DPI की दोहरी नीति: शिक्षक भर्ती में NIOS के डीएलएड डिप्लोमा को मान्यता नहीं
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- वर्ग-3 भर्ती में DPI मान्य नहीं कर रहा NIOS डिप्लोमा।
- अभ्यर्थियों को मौखिक निर्देश पर सत्यापन से लौटाया।
- इसी डिप्लोमा से पहले वर्ग-2 में हो चुकी हैं नियुक्तियां।
- शिकायत के बाद अधिकारी नहीं दे रहे संतोषजनक जवाब।
- उम्मीदवारी रद्द होने से अभ्यर्थी कोर्ट की शरण लेने मजबूर।
वर्ग 3 के अभ्यर्थियों के सामने उलझन
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती वर्ग 3 के अभ्यर्थियों के सामने उलझन खड़ी कर दी है। विभाग द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के डीएलएड के डिप्लोमा को अमान्य कर दिया गया है।
बिना किसी लिखित आदेश अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया से वापस लौटाया जा रहा है। विभाग के अधिकारी इस संबंध में कोई भी जवाब नहीं दे रहे हैं। विभाग द्वारा अचानक उम्मीदवारी रद्द करने से अभ्यर्थी निराश हैं।
रूलबुक की भी हो रही अनदेखी
प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए कर्मचारी चयन मंडल द्वारा अगस्त 2025 में चयन परीक्षा ली गई थी। परीक्षा की रूलबुक में चयन के लिए कटऑफ अंक के अलावा प्रारंभिक शिक्षा का डिप्लोमा होना जरूरी था।
रूल बुक में स्पष्ट उल्लेख है कि अंक सूची और डिप्लोमा मान्यता प्राप्त संस्थान से जारी होना चाहिए। इसके बावजूद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग जैसे केंद्र सरकार के संस्थान के डिप्लोमा को अमान्य किया जा रहा है।
आदेश नहीं केवल मौखिक निर्देश
प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों का कहना है एनआईओएस के डिप्लोमा के आधार पर हाल ही में शिक्षक वर्ग 2 में नियुक्तियां हुई हैं। तब डीपीआई द्वारा इस पर आपत्ति नहीं ली गई।
अब वर्ग 3 की नियुक्ति में अधिकारी उनकी नियुक्ति टाल रहे हैं। दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों को एनआईओएस का डिप्लोमा मान्य न होने का कहकर लौटाया जा रहा है। अधिकारी इसके लिए डीपीआई या विभाग की ओर से जारी कोई आदेश भी नहीं दिखा रहे हैं।
डीपीआई में भी सुनवाई नहीं
प्राथमिक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया में एनआईओएस के डीएलएड डिप्लोमा को अमान्य करने की शिकायत लोक शिक्षण संचालनालय में भी कर चुके हैं। हांलाकि वहां भी किसी अधिकारी ने उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग की अधिकारी कामना आचार्य द्वारा उन्हें लौटा दिया गया। वहीं जब डीपीआई कमिश्नर अभिषेक सिंह से शिकायत करने पर जब आचार्य को बुलाया गया तो उनके द्वारा डिप्लोमा के सत्यापन की बात कही गई। डीपीआई में दोहरी जानकारी देकर अभ्यर्थियों से पक्षपात किया जा रहा है।
तारीख निकलने की साजिश का अंदेशा
अभ्यर्थियों के अनुसार परिणाम जारी होने के चार महीने बाद डीपीआई द्वारा अचानक दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। इसके लिए सीमित समय दिया गया है। दस्तावेज सत्यापन की शुरूआत में एनआईओएस के डिप्लोमा पर कोई आपत्ति नहीं ली गई।
अब अचानक जिला स्तर पर हो रहे सत्यापन से डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को दूर कर दिया गया है। चयन समिति और जिला शिक्षा अधिकारी इस संबंध में डीपीआई के आदेश होने का हवाला दे रहे हैं।
उनका कहना है अधिकारी स्तर से आदेशित किया गया है इसलिए नियुक्ति में एनआईओएस के डीएलएड डिप्लोमाधारियों के आवेदन रद्द किए जा रहे हैं।
केंद्रीय संस्थान के डिप्लोमा पर सवाल
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग केंद्र सरकार का संस्थान है। इसके तहत प्राथमिक शिक्षण में दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है। जिसमें 18 माह का कोर्स और छह माह का शिक्षण शामिल होता है।
यह कोर्स केंद्र सरकार द्वारा निजी शैक्षणिक संस्थाओं में अध्यापन करने वाले शिक्षकों के लिए शुरू किया गया था। पूर्व में एनआईओएस के डिप्लोमा के आधार पर नियुक्तियां की जाती रही हैं। 2025 की शिक्षक भर्ती के लिए डीपीआई द्वारा इसी डिप्लोमा को अमान्य करने की बात अभ्यर्थी हजम नहीं कर पा रहे हैं।
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