ने कहा कि जिन शिक्षकों के पक्ष में अंतरिम आदेश हैं, उन्हें आवेदन का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसमें किसी तरह की देरी स्वीकार नहीं होगी।



ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग मोड में होता है ब्रिज कोर्स

इस कोर्स में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के प्रोसेस से लेकर एलिजिबिलिटी शर्तों को पूरा करने के बाद कैंडिडेट का रजिस्ट्रेशन हो जाता है। उन्हें स्टडी मैटेरियल भी मिल जाता है। यह कोर्स ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग मोड में होता है। लाइव वीडियो लेक्चर भी होते हैं।



कोर्स करने वाले टीचर्स के लिए 90 फीसदी उपस्थिति जरूरी है और उसके बाद असेसमेंट प्रोसेस भी हैंल। एग्जाम के बाद डाइट, गवर्नमेंट इंटर कालेज असेसमेंट होगा, 10 दिन की प्रक्रिया होगी। कैंडिडेट को कम से कम 75 पर्सेंट स्कोर करना होगा। ब्रिज कोर्स में प्राइमरी टीचिंग के लिए जरूरी सभी कंपोनेंट को शामिल किया गया है।



ब्रिज कोर्स नहीं होने से नौकरी पर मंडरा रहा खतरा

ब्रिज कोर्स पूरा करना कई प्राथमिक शिक्षकों के लिए सेवा जारी रखने की अहम शर्त है। समय पर कोर्स नहीं होने से उनकी नौकरी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने माना कि आदेशों के बाद भी राहत नहीं मिलना गंभीर बात है। सरकारी संस्था का ऐसा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता।



26 याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई

यह मामला 26 याचिकाओं से जुड़ा है। सभी मामलों की एक साथ सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्रपाल सिंह रूपराह, के.सी. घिल्डियाल, अधिवक्ता देवेंद्र त्रिपाठी और अन्य वकील उपस्थित रहे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बार-बार आदेश आने के बाद भी शिक्षकों को आवेदन का मौका नहीं मिला।



पहले भी कई बार आदेश दे चुका है हाईकोर्ट

रिट याचिका क्रमांक 26118/2024 में हाईकोर्ट ने 26 अगस्त 2025 और 10 दिसंबर 2025 को आदेश दिए थे। कोर्ट ने NIOS को शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स की अनुमति देने का निर्देश दिया था।



जब इन आदेशों का पालन नहीं हुआ, तब 12 जनवरी 2026 को अवमानना प्रकरण क्रमांक 254/2026 में नोटिस जारी किया गया। इसके बाद भी स्थिति नहीं बदली।



दूसरे आदेश के बाद भी आवेदन नहीं हो सके

29 अप्रैल 2026 को रिट याचिका क्रमांक 15539/2026 में हाईकोर्ट ने फिर आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन और ब्रिज कोर्स के लिए मौका दिया जाए। इसके बावजूद कई शिक्षकों के लिए पोर्टल नहीं खोला गया। कुछ मामलों में पोर्टल खुला भी, तो आवेदन स्वीकार नहीं हुए। इससे शिक्षकों की परेशानी और बढ़ गई।



NCTE और NIOS के बड़े अधिकारियों का भी नाम आया

लगातार आदेशों की अनदेखी के बाद 18 मई 2026 को याचिकाकर्ताओं ने नया आवेदन दिया। इसमें NCTE की सदस्य सचिव सुखजीत कौर और एनआईओएस के सचिव कर्नल शकील अहमद की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिम्मेदार अधिकारी आदेशों का पालन कराने में विफल रहे।



हाईकोर्ट ने दिया अंतिम मौका

20 जुलाई 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को आखिरी मौका दिया। कोर्ट ने 15 दिन के भीतर पोर्टल खोलने का आदेश दिया। इससे सभी पात्र शिक्षक अपना आवेदन कर सकेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश हर हाल में लागू होना चाहिए।



अब 10 अगस्त की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर

अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी। यदि तब तक आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अधिकारी एस.के. पाण्डेय को खुद हाईकोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।



यह सुनवाई केवल एक पोर्टल की नहीं है। यह सवाल भी है कि सरकारी संस्थाएं हाईकोर्ट के आदेशों का कितना सम्मान करती हैं। इसका असर सीधे हजारों शिक्षकों के भविष्य और उनकी नौकरी पर पड़ रहा है।



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