निर्मला सप्रे दलबदल केस में 2 साल की देरी पर HC नाराज, कहा स्पीकर के संज्ञान में लाएं SC गाइडलाइन
News in Short
- हाई कोर्ट ने 90 दिन की 2 साल की देरी पर जताई नाराजगी।
- महाधिवक्ता बोले - स्पीकर के सामने चल रही है सुनवाई।
- उमंग सिंघार पक्ष ने मांगा तय समय में केस का निपटारा।
- सप्रे का दावा - “अब भी कांग्रेस में हैं”।
- विधानसभा अध्यक्ष ने दिए हैं उमंग सिंघार के दायर दस्तावेजों के सत्यापन के निर्देश।
Intro
बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में हाईकोर्ट ने देरी पर नाराजगी जताई है। 90 दिन की समयसीमा के बावजूद लगभग 2 साल बीतने पर कोर्ट ने सवाल उठाए। वही निर्मला सप्रे की ओर से दोबारा दावा किया गया कि वह अब भी कांग्रेस में हैं।
News in detail
सुनवाई में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जबलपुर हाईकोर्ट में बुधवार 29 अप्रैल को चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में हो रही लंबी देरी पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिन में निर्णय की समयसीमा तय की है, तो लगभग 2 साल बीतने के बाद भी मामला लंबित क्यों है।
मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कर रहे हैं सुनवाई
राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर के समक्ष शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उमंग सिंघार द्वारा कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, जिनकी सत्यता की जांच के निर्देश स्पीकर ने दिए हैं। साथ ही महाधिवक्ता ने दलील दी कि जब मामला स्पीकर के समक्ष विचाराधीन है, तो यह याचिका मेंटेनेबल नहीं है।
2 साल बाद भी फैसला नहीं होने पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में 90 दिन के भीतर फैसला होना चाहिए था, लेकिन अब जून 2026 तक करीब 2 साल पूरे होने जा रहे हैं। उन्होंने कोर्ट से निवेदन किया कि विधानसभा स्पीकर को तय समयसीमा के भीतर इस मामले का निपटारा करने के निर्देश दिए जाएं।
सप्रे का फिर दावा - “मैं अब भी कांग्रेस में”
वहीं निर्मला सप्रे की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कांग्रेस पार्टी ने 22 अप्रैल को एक दिन के विधानसभा सत्र के लिए व्हिप जारी किया था, जिसमें सभी विधायकों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। इसी के तहत 27 अप्रैल के सत्र में निर्मला सप्रे मौजूद रहीं। इस आधार पर सप्रे पक्ष ने एक बार फिर दावा किया कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं।
क्या था पूरा मामला?
सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहीं निर्मला सप्रे ने 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल कानून (संविधान की 10वीं अनुसूची) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष याचिका दायर की। आरोप है कि पार्टी बदलने के बावजूद सप्रे की विधायकी पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिससे मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा और अब यह लंबी कानूनी व राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है।
विधानसभा स्पीकर जल्द करें मामले का निपटारा - HC
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जस्टिस संजीव सचदेवा ने महाधिवक्ता से कहा कि भले ही यह टिप्पणी आदेश में दर्ज नहीं की जा रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन विधानसभा स्पीकर के संज्ञान में लाई जाए और मामले का जल्द निपटारा किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से देरी पर चिंता जताते हुए जल्द कार्रवाई का संकेत दिया।
अगली सुनवाई 18 जून को
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को तय की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या स्पीकर स्तर पर इस लंबे समय से लंबित दलबदल विवाद का समाधान होता है या फिर यह मामला और लंबा खिंचता है।
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